scorecardresearch

Nepal Flood Reason: नेपाल में आखिर अचानक कैसे आ गई इतनी भीषण बाढ़? सामने आ गई असली वजह

नेपाल में बुधवार को अचानक आई बाढ़ ने भीषण तबाही मचा दी.  इस बाढ़ में अब तक 160 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं. अब सवाल उठ रहा है कि आखिर नेपाल में अचानक कैसे इतनी भीषण बाढ़ आ गई. अब इसका जवाब सामने आ गया है. यहां आप जान सकते कैसे इतना बड़ा जलप्रलय कैसे आ गया.

Advertisement
Massive Devastation in Nepal Following Floods Massive Devastation in Nepal Following Floods

नेपाल में बुधवार को आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी.  इस बाढ़ में अब तक 160 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं. इस बाढ़ ने लोगों को संभलने तक का मौका नहीं दिया. अब सवाल उठ रहा है कि आखिर नेपाल में अचानक कैसे इतनी भीषण बाढ़ आ गई. अब इसका जवाब सामने आ गया है. यहां आप जान सकते कैसे इतना बड़ा जलप्रलय कैसे आ गया.

तिब्बत में झील टूटने से बहा 2 करोड़ घनमीटर अतिरिक्त पानी
नेपाल के जल विज्ञान अनुसंधान केंद्र के अंतर्गत बाढ़ पूर्वानुमान महाशाखा ने बुधवार सुबह भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी नदियों में आई विनाशकारी बाढ़ से संबंधित विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट सार्वजनिक की है. रिपोर्ट के अनुसार, तिब्बत की ओर नदी का बहाव रुकने से बनी झील के टूटने के बाद रसुवा के भोटेकोशी से होते हुए त्रिशूली और नारायणी नदी के तटीय क्षेत्रों तक भारी तबाही हुई. बाढ़ के कारण नदी तटीय क्षेत्रों में स्थापित 4 स्वचालित जलमापन केंद्र बह गए. प्रारंभिक तकनीकी आकलन के अनुसार, देवघाट से ही बाढ़ के दौरान करीब 2 करोड़ घनमीटर अतिरिक्त पानी बहा.

भूकंप के बाद आई अचानक बाढ़
रिपोर्ट के अनुसार, 26 अगस्त की सुबह 8:37 बजे भूकंप मापन केंद्र ने 4.4 रिक्टर स्केल के भूकंप को दर्ज किया था. इसके कुछ ही समय बाद तिब्बत की ओर से भोटेकोशी नदी में अचानक भीषण बाढ़ प्रवेश करने की सूचना मिली. बाढ़ की सूचना मिलते ही बाढ़ पूर्वानुमान महाशाखा ने सुबह 9:15 बजे से नदी तटीय क्षेत्रों और जोखिम वाले बस्तियों में रहने वाले लोगों को लगातार चेतावनी संदेश और एसएमएस भेजना शुरू कर दिया. महाशाखा ने नेपाल टेलिकम और एनसेल कंपनी के सहयोग से रसुवा, नुवाकोट, धादिड़ और चितवन के जोखिम वाले क्षेत्रों के नागरिकों को कुल 6 लाख 79 हजार 295 पूर्वसूचना एसएमएस भेजे. इनमें नेपाल टेलिकम से 4 लाख 35 हजार 635 और एनसेल से 2 लाख 43 हजार 660 एसएमएस शामिल थे. रिपोर्ट में कहा गया है कि समय पर भेजी गई इन पूर्वसूचनाओं के कारण बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचकर अपनी जान बचाने में सफल रहे.

भूकंप से देवघाट तक बाढ़ की टाइमलाइन

  • सुबह 8:37 बजे: 4.4 रिक्टर स्केल का भूकंप दर्ज.
  • सुबह 8:50 बजे: भोटेकोशी स्याफ्रुबेंसी जलमापन केंद्र से आंकड़े मिलना बंद. अंतिम जलस्तर 1.62 मीटर था.
  • सुबह 9:00 बजे: रसुवा जिला प्रशासन कार्यालय और बेत्रावती जलमापन केंद्र के कर्मचारियों से तिब्बत की ओर से भोटेकोशी में बड़ी बाढ़ आने की सूचना मिली.
  • सुबह 9:15-9:16 बजे: मुग्लिन तक त्रिशूली नदी के तटीय क्षेत्रों के लिए पहली उच्च-सतर्कता सूचना जारी की गई और 6.79 लाख एसएमएस भेजे गए.
  • सुबह 9:20 बजे: बेत्रावती जलमापन केंद्र ने काम करना बंद किया. अंतिम जलस्तर 3.55 मीटर दर्ज हुआ.
  • सुबह 10:28 बजे: बाढ़ धादिड़-गल्छी क्षेत्र के आसपास पहुंची. पृथ्वी राजमार्ग, मुग्लिन-नारायणगढ़ सड़क और त्रिशूली तटीय बस्तियों के लिए फिर चेतावनी जारी की गई.
  • सुबह 11:26 बजे: मलेखु के फुर्केखोला जलमापन केंद्र पर जलस्तर चेतावनी सीमा से ऊपर पहुंचा.
  • सुबह 11:43 बजे: जलस्तर खतरे की सीमा पार कर गया और कुछ ही समय बाद पुल सहित जलमापन केंद्र बाढ़ में बह गया.
  • सुबह 11:50 बजे: बाढ़ मलेखु बाजार क्षेत्र के आसपास पहुंची.
  • दोपहर 1:00 बजे: बाढ़ मुग्लिन बाजार पार कर गई.
  • दोपहर 1:35 बजे: चीन की ओर नदी रुकने से बनी झील पूरी तरह नहीं खुली होने और खतरा अभी कायम रहने की सूचना दोबारा जारी की गई.
  • दोपहर 2:14 बजे: कालीखोला जलमापन केंद्र पर जलस्तर खतरे की सीमा 12.1 मीटर पार कर 12.3 मीटर के उच्चतम स्तर तक पहुंचा.
  • दोपहर 3:20 बजे: बाढ़ नारायणी-देवघाट क्षेत्र में पहुंची.
  • शाम 4:00 बजे: देवघाट जलमापन केंद्र पर जलस्तर 6.57 मीटर के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद घटने लगा.
  • शाम 6:30 बजे: देवघाट में नदी का बहाव करीब 4 मीटर के सामान्य स्तर पर लौट आया. 

4 जलमापन केंद्र बाढ़ में बहे
बाढ़ की तीव्रता इतनी अधिक थी कि जलविज्ञान तथा जलस्रोत अनुसंधान केंद्र के अंतर्गत संचालित चार जलमापन केंद्र बाढ़ में पूरी तरह बह गए. इनमें रसुवा भोटेकोशी, रसुवा स्याफ्रुबेंसी, नुवाकोट बेत्रावती और धादिड़ मलेखु (फुर्के) जलमापन केंद्र शामिल हैं. इनमें से कुछ केंद्र पुल सहित बाढ़ में बह गए. केंद्रों के नष्ट होने के कारण संबंधित क्षेत्रों से प्रत्यक्ष जलस्तर का आंकड़ा प्राप्त नहीं हो सका. तकनीकी आकलन के अनुसार, बाढ़ की पूरी अवधि में केवल देवघाट जलमापन केंद्र से करीब 2 करोड़ घनमीटर अतिरिक्त पानी बहने का अनुमान है. महाशाखा ने रसुवागढ़ी सीमा से लेकर नेपाल-भारत सीमा तक के क्षेत्र को अति उच्च जोखिम, उच्च जोखिम और मध्यम जोखिम वाले क्षेत्रों में वर्गीकृत करते हुए नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है.