अब्दुल मजीद हकीम इलाही
अब्दुल मजीद हकीम इलाही
नई दिल्ली में आयोजित इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के दौरान ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने जानकारी देते हुए बताया कि क्या थी ईरान के सुप्रीम लीडर की आखिरी इच्छा. ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई के एक करीबी सहयोगी ने बताया कि बढ़ते तनाव के बावजूद उन्होंने अपने घर को छोड़कर किसी सुरक्षित स्थान या बंकर में जाने से इनकार कर दिया था. उनके सहयोगियों ने कई बार उनसे सुरक्षित जगह पर जाने की अपील की, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया.
सुरक्षा के लिए घर छोड़ने से किया इनकार
बताया गया कि जब क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण हो रहे थे और तेहरान, वॉशिंगटन तथा तेल अवीव के बीच तनाव बढ़ रहा था, तब भी खामेनेई अपने तेहरान स्थित आवास पर ही बने रहे. उनके सहयोगियों और सुरक्षा टीम ने उन्हें किसी सुरक्षित स्थान पर ले जाने का सुझाव दिया था, लेकिन उन्होंने स्पष्ट रूप से मना कर दिया था.
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में सामने आई जानकारी
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के दौरान ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने इस बारे में बात करते हुए बताया कि खामेनेई लगभग 37 वर्षों तक ईरान के सुप्रीम लीडर रहे और अपने फैसलों में काफी दृढ़ थे. इलाही ने कहा कि जब उन्होंने सुरक्षा अधिकारियों से पूछा कि खामेनेई को किसी सुरक्षित जगह क्यों नहीं ले जाया गया, तो उन्हें बताया गया कि उन्होंने खुद ऐसा करने से इनकार कर दिया था.
तेहरान के नागरिकों का दिया हवाला
इलाही के मुताबिक खामेनेई का कहना था कि अगर तेहरान के सभी नागरिकों के लिए सुरक्षित जगह की व्यवस्था हो सके, तभी वह भी अपना घर छोड़ने के लिए तैयार होंगे. उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि यदि 1.9 करोड़ लोगों वाले तेहरान के नागरिकों के लिए सुरक्षित शेल्टर उपलब्ध करा दिए जाएं, तब वह भी अपने घर से निकलकर किसी और स्थान पर जाने के लिए तैयार हैं.
नागरिकों की सुरक्षा को दी प्राथमिकता
इस बयान से यह संकेत मिलता है कि उन्होंने अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा से पहले आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी. यही कारण था कि उन्होंने कई बार आग्रह किए जाने के बावजूद अपने घर से कहीं और जाने का फैसला नहीं लिया. इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में उनके प्रतिनिधि द्वारा शेयर की गई, जिसमें खामेनेई के इस फैसले के पीछे की वजह बताई गई.
ये भी पढ़ें