
Ganga Expressway
Ganga Expressway
उत्तर प्रदेश अब 'एक्सप्रेसवे प्रदेश' के तौर पर अपनी पहचान लगातार मजबूत करता जा रहा है. सूबे का सबसे बड़ा और देश के सबसे महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल गंगा एक्सप्रेसवे अब लगभग तैयार है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 अप्रैल को हरदोई में एक्सप्रेसवे को देश को समर्पित करेंगे. इससे पहले हमारी टीम ने इस एक्सप्रेसवे पर प्रयागराज से मेरठ तक करीब 594 किलोमीटर का सफर तय किया और इस पूरे रास्ते हर उस सुविधा को महसूस किया, जो इसे देश के सबसे आधुनिक एक्सप्रेसवे में शामिल करती है.
सुबह 11 बजे शुरू हुआ सफर-
सुबह करीब 11 बजे हम प्रयागराज के शुरुआती प्वाइंट से निकले. बनारस-कानपुर हाईवे को जोड़ने वाले पहले एंट्री गेट से जैसे ही गंगा एक्सप्रेसवे पर गाड़ी चढ़ी, सामने चौड़ी, चमचमाती और दूर तक सीधी सड़क दिखाई दी. पहली नजर में ही एहसास हो गया कि यह सिर्फ सड़क नहीं, उत्तर प्रदेश की नई रफ्तार है.
धनुष की आकृति का टोल प्लाजा-
कुछ दूरी आगे बढ़ते ही एक विशाल और धनुष की आकृति वाला टोल प्लाजा दिखाई दिया. आधुनिक डिजाइन वाला यह टोल सिर्फ सुंदर ही नहीं, तकनीक से भी लैस है. हमने कंट्रोल रूम के अंदर जाकर देखा कि यहां हर वाहन की निगरानी हाईटेक कैमरों से होगी. ओवरस्पीडिंग से लेकर ट्रैफिक नियम तोड़ने तक हर गतिविधि रिकॉर्ड होगी. यहां तक कि बिना हेलमेट बाइक सवार का चालान भी सीधे उसके पते पर पहुंच सकेगा.
आगे बढ़ते हुए इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खासियत इंटरचेंज सिस्टम तक पहुंचे. जगह-जगह ऐसे मल्टी लेवल इंटरचेंज बनाए गए हैं, जहां से किसी भी दिशा में मुड़ा जा सकता है. चाहे स्टेट हाईवे हो, नेशनल हाईवे हो या वापस यू-टर्न लेना हो, हर रास्ता आसान और व्यवस्थित है.

अद्भुत फूड प्लाजा-
कुछ घंटों की ड्राइव के बाद हम एक फूड प्लाजा पर रुके. यहां पहुंचकर लगा जैसे किसी आधुनिक ट्रांजिट सिटी में आ गए हों. सिर्फ खाने-पीने की दुकानें ही नहीं, बल्कि कैफेटेरिया, देसी ढाबा, बच्चों के खेलने की जगह, पेट्रोल पंप, सीएनजी स्टेशन, इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग प्वाइंट, बड़ी और छोटी गाड़ियों के लिए अलग पार्किंग की व्यवस्था थी. करीब 400 गाड़ियों की पार्किंग क्षमता के साथ ट्रक और बस चालकों के लिए अलग सुविधाएं थीं. सबसे खास बात ट्रक ड्राइवरों के लिए फ्री डॉरमेट्री यानी आराम करने की व्यवस्था भी बनाई गई है.
फूड प्लाजा के अंदर कई बड़े ब्रांड्स के आउटलेट, रिटेल स्टोर और आइसक्रीम काउंटर भी दिखाई दिए. साफ दिख रहा था कि यह एक्सप्रेसवे सिर्फ सफर नहीं, बल्कि यात्रियों के पूरे अनुभव को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है.
मेडिकल इमरजेंसी की सुविधा भी-
आगे बढ़ने पर मेडिकल इमरजेंसी की सुविधाएं भी नजर आईं. ICU सुविधा वाला अस्पताल, एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस और प्रोफेशनल मेडिकल टीम तैनात रहेगी. वहीं, सुरक्षा के लिए हर 20 किलोमीटर पर पुलिस पेट्रोलिंग वाहन और एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है.

लगातार सफर के दौरान जब ड्राइवर को थकान महसूस हुई, तो हमने खुद स्टीयरिंग संभाली. जैसे ही गाड़ी 120 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पर पहुंची, सबसे ज्यादा हैरानी इस बात की हुई कि सड़क पर न कंपन था, न झटका… गाड़ी इतनी स्मूद चल रही थी जैसे किसी रनवे पर दौड़ रही हो.
3 किमी का एयरस्ट्रिप-
शाहजहांपुर के पास पहुंचते ही एक्सप्रेसवे का सबसे शानदार हिस्सा सामने आया. करीब 3 किलोमीटर लंबी एयरस्ट्रिप. यह वही जगह है जहां इमरजेंसी की स्थिति में लड़ाकू विमान उतारे जा सकते हैं. खुले आसमान के नीचे बनी यह एयरस्ट्रिप देखकर साफ लगा कि यह सड़क सिर्फ ट्रैफिक के लिए नहीं, रणनीतिक महत्व भी रखती है.
शाम ढलते-ढलते हमने करीब 457 किलोमीटर का सफर पूरा कर लिया था. इसके बाद IRB कंपनी द्वारा विकसित एक हाईटेक टोल प्लाजा पर पहुंचे. यहां पारंपरिक बैरियर नहीं थे. यानी बिना रुके, बिना लाइन लगाए, वाहन की स्पीड बरकरार रखते हुए ऑटोमेटिक टोल कट जाएगा. यह अनुभव बिल्कुल अलग था, जैसे भविष्य की सड़क पर चल रहे हों.
गंगा नदी पर विशाल पुल-
रात में हम उस हिस्से पर पहुंचे जिसके नाम पर इस एक्सप्रेसवे का नाम रखा गया, गंगा नदी पर बना विशाल पुल. हापुड़ के पास बना यह ब्रिज इतना मजबूत और संतुलित महसूस हुआ कि तेज रफ्तार पर भी कहीं कोई कंपन नहीं था.
अनोखी तकनीक व्हाइट अलर्ट स्ट्रिप्स-
यहीं हमें सबसे अनोखी तकनीक व्हाइट अलर्ट स्ट्रिप्स देखने को मिली. सड़क के किनारे लगी इन स्ट्रिप्स पर जैसे ही गाड़ी का टायर चढ़ता है, तेज कंपन और आवाज होती है. अगर ड्राइवर को झपकी आ रही हो, तो वह तुरंत अलर्ट हो जाए. हमने खुद इसे कार के अंदर और बाहर दोनों तरफ से महसूस किया. यह फीचर यात्रियों की सुरक्षा के लिए बेहद प्रभावशाली लगा.
पूरे रास्ते सड़क पर कहीं पैचवर्क नहीं दिखा. लंबे-लंबे एकसमान पेवमेंट की वजह से सड़क इतनी स्मूद बनी है कि झटके महसूस ही नहीं होते. यही कारण है कि यह एक्सप्रेसवे बाकी कई सड़कों से अलग दिखाई देता है.
रात करीब 12:30 बजे हम मेरठ पहुंचकर इस सफर को खत्म करते हैं. करीब 6 घंटे में 594 किलोमीटर का सफर, वो भी विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ.
इस दौरान हमने देखा कि गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की नई आर्थिक धुरी है. यह आगरा एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुरादाबाद हाईवे समेत कई बड़े मार्गों से जुड़ता है. यानी दिल्ली से प्रयागराज तक की दूरी अब पहले से कहीं ज्यादा आसान, तेज और आरामदायक होने जा रही है.
गंगा एक्सप्रेसवे पर यह सफर सिर्फ दूरी तय करने का अनुभव नहीं था. यह उत्तर प्रदेश के बदलते इंफ्रास्ट्रक्चर, नई सोच और नई रफ्तार को करीब से महसूस करने जैसा था.
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