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हटाए गए हाईटेंशन तार, पेड़ों की छंटाई, खोल दिए गए फुट-ओवर ब्रिज... आसान नहीं है 'बाहुबली ट्रक' का एक-एक इंच सफर

उत्तर प्रदेश की सड़कों पर इन दिनों एक बाहुबली ट्रक चल रहा है. जिसकी मौजूदगी से ही हलचल मच जा रही है. इस ट्रक पर 200 टन का हाइड्रोलिक ट्रेलर चीनी मिल के लिए बायोपॉलीमर मशीन बलरामपुर ले जा रहा है. अभी ये बाहुबली ट्रक बस्ती में है और धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है.

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Bahubali Truck Bahubali Truck

उत्तर प्रदेश की सड़कों पर इन दिनों एक अजीबोगरीब और हैरान कर देने वाला नजारा देखने को मिल रहा है. सोशल मीडिया से लेकर आम लोगों की जुबान पर इस समय सिर्फ एक ही नाम छाया हुआ है और वह है 'बाहुबली ट्रक'. यह बाहुबली ट्रक अब बस्ती पहुंच गया है, इस विशालकाय हाइड्रोलिक मल्टी-एक्सल ट्रेलर को देखने के लिए हर जिले की तरह बस्ती जिले में सड़कों के किनारे भारी जनसैलाब उमड़ रहा है. 

बेल्जियम से चला है बाहुबली ट्रक-
इस सफर की शुरुआत बेल्जियम से होती है, जहां से समुद्री रास्ते के जरिए इस भारी-भरकम मशीन को ओडिशा के पारादीप पोर्ट पर उतारा गया था. वहां से सड़क मार्ग के जरिए झारखंड और बिहार के विभिन्न रास्तों को पार करते हुए यह भारी भरकम काफिला उत्तर प्रदेश की सीमा में दाखिल हुआ. ट्रक के साथ चल रहे मैनेजर ने बताया कि इस विशालकाय हाइड्रोलिक ट्रेलर में 308 पहिए लगे हुए हैं, जो करीब 20 विशेष ट्रॉलियों को आपस में जोड़कर तैयार किए गए हैं.

बाहुबली ट्रक पर क्या लदा है?
इस ट्रक पर कोई आम सामान नहीं, बल्कि एक विशाल वैक्यूम वेसल यानी बॉयलर लदा हुआ है. इस मशीन का वजन लगभग 200 टन, लंबाई करीब 100 फीट और ऊंचाई 20 फीट से भी ज्यादा है. इस महाकाय वेसल को बलरामपुर चीनी मिल के प्लांट में ले जाया जा रहा है, जहां इसका उपयोग एथेनॉल और एशिया के पहले बायोपॉलीमर यानी बायोप्लास्टिक के निर्माण कार्य में किया जाएगा. 

बाहुबली ट्रक की खासियत-
इस बाहुबली ट्रक की सबसे बड़ी खासियत इसका आकार और इसके पहियों की खास तकनीक है. इसके पहियों को अलग-अलग दिशाओं में मोड़ा जा सकता है, जिसकी मदद से इतने बड़े ट्रेलर को तंग और संकरे रास्तों से भी सुरक्षित निकाला जा रहा है. हालांकि, इसका वजन इतना ज्यादा है कि ट्रक की रफ्तार चींटी की तरह बेहद धीमी है. यह रोजाना सिर्फ 10 से 20 किलोमीटर की ही दूरी तय कर पाता है और रात के समय इसे रोक दिया जाता है. इस ट्रक में करीब 400 लीटर क्षमता का डीजल टैंक है और इसे चलाने में रोजाना भारी मात्रा में ईंधन खर्च हो रहा है. इसके साथ करीब 14 गाड़ियों का एक पूरा काफिला चल रहा है, जिसमें क्रेन, हाइड्रा, जेसीबी और सिविल सहित टेक्निकल एक्सपर्ट्स की टीम शामिल है.

प्रशासन भी है एक्टिव-
बस्ती जिले और उसके आसपास के इलाकों से गुजरते वक्त इस ट्रक को सुरक्षित निकालने के लिए प्रशासन और तकनीकी टीम को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है. रास्ते में आने वाले बिजली के हाई-टेंशन तारों को हटाना, पेड़ों की छंटाई करना और कई जगहों पर पुल या फुट-ओवर ब्रिज के हिस्सों को अस्थायी रूप से हटाना या उठाना पड़ रहा है. जहाँ कहीं भी सड़क संकरी मिलती है, वहां पहले तकनीकी टीम पहुंचकर रास्ता तैयार करती है, उसके बाद ही ट्रेलर को आगे बढ़ाया जाता है. जैसे ही यह बाहुबली ट्रक बस्ती जिले से गुजरा, इसे देखने के लिए लोगों का तांता लग गया.

आलम यह है कि लोग इस अनोखे नजारे को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करने के लिए बेताब दिखे. हाईवे के किनारे खड़े होकर सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर रील्स बना रहे हैं और कई लोग तो दूर-दूर से सफर तय करके इस विशालकाय ट्रक की एक झलक पाने के लिए खींचे चले आ रहे हैं. उत्तर प्रदेश की सड़कों से गुजरता हुआ यह सफर देश भर में एक बड़ा आकर्षण बन चुका है और इसकी हर एक मूवमेंट पर लोगों की पैनी नजर बनी हुई है.

(सतीश श्रीवास्तव की रिपोर्ट)

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