
Naimisharanya
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धार्मिक एवं पर्यटन महत्व के नैमिषारण्य धाम में वेद आधारित थीम पर 'वेदारण्यम' विकसित किया जा रहा है. राज्य सरकार ने इस परियोजना के लिए करीब 14.09 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है, जिसमें से 7.04 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर दी गई है. पर्यटन विभाग द्वारा संचालित यह परियोजना आधुनिक सुविधाओं और पारंपरिक भारतीय ज्ञान के समन्वय के साथ तैयार की जा रही है. यह परियोजना पारंपरिक भारतीय ज्ञान, प्रकृति और आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का संगम होगी, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक अलग तरह का आध्यात्मिक अनुभव मिल सकेगा.
आध्यात्मिक केंद्र के साथ पर्यटन सुविधाएं
परियोजना के तहत परिसर का विकास वास्तु सिद्धांतों और प्राकृतिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा. सुरक्षा के लिए यूसीआर कंपाउंड वॉल और चेन लिंक फेंसिंग कराई जाएगी, जबकि म्यूरल वॉल के जरिए क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को उभारा जाएगा. प्रवेश क्षेत्रों को प्राकृतिक स्वरूप में विकसित किया जाएगा और सूचना स्तंभ स्थापित किए जाएंगे. परिसर के केंद्र में ब्रह्मस्थान बनाया जाएगा, जो पूरे क्षेत्र का आध्यात्मिक केंद्र होगा, वहीं उत्तर-पूर्व दिशा में चक्रतीर्थ से जुड़ा पवित्र जोन विकसित किया जाएगा.
पर्यटकों के लिए यहां ट्विन कॉटेज, गजीबो और सीढ़ीनुमा बैठने की व्यवस्था होगी. आवागमन के लिए प्राकृतिक पथ और ईंट किनारे से बने मार्ग तैयार किए जाएंगे, साथ ही पूरे परिसर में संकेतक बोर्ड लगाए जाएंगे. प्राकृतिक पार्किंग, पत्थर की बैठने की सुविधाएं और वृक्ष गमले भी विकसित किए जाएंगे.
वेद वन थीम के साथ सौंदर्यीकरण पर फोकस
परियोजना में ‘वेद वन’ की अवधारणा के तहत चारों वेद- ऋग, यजुर, साम और अथर्व के आधार पर अलग-अलग सेक्शन तैयार किए जाएंगे. इसके साथ ही पंचवृक्ष, आयुर्वेद, नक्षत्र और ‘संसार’ जैसे थीम आधारित क्षेत्र विकसित होंगे. आगंतुकों के लिए ऑडियो-गाइडेड ट्री ट्रेल भी तैयार किया जाएगा, जिससे वे पेड़-पौधों और उनके धार्मिक महत्व के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे.

बुनियादी सुविधाओं के तहत विभिन्न स्थानों पर शौचालय, टिकट काउंटर सहित सुरक्षा कक्ष, पॉकेट बी में कैफेटेरिया और पगोडा का निर्माण किया जाएगा. सौंदर्यीकरण के लिए पत्थर पिचिंग, पांच कमल तालाब, तुलसी वृंदावन और आकर्षक मूर्तियों का विकास भी प्रस्तावित है. इसके अलावा प्रवेश द्वार, ओवरहेड जल टंकी, सौर स्ट्रीट लाइट, जल एटीएम, कूड़ेदान, स्वतंत्र एवं परावर्तक संकेतक बोर्ड, पत्थर की नक्काशी और पर्गोला जैसे कार्य भी कराए जाएंगे.
नैमिषारण्य को राष्ट्रीय धार्मिक-पर्यटन केंद्र बनाने की तैयारी- जयवीर सिंह
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि, “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में नैमिषारण्य धाम को एक प्रमुख धार्मिक-पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है. वेदारण्यम परियोजना के माध्यम से यहां आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का विस्तार करते हुए इसके पारंपरिक और आध्यात्मिक स्वरूप को भी संरक्षित किया जाएगा. इस परियोजना में वेदों की थीम, प्राकृतिक संतुलन और वास्तु सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए पूरे परिसर का विकास किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक विशिष्ट आध्यात्मिक अनुभव मिल सके.
मंत्री ने बताया कि,"हमारा उद्देश्य है कि नैमिषारण्य को देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में स्थापित किया जाए. यहां विकसित होने वाली सुविधाएं न केवल यात्रियों को बेहतर अनुभव देंगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित करेंगी. परियोजना के पूर्ण होने के बाद यह क्षेत्र पर्यटन के नक्शे पर और अधिक मजबूती से उभरेगा और प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई मिलेगी.”
अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने बताया कि प्रदेश सरकार वेदारण्यम परियोजना को समयबद्ध और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है. इसमें आधुनिक सुविधाओं के साथ नैमिषारण्य की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. परियोजना पूरी होने के बाद यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और यह स्थल एक विशिष्ट आध्यात्मिक अनुभव के साथ प्रमुख पर्यटन आकर्षण के रूप में विकसित होगा, जिससे क्षेत्र के धार्मिक और पर्यटन महत्व में और वृद्धि होगी.
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