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15 मिनट में पूरा होगा 50 मिनट का सफर, 11 साल का इंतजार खत्म, जल्द होगा बारापुल्ला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर का उद्घाटन

दिल्ली और एनसीआर के लाखों लोगों के लिए 11 साल का इंतजार खत्म होने को है. बारापुल्ला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर बनकर तैयार हो गया. जल्द ही इसका उद्घाटन होगा और इसे आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा. इस कॉरिडोर से 50 मिनट का सफर 15 मिनट में पूरा होगा.

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Barapulla Phase-3 Corridor Barapulla Phase-3 Corridor

दिल्ली और एनसीआर के लाखों लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है. करीब एक दशक से ज्यादा समय से इंतजार किया जा रहा बारापुल्ला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर अब पूरी तरह तैयार हो गया है. लोक निर्माण विभाग (PWD) ने परियोजना का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखकर उद्घाटन की तारीख तय करने का अनुरोध किया है. उम्मीद है कि अगस्त महीने में इस कॉरिडोर को जनता के लिए खोल दिया जाएगा.

50 मिनट की दूरी 15 मिनट में होगी पूरी-
इस एलिवेटेड कॉरिडोर के शुरू होते ही पूर्वी दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली के बीच सफर पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और आसान हो जाएगा. मयूर विहार फेज-1 से एम्स, आईएनए, साउथ एक्स और सरोजिनी नगर तक वाहन बिना किसी ट्रैफिक सिग्नल के सीधे पहुंच सकेंगे. जहां अभी इस सफर में 50 मिनट से लेकर एक घंटे तक का समय लग जाता है, वहीं कॉरिडोर खुलने के बाद यह दूरी महज 10 से 15 मिनट में तय की जा सकेगी.

किन इलाकों को होगा सबसे ज्यादा फायदा?
इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार, त्रिलोकपुरी, कल्याणपुरी, दल्लूपुरा, वेस्ट विनोद नगर और आसपास के इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों को मिलेगा. वहीं दक्षिणी दिल्ली के एम्स, आईएनए, साउथ एक्स, सरोजिनी नगर और रिंग रोड से जुड़े क्षेत्रों तक पहुंचना पहले की तुलना में काफी आसान हो जाएगा. इसके अलावा एनएच-24, डीएनडी फ्लाईवे, सराय काले खां और रिंग रोड पर ट्रैफिक का दबाव भी कम होने की उम्मीद है.

क्या है बारापुल्ला फेज-3 परियोजना?
बारापुल्ला फेज-3 लगभग 3.5 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर है, जो पहले से बने बारापुल्ला कॉरिडोर को पूर्वी दिल्ली तक जोड़ता है. यह दिल्ली के सबसे महत्वपूर्ण शहरी परिवहन प्रोजेक्ट्स में से एक माना जाता है, क्योंकि इससे राजधानी के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों के बीच सिग्नल-फ्री कनेक्टिविटी मिलेगी.

11 साल की देरी क्यों हुई?
इस परियोजना को 2014 में मंजूरी मिली थी और 2015 में निर्माण कार्य शुरू हुआ. लक्ष्य 2017 तक इसे पूरा करने का था, लेकिन कई कारणों से यह लगातार टलता रहा.

  • भूमि अधिग्रहण में देरी.
  • ठेकेदारों से जुड़े विवाद.
  • निर्माण एजेंसियों के बीच समन्वय की समस्याएं.
  • कोविड महामारी के दौरान काम प्रभावित होना.

लागत भी बढ़ी-
जब इस परियोजना को मंजूरी मिली थी, तब इसकी अनुमानित लागत लगभग 964 करोड़ रुपये थी. लगातार देरी और निर्माण लागत बढ़ने के कारण अब इसकी कुल लागत बढ़कर लगभग 1,330 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है.

एंटी करप्शन ब्रांच की जांच के बाद बढ़ी रफ्तार-
दिल्ली सरकार ने परियोजना में हुई देरी और कथित अनियमितताओं की जांच एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) से कराने के निर्देश दिए थे. इसके बाद निर्माण कार्य में तेजी लाई गई.

सिग्नल-फ्री सफर से क्या होगा फायदा?
कॉरिडोर पूरी तरह सिग्नल-फ्री होगा, जिससे वाहन बिना रुके लगातार चल सकेंगे। इससे ईंधन की बचत होगी, यात्रा का समय कम होगा और प्रदूषण में भी कमी आने की संभावना है. साथ ही आश्रम से एम्स और सराय काले खां के आसपास रोजाना लगने वाले ट्रैफिक जाम में भी राहत मिलेगी.

उद्घाटन का इंतजार-
PWD ने मुख्यमंत्री कार्यालय को उद्घाटन के लिए पत्र भेज दिया है. माना जा रहा है कि अगस्त में इस कॉरिडोर का उद्घाटन किया जा सकता है. यदि ऐसा होता है तो वर्षों से लंबित यह परियोजना आखिरकार दिल्ली के लाखों यात्रियों के लिए राहत लेकर आएगी और राजधानी के सड़क नेटवर्क को नई मजबूती मिलेगी.

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