scorecardresearch

UNGA में बोले जयशंकर, शांति का मतलब केवल युद्ध का न होना नहीं... 'आंतकवाद को लेकर जीरो टॉलरेंस'

जयशंकर ने UNGA में अपने संबोधन में विश्व में शांति, आतंकवाद और समुद्री सुरक्षा समेत कई मुद्दों पर बात की. उन्होंने कहा की आतंवाद के साथ कभी दोस्ती का साथ नहीं रह सकता.

Advertisement
S Jaishankar S Jaishankar

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 26 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने अपने भाषण में दुनिया में बढ़ते युद्ध, तनाव, आतंकवाद और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भारत का रुख रखा. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना दुनिया में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए हुई थी, लेकिन आज भी संघर्ष और टकराव बड़ी चिंता बने हुए हैं.

जयशंकर ने कहा कि आज दुनिया एक-दूसरे से जुड़ी हुई है. ऐसे में किसी एक हिस्से में होने वाले युद्ध का असर दूसरे देशों पर भी पड़ता है. इससे सुरक्षा के साथ-साथ व्यापार, ऊर्जा और विकास पर भी असर होता है. उन्होंने कहा कि शांति केवल युद्ध न होने का नाम नहीं है. दुनिया में लगातार तनाव और दबाव बने रहने से बड़े खतरे पैदा हो सकते हैं.

समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर जताई चिंता

विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों और समुद्री कर्मचारियों को निशाना बनाना स्वीकार नहीं किया जा सकता. उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की. साथ ही नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा तथा व्यापार की आवाजाही को जारी रखने पर जोर दिया.

यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत चिंतित

जयशंकर ने यूक्रेन में जारी संघर्ष का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि यह युद्ध पांचवें साल में पहुंच गया है और भारत इसे लेकर चिंतित है. उन्होंने शांति के लिए चल रही कोशिशों का समर्थन किया. उनके अनुसार लंबे समय तक चलने वाले युद्ध को खत्म करने की दिशा में प्रयास जरूरी हैं.

दोस्ती और सद्भावना आतंकवाद के साथ नहीं चलते

UNGA में जयशंकर ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति को दोहराया. उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ किसी तरह की ढील नहीं होनी चाहिए. उन्होंने बिना सीधे नाम लिए पाकिस्तान पर भी निशाना साधा और कहा कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों को अपना रवैया बदलना होगा. जयशंकर ने यह भी कहा कि दोस्ती और सद्भावना आतंकवाद के साथ नहीं चल सकते.

पश्चिम एशिया में शांति की अपील

जयशंकर ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चिंता जताई. उन्होंने तनाव कम करने, नागरिकों की सुरक्षा और शांति के लिए प्रयास करने की बात कही. भारत ने लंबे समय से पश्चिम एशिया में स्थायी शांति के लिए दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन किया है.