
भारत अन्य देशों की तरह ही एआई के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहता है. बेशक भारत में एआई का इस्तेमाल करने वालों की कमी नहीं है. लेकिन शायद एआई को तैयार करने में भारत को कुछ दिक्कतों का सामना जरूर करना पड़ रहा है. वहीं एआई के आने से लोगों को अपनी नौकरी के जाने का डर अलग सता रहा है.
हाल ही में टाइम मैगजीन ने एआई के क्षेत्र के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची 'टाइम 100 एआई 2025' जारी की है. इस लिस्ट की माने तो एआई का भविष्य कोई कंपनी नहीं बल्कि इंसान के लिए गए निर्णय ही तय तरते हैं. इस लिस्ट में विश्व भर की कई कंपनियों के मालिकों के नाम शामिल है जैसे इलॉन मस्क, सैम ऑल्टमैन, मार्क जुकरबर्ग, जेसन हुआंग आदि.
इस लिस्ट में कई भारतीय या भारतीय मूल के लोगों ने भी जगह बनाई है. ऐसे में एआई के पसरते पैरों के उपर उन्होंने भी अपनी राय साझा की. जिससे लोगों को एआई का महत्व समझ आ सके. साथ ही पता लगा सके कि क्या उन्हें अपस्किलिंग की जरूरत है या उनका करियर खतरे में है.
अपस्किलिंग से नौकरी का खतरा नहीं
दैनिक भास्कर में छपि रिपोर्ट के अनुसार रवि कुमार एस, सीईओ, कॉग्निजेंट मानते हैं कि युवाओं के लिए एआई में ज्यादा मौके फाइनेंशियल रिसर्च में क्रांति ला रही है. रवि कुमार का मानना है कि भविष्य में एआई से चलने वाले संगठन 'सेंटिएंट एंटरप्राइज' बन जाएंगे. ऐसे संगठन जो इंसानों की तरह सोचने और समझने में सक्षम होंगे. कई सीईओ जहां ये मानते हैं कि एआई से नौकरियां खत्म होंगी, वहीं कुमार का मानना है कि इससे शुरुआती करिअर वाले लोगों को ज्यादा मौके मिलेंगे. कॉग्निजेंट का अपस्किलिंग प्रोग्राम 'सिनैप्स' अब 20 लाख लोगों को जनरेटिव एआई की ट्रेनिंग देने का लक्ष्य लेकर चल रहा है. इस ट्रेनिंग की मदद से वह लोग भी एआई से रूबरू हो पाएंगे जिनके लिए यह बिलकुल नई तकनीक है और उन्हें भी नौकरी जाने का खतरा सताता है.
क्या है 'इंडिया एआई मिशन'
भारत सरकार ने देश को एआई के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए 'इंडिया एआई मिशन' की शुरुआत की है. इस मिशन की कमान 30 साल से सिविल सेवा में रहे अभिषेक सिंह को सौंपी गई है. इस मिशन का मकसद डेटा उपलब्ध कराना, स्टार्टअप्स को सपोर्ट देना और एआई तक सबकी पहुंच आसान बनाना है. इस मिशन के तहत अब तक 30 से ज्यादा एआई आधारित एप्लिकेशन बनाई जा चुकी हैं.
मुश्किल दूर करने के लिए घंटों की रिकॉर्डिंग
आईआईटी मद्रास के कंप्यूटर साइंस प्रोफेसर मितेश खापरा का रिसर्च ग्रुप एआई 4 भारत है. खापरा ने बहुत पहले समझ लिया था कि भारतीय भाषाओं में तकनीक इसलिए पिछड़ी है क्योंकि इन अनेक भारतीय भाषाओं से पर्याप्त डेटा उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. एआई 4 भारत ने इस कमी को दूर करने के लिए प्रोजेक्ट चलाया और देश के करीब 500 जिलों में जाकर हजारों घंटे की आवाजें रिकॉर्ड की गई. इन आवाजों को रिकॉर्ड करने का मकसद भारत की सभी 22 आधिकारिक भाषाओं को कवर करना था. जिससे हर भाषा में अधिक से अधिक डेटा को रिकॉर्ड किया जा सके.
एआई नहीं छीन सकता कलाकारों का हुनर
स्प्लाइस की सीईओ काकुल श्रीवास्तव का मानना है कि एआई का इस्तेमाल म्यूजिक इंडस्ट्री में कलाकारों की जगह लेने के लिए नहीं, बल्कि उनके काम को आसान और बेहतर बनाने के लिए होना चाहिए. श्रीवास्तव कहती हैं कि उनका मकसद पुश-बटन क्रिएटिविटी नहीं है, बल्कि ऐसे टूल्स बनाना है जो कलाकारों की रचनात्मकता को बढ़ावा दें. स्प्लाइस दुनिया के सबसे बड़े म्यूजिक सैंपल मार्केटप्लेस में से एक है. यहां 30 लाख से ज्यादा साउंड्स और सैंपल्स उपलब्ध हैं.