फ्लाइट में 60% सीटों पर एडिशनल चार्ज खत्म
फ्लाइट में 60% सीटों पर एडिशनल चार्ज खत्म
भारत में हवाई सफर करने वालों के लिए बड़ी राहत की खबर है. DGCA ने नया नियम जारी करते हुए एयरलाइंस को निर्देश दिया है कि हर फ्लाइट में कम से कम 60% सीटें बिना किसी एडिशनल चार्ज के देनी होगी. अब तक ज्यादातर यात्रियों की शिकायत थी कि टिकट बुक करते समय बेस फेयर तो कम दिखता है, लेकिन सीट चुनने के लिए अलग से पैसे देने पड़ते हैं, जिससे टिकट का खर्च बढ़ जाता है.
नया नियम क्या है?
DGCA के नए नियम के मुताबिक हर फ्लाइट में कम से कम 60% सीटें फ्री सीट सेलेक्शन के लिए होंगी. इसके अलावा एक ही बुकिंग (PNR) वाले यात्रियों को साथ बैठाने की कोशिश की जाएगी. इसका मकसद यात्रियों को राहत देना और एयरलाइंस की हिडन फीस पर लगाम लगाना है.
पहले क्या समस्या थी?
अगर आपने हाल के सालों में फ्लाइट बुक की है, तो आपने देखा होगा विंडो सीट के लिए 300 से 1300 तक चार्ज देना पड़ता है, साथ ही एग्जिट रो सीट के लिए 650–750 रुपये तक देने पड़ते हैं. कई बार तो 174 सीटों वाले विमान में सिर्फ 10% सीट ही फ्री मिलती हैं. बाकी सभी पेड होती हैं.
मान लीजिए दिल्ली से गोरखपुर की फ्लाइट बुकिंग में टिकट का बेस फेयर तो 6000 तक होता है लेकिन सीट सेलेक्शन के लिए 386 से 1300 तक देने पड़ते हैं. यानी अगर आप अच्छी सीट चाहते हैं, तो आपको अलग से पैसे देने पड़ते हैं.
नया नियम क्यों जरूरी था?
सोशल मीडिया पर लोगों की शिकायतें लगातार बढ़ रही थीं.
फ्री सीट का ऑप्शन नहीं दिखाया जाता था.
यात्रियों को जबरदस्ती पेड सीट लेने के लिए मजबूर किया जाता था.
परिवार के लोग अलग-अलग सीटों पर बैठ जाते थे.
खासकर बच्चों के साथ यात्रा करने वाले परिवारों को बहुत परेशानी होती थी.
क्या अब टिकट सस्ता हो जाएगा?
आपको सीट के लिए अलग से पैसे नहीं देने पड़ेंगे (कम से कम 60% सीटों पर) लेकिन टिकट का बेस फेयर थोड़ा बढ़ सकता है क्योंकि एयरलाइंस सीट सेलेक्शन से अच्छी कमाई करती थीं.
क्या सभी सीटें अब फ्री होंगी?
जवाब है नहीं. सिर्फ 60% सीटें फ्री होंगी. बाकी प्रीमियम सीट (जैसे फ्रंट रो, एग्जिट रो) अभी भी पेड रह सकती हैं.
यात्रियों को असली फायदा क्या मिलेगा?
टिकट बुकिंग ज्यादा पारदर्शी होगी.
सीट के लिए मजबूरी में पैसे नहीं देने पड़ेंगे.
परिवार साथ बैठ सकेगा.
बुकिंग का अनुभव आसान होगा.
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