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बांग्लादेश में राष्ट्रपति चुनाव भारत से कितना अलग है? क्या हैं समानताएं? समझिये

बांग्लादेश में राष्ट्रपति का चुनाव के लिए वोटिंग आज यानी 20 अगस्त को दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक होगी. बांग्लादेश में भी भारत की तरह राष्ट्रपति को निर्वाचित प्रतिनिधि चुनते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि भारत और बांग्लादेश में राष्ट्रपति चुनाव में समानताएं हैं और क्या अलग होता है?

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Bangladesh Presidential Election 202 Bangladesh Presidential Election 202

बांग्लादेश में आज यानी 20 अगस्त को राष्ट्रपति चुनाव होने वाला है. इस चुनाव में बीएनपी उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर और 11 दलों के विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार रिटायर्ड कर्नल ओली अहमद के बीच मुकाबला हैं. चुनाव आयोग के मुताबिक वोटिंग जातीय संसद में दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक होगा. इस चुनाव में जीत हासिल करने वाले उम्मीदवार शुक्रवार को बंगभवन के दरबार हॉल में बांग्लादेश के नए राष्ट्रपति के तौर पर शपथ लेंगे.

बांग्लादेश में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर क्या नियम है और ये भारत में राष्ट्रपति चुनाव से कैसे अलग है. चलिए आपको बताते हैं.

बांग्लादेश की संसद में किसके पास कितने सांसद?
बांग्लादेश की संसद में कल 350 सीटें हैं. सीधे चुनी जाने वाली सीटें 300 हैं. इसमें से 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं. साल 2026 चुनाव के बाद 13वीं संसद में सत्तारूढ़ गठबंधन BNP के खाते में 212 सीटें हैं. इसमें से बीएनपी के पास 209 सीटें हैं, जबकि बीएनपी के सहयोगी दल के पास 3 सीटें हैं. जबकि जमात का 11 दलीय गठबंधन के पास 77 सीटें हैं. इसमें से जमात-ए-इस्लामी के पास 68 सीटें, नेशनल सिटिजन पार्टी के पास 6 सीटें, बांग्लादेश खिलाफत मजलिस के पास 2 सीटें के साथ बाकी सहयोगियों के पास 1-1 सीटें हैं.

बांग्लादेश में कैसे होता है राष्ट्रपति का चुनाव?
बांग्लादेश में राष्ट्रपति का चुनाव गुप्त मतदान के जरिए होता है. इसमें संसद सदस्य हिस्सा लेते हैं. राष्ट्रपति चुनाव बैलेट पेपर से होता है. हर बैलेट पेपर में एक हिस्सा रिकॉर्ड के लिए और दूसरा हिस्सा वोट डालने के लिए होता है. सांसद को बैलेट पेपर लेने सेप हले तय जगह पर अपना नाम लिखकर हस्ताक्षर करना होगा. इसके बाद वह अपनी पसंद के उम्मीदवार के नाम के सामने अपना नाम लिखकर हस्ताक्षर करेंगे.

बांग्लादेश का नेशनल पार्लियामेंट बिल्डिंग के सेशन चैंबर में चुनाव होगा. संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति का पद खाली होने के 90 दिनों के भीतर नए राष्ट्रपति का चुनाव होना जरूरी है.

बांग्लादेश में कब-कब बदली व्यवस्था?
बांग्लादेश में संविधान लागू साल 1974 में पहली बार राष्ट्रपति चुनाव हुआ. जिसमें सांसदों ने राष्ट्रपति चुना. इसके बाद साल 1975 में संविधान संशोधन के बाद राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता के जरिए कराने की व्यवस्था थी. लेकिन साल 1991 में संसदीय व्यवस्था लागू की गई और राष्ट्रपति का चुनाव सांसदों के जरिए होने लगे. अब तक देश में 12 राष्ट्रपति हुए हैं. जिसमें से 8 निर्विरोध चुने गए हैं. साल 1991 के बाद पहली बार 35 साल बाद बांग्लादेश में राष्ट्रपति पद के लिए मुकाबला हो रहा है.

भारत से कैसे अलग है बांग्लादेश का राष्ट्रपति चुनाव?
भारत में राष्ट्रपति का चुनाव संविधान की अनुच्छेद 54 और 55 के तहत निर्वाचक मंडल करता है. इस मंडल में संसद के दोनों सदनों लोकसभा औकर राज्यसभा के सभी निर्वाचित सांसद, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के सभी निर्वाचित विधायक शामिल होते हैं. राष्ट्रपति चुनाव में मनोनीत सांसद और विधायक वोट नहीं डालते हैं. जबकि बांग्लादेश में राष्ट्रपति चुनाव में सिर्फ जातीय संसद के सदस्य ही वोट डालते हैं.

भारत में राष्ट्रपति चुनाव में हर वोट का मूल्य एक समान नहीं होता है. राज्यों की आबादी और प्रतिनिधित्व के आधार पर वोट वैल्यू तय होती है. जबकि बांग्लादेश में राष्ट्रपति चुनाव में सांसदों के वोट की वैल्यू एक जैसी होती है.

भारत में आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर वोट दिया जात है. जबकि बांग्लादेश में संसदीय मतदान के जरिए राष्ट्रपति का चुनाव होता है.

भारत और बांग्लादेश में राष्ट्रपति चुनाव में समानताएं-
भारत और बांग्लादेश में राष्ट्रपति चुनाव के प्रोसेस में कई समानताएं हैं. चलिए आपको उनके बारे में बताते हैं.

  • भारत और बांग्लादेश में राष्ट्रपति का चुनाव निर्वाचित प्रतिनिधि के जरिए होता है.
  • दोनों देशों में राष्ट्रपति का चुनाव बैलेट पेपर से होता है.
  • भारत और बांग्लादेश में राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 साल का होता है.
  • दोनों देशों में राष्ट्रपति चुनाव का प्रोसेस संविधान में तय है.
  • भारत और बांग्लादेश में राष्ट्रपति प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल की सलाह पर काम करते हैं.
  • भारत और बांग्लादेश में राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख होता है.

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