scorecardresearch
Advertisement
ट्रैवल

जिस एफिल टावर को लेकर आज मचा है बवाल, उसके ये 8 राज शायद ही जानते होंगे आप

Eiffel Tower
1/8

इन दिनों एक बार फिर पेरिस का मशहूर एफिल टावर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह यहां उमड़ने वाली पर्यटकों की भीड़ या प्रेमी जोड़ों की तस्वीरें नहीं, बल्कि कर्मचारियों की हड़ताल है. एफिल टावर के कर्मचारियों ने एक निजी दौरे को लेकर विरोध जताया, जिसके बाद कुछ समय के लिए टावर को आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया. हालांकि, अब इसे दोबारा खोल दिया गया है. एफिल टावर से जुड़ा यह विवाद भले ही नया हो, लेकिन यह जगह अपनी करीब 137 साल पुरानी कहानी और कई हैरान करने वाले तथ्यों के लिए हमेशा चर्चा में रही है.

Eiffel Tower
2/8

एफिल टावर को पेरिस की पहचान माना जाता है. दुनिया के सबसे मशहूर पर्यटन स्थलों में शामिल यह टावर पहली बार पेरिस आने वाले लगभग हर पर्यटक की लिस्ट में रहता है. 1889 में इसे विश्व मेले के लिए बनाया गया था. उस समय फ्रांस फ्रांसीसी क्रांति की 100वीं वर्षगांठ मना रहा था और सरकार चाहती थी कि ऐसा निर्माण किया जाए, जो दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचे. इसके लिए प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें 107 डिजाइन पेश किए गए. इंजीनियर गुस्ताव एफिल और उनकी टीम का डिजाइन चुना गया.

Eiffel Tower
3/8

दिलचस्प बात यह है कि एफिल टावर के निर्माण का पूरा खर्च सरकार ने नहीं उठाया था. गुस्ताव एफिल को इसे बनाने के लिए अपनी जेब से भी बड़ी रकम लगानी पड़ी थी. उस समय निर्माण की अनुमानित लागत करीब 65 लाख फ्रैंक थी, जबकि सरकार की तरफ से लगभग 15 लाख फ्रैंक की मदद मिली थी. आज के हिसाब से देखें तो यह रकम करीब 3 करोड़ यूरो के आसपास बैठती है. यानी जिस टावर को आज फ्रांस की सबसे बड़ी पहचान माना जाता है, उसके निर्माण में खुद गुस्ताव एफिल ने भी बड़ा आर्थिक जोखिम लिया था.

Eiffel Tower
4/8

गुस्ताव एफिल के नाम पर टावर का नाम जरूर पड़ा, लेकिन इसे बनाने का काम अकेले उन्होंने नहीं किया था. करीब दो साल, दो महीने और पांच दिन में तैयार हुए इस विशाल ढांचे के पीछे इंजीनियरों, आर्किटेक्ट्स और मजदूरों की बड़ी टीम ने काम किया था. अनुमान के मुताबिक करीब 50 इंजीनियर और आर्किटेक्ट्स के साथ लगभग 500 मजदूरों ने इसके निर्माण में योगदान दिया. इतने बड़े लोहे के ढांचे को इतने कम समय में तैयार करना उस दौर की इंजीनियरिंग का बड़ा उदाहरण माना जाता है.

Eiffel Tower
5/8

जब एफिल टावर 1889 में बनकर तैयार हुआ, तब यह दुनिया की सबसे ऊंची इमारत थी. करीब 312 मीटर ऊंचे इस टावर ने 40 साल तक यह रिकॉर्ड अपने नाम रखा. बाद में 1929 में अमेरिका की क्रिसलर बिल्डिंग ने इसे पीछे छोड़ दिया. इसके बाद एम्पायर स्टेट बिल्डिंग ने भी ऊंचाई का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया. हालांकि, दुनिया की सबसे ऊंची इमारत न होने के बावजूद एफिल टावर की लोकप्रियता में कभी कमी नहीं आई.

Eiffel Tower
6/8

एफिल टावर की एक और खासियत यह है कि इसकी ऊंचाई हमेशा एक जैसी नहीं रहती. तापमान बढ़ने या घटने के साथ लोहे के फैलने और सिकुड़ने की वजह से टावर की ऊंचाई में थोड़ा बदलाव आता है. गर्मियों और सर्दियों के बीच इसकी ऊंचाई करीब 15 सेंटीमीटर तक बदल सकती है. तेज हवाओं के दौरान टावर थोड़ा हिलता भी है. यानी जिसे हम एक बिल्कुल स्थिर ढांचा समझते हैं, वह मौसम के असर से लगातार बेहद मामूली रूप से बदलता रहता है.

Eiffel Tower
7/8

इस विशाल टावर को जंग से बचाने और इसकी खूबसूरती बरकरार रखने के लिए नियमित रूप से पेंट किया जाता है. एफिल टावर पर एक बार में करीब 60 टन पेंट इस्तेमाल किया जाता है और आम तौर पर इसे लगभग सात साल के अंतराल पर पूरी तरह पेंट किया जाता है. अलग-अलग दौर में इसका रंग भी बदलता रहा है. 1968 में इसके लिए एक खास रंग चुना गया, जिसे 'Eiffel Tower Brown' नाम दिया गया. यानी टावर का मौजूदा रूप भी हमेशा से ऐसा नहीं था.

Eiffel Tower
8/8

एफिल टावर पर चढ़ने के लिए 1,665 सीढ़ियां हैं, हालांकि गुस्ताव एफिल उद्घाटन के समय इससे भी ऊपर तक चढ़े थे. उन्होंने खुद टावर की सीढ़ियों से ऊपर जाना पसंद किया था. आज पर्यटक भी इसके कुछ हिस्से तक सीढ़ियों से जा सकते हैं. खास बात यह है कि टावर पर सीढ़ियों से चढ़ने के लिए पहला गाइडेड टूर 2017 में शुरू हुआ. यानी टावर बनने के 120 साल से भी ज्यादा समय बाद लोगों को आधिकारिक तौर पर गाइड के साथ सीढ़ियों से इसकी सैर कराने का सिलसिला शुरू हुआ.