India first hydrogen train
India first hydrogen train
देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन अपने अंतिम स्पीड ट्रायल की ओर बढ़ गई है. ट्रेन दो डीजल इंजनों के साथ जुड़कर जींद रेलवे स्टेशन से दिल्ली रेलवे स्टेशन के लिए रवाना हुई. दिल्ली पहुंचने के बाद इसे दिल्ली-सोनीपत रेलखंड पर फाइनल हाई स्पीड ट्रायल से गुजरना होगा. इस ट्रायल के दौरान ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटा रखी जाएगी.
दिल्ली-सोनीपत ट्रैक पर होगा फाइनल स्पीड टेस्ट
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, हाइड्रोजन ट्रेन का अंतिम स्पीड ट्रायल दिल्ली से सोनीपत के बीच किया जाएगा. ट्रायल पूरा होने के बाद ट्रेन वापस जींद लाई जाएगी. यह परीक्षण ट्रेन की तकनीकी क्षमता और सुरक्षा मानकों की अंतिम जांच के लिए बेहद अहम माना जा रहा है. इससे पहले ट्रेन का 75 और 85 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर सफल स्पीड ट्रायल किया जा चुका है. अब 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर इसकी परफॉर्मेंस को परखा जाएगा.
बाहर से मंगवाया गया हाइड्रोजन गैस टैंकर
हाई स्पीड ट्रायल के लिए विशेष रूप से हाइड्रोजन गैस का टैंकर बाहर से मंगवाया गया है. इसी गैस की मदद से ट्रेन के सिस्टम की कार्यक्षमता और प्रदर्शन का परीक्षण किया जाएगा. ट्रायल के दौरान पूरी प्रक्रिया पर रेलवे की तकनीकी टीम लगातार नजर रखेगी.
फाइनल ट्रायल के दौरान केवल ट्रेन की रफ्तार ही नहीं, बल्कि कई अन्य तकनीकी पहलुओं का भी परीक्षण किया जाएगा. इसमें ब्रेकिंग सिस्टम, इंजन की क्षमता, कंपन (वाइब्रेशन), ट्रैक पर ट्रेन की स्थिरता और अलग-अलग परिस्थितियों में उसकी कार्यक्षमता का आकलन किया जाएगा. रेलवे अधिकारियों का मानना है कि यह परीक्षण सफल होने के बाद हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जाएगा.
आरडीएसओ की टीम कर रही है निगरानी
24 जून को रेलवे डिजाइन एवं मानक संगठन (RDSO) की टीम जींद रेलवे स्टेशन पहुंची थी. टीम ने ट्रेन के भीतर वायरिंग, प्लेटिंग और अन्य तकनीकी कार्यों का निरीक्षण किया. इसके बाद फाइनल स्पीड ट्रायल की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया. रेलवे की तकनीकी टीम पूरे ट्रायल के दौरान हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर नजर रखेगी, ताकि किसी भी तकनीकी कमी की तुरंत पहचान की जा सके.
हाइड्रोजन ट्रेन को भारतीय रेलवे की भविष्य की पर्यावरण-अनुकूल तकनीक के रूप में देखा जा रहा है. यदि फाइनल स्पीड ट्रायल सफल रहता है, तो यह देश में स्वच्छ और आधुनिक रेल परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है.
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