खाने की हर चीज खुद उगाता है ये देश
खाने की हर चीज खुद उगाता है ये देश
जहां दुनिया के बड़े-बड़े देश आज भी खाने की कई चीजों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर हैं. वहीं एक ऐसा छोटा सा देश ऐसा भी है जो पूरी तरह अपने पैरों पर खड़ा है. जी हां, यह देश अपने यहां खाने की हर चीज उगाता है और बाहर से वह कुछ नहीं मांगता है. सबसे खास बात है कि यहां की 40 फीसदी आबादी भारतीय मूल के लोगों की है. जो एक जमाने में वहां भेजे गए थे और अब वहां के स्थायी बाशिंदे हैं. तो चलिए आपको बताते हैं इस देश के बारे में.
हम बात कर रहे हैं दक्षिण अमेरिका के देश गुयाना के बारे में. जी हां ये वही देश है जो खाने की कोई भी चीज किसी देश से नहीं लेता. गुयाना की कुल आबादी केवल 8 लाख के आस-पास है, जिसमें भारतीय मूल के लोगों की तादाद ही 3.5 लाख के आस-पास है. दरअसल, 19 सदी में जब भारत ब्रिटिश राज के अधिक था, तब यहां बड़े पैमाने पर लोगों को भारत से वहां गन्ना बागानों में काम करने के लिए भेजा गया था. ये लोग आमतौर पर उत्तर प्रदेश, बिहार और आसपास के क्षेत्रों से भेजे गए थे. तब से ये लोग वहीं बस गए.
कितना है देश का क्षेत्रफल
इस देश का क्षेत्रफल भारत के गुजरात के बराबर है, लेकिन आबादी गुजरात से काफी कम है . ध्यान देने वाली बात है कि, इस देश का 85 प्रतिशत भाग घने, दुर्गम वर्षा वनों से ढका हुआ है.
खाने का कोई भी सामान नहीं लेता बाहर से
गुयाना में फल, सब्जी, अनाज, मेवों से लेकर जो कुछ भी खाया जाता है, वो सब यहीं पर पैदा किया जाता है. यनी स्टार्च वाले मुख्य खाद्य पदार्थ से लेकर फलियां, मेवे, बीज, सभी प्रकार की हरी और अन्य सब्जियां, स्थानीय स्तर पर उगने वाले फल, दूध, पनीर और अन्य दुग्ध उत्पादन मुर्गी पालन, पोर्क, बीफ आदि और समुद्री और मीठे पानी की मछली. ये देश खुद ही सब उगाता है.यानी सातों श्रेणियों में आत्मनिर्भर है. हैरानी की बात यह है कि अमेरिका, चीन, रूस और भारत जैसे बड़े कृषि प्रधान देश भी सातों श्रेणियों में आत्मनिर्भर नहीं हैं.
बड़े-बड़े देश नहीं हैं आत्मनिर्भर
बता दें कि, गुयाना ने खुद को दुनिया से अलग नहीं किया है. यह आज भी किसी भी आधुनिक राष्ट्र की तरह व्यापार करता है लेकिन ये इसकी खासियत है कि यह देश अपने नागरिकों के खानपान की सारी जरूरत अपनी मिट्टी और पानी से पूरी करने की अनूठी क्षमता रखता है. अमेरिका केवल 4 श्रेणियों में पूरी तरह आत्मनिर्भर है. ब्रिटेन केवल 2 श्रेणियों में आत्मनिर्भर है. चीन और वियतनाम जैसे देश 6 श्रेणियों में तो आगे हैं, लेकिन सातवीं श्रेणी यानी डेयरी या दालों में आत्मनिर्भर नहीं, इसे उन्हें आयात करना पड़ता है.
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