Representative Image
Representative Image
अगर आप पुरानी इलेक्ट्रिक कार खरीदने का सोच रहे हैं, तो सिर्फ उसकी कीमत, लुक और रेंज देखकर फैसला न करें. EV में सबसे जरूरी चीज उसकी बैटरी होती है. बैटरी कमजोर होने पर आगे चलकर आपको बड़ा खर्च करना पड़ सकता है. इसलिए कार खरीदने से पहले उसकी EV Battery Health जरूर जांच लें.
पुरानी इलेक्ट्रिक कार खरीदते समय सबसे पहले State of Health (SOH) रिपोर्ट मांगें. इससे पता चलता है कि बैटरी अपनी ओरिजीनल पावर के मुकाबले अभी कितनी अच्छी स्थिति में है. कई इलेक्ट्रिक कारों में यह जानकारी डैशबोर्ड या कंपनी के ऐप में मिल जाती है. अगर यह रिपोर्ट नहीं है, तो कार को सर्विस सेंटर पर जांच करवाना बेहतर रहेगा.
कार की बताई गई रेंज पर ही भरोसा न करें. टेस्ट ड्राइव के दौरान यह देखें कि फुल चार्ज होने के बाद कार कितनी दूरी तक चलती है. अगर कंपनी की बताई रेंज और कार की असली रेंज में काफी अंतर है, तो यह बैटरी की पावर कम होने का इशारा हो सकता है.
बैटरी की हालत खराब होने पर चार्जिंग में पहले से ज्यादा समय लग सकता है. अगर चार्जिंग बीच में रुकती है या कार फुल चार्ज होने में ज्यादा समय लेती है, तो इसे नजरअंदाज न करें. यह बैटरी से जुड़ी परेशानी का संकेत हो सकता है.
कार के पुराने मालिक से पूछें कि वह ज्यादातर फास्ट चार्जिंग करता था या नॉर्मल चार्जिंग. बार-बार फास्ट चार्जिंग करने से समय के साथ बैटरी पर असर पड़ सकता है. इसलिए कार की चार्जिंग हिस्ट्री के बारे में जानकारी लेना भी जरूरी है.
EV खरीदने से पहले बैटरी की वारंटी जरूर जांचें. कई कंपनियां बैटरी पर लंबी वारंटी देती हैं. यह भी पता करें कि बची हुई वारंटी नए मालिक को मिल सकती है या नहीं. साथ ही पूरी सर्विस हिस्ट्री देखें, ताकि बैटरी और कार की देखभाल के बारे में सही जानकारी मिल सके.
अगर आप पुरानी EV खरीदने वाले हैं, तो आखिरी फैसला लेने से पहले कंपनी के सर्विस सेंटर या किसी भरोसेमंद एक्सपर्ट से Battery Diagnostic Test जरूर करवाएं. इससे बैटरी सेल, अंदरूनी स्थिति और कुल प्रदर्शन की बेहतर जानकारी मिल सकती है. इस तरह थोड़ी जांच आपको भविष्य के बड़े खर्च से बचा सकती है.