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SCO Summit: शंघाई की जगह क्यों ली तियानजिन ने, क्या दिखाना चाहता है चीन दुनिया को... क्या है पीछे की रणनीति

चीन ने एससीओ शिखर सम्मेलन के लिए इस बार शंघाई की जगह तियानजिन का चुनाव किया है. एससीओ को उसका शंघाई से मिला है. लेकिन आयोजन की जगह बदलने को लेकर कई सवाल उठ रहे है. आखिर चीन ने ऐसा क्यों किया.

चीन 25वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन की मेज़बानी कर रहा है. इस बार, शिखर सम्मेलन में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, एससीओ के नेता बीजिंग या शंघाई, जो कि एससीओ का जन्मस्थान है, के बजाय तियानजिन में एक साथ दिखेंगे.

एससीओ शिखर सम्मेलन के लिए चीन ने तियानजिन को खास तौर पर चुना है. वह शहर के इतिहास, आर्थिक स्तिथि और वैश्विक भूमिका को उजागर करना चाहता है.

कैसे तियानजिन की बदली सूरत
डेढ़ करोड़ से ज़्यादा की आबादी वाला तियानजिन, बीजिंग और शंघाई के बाद चीन का तीसरा सबसे बड़ा शहरी केंद्र है. ऐतिहासिक रूप से, यह बीजिंग के लिए प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता था, जो यहां से केवल 120 किलोमीटर दूर है.

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1860 और 1945 के बीच, यह विदेशी रियायतों का शहर था. साथ ही यहां एक बहुराष्ट्रीय सैन्य सरकार भी रही. इस अनोखे अतीत ने इसे अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव का केंद्र बना दिया.

एक लोकप्रिय चीनी कहावत इसके महत्व को दर्शाती है: "यदि आप 5,000 साल पुरानी चीनी सभ्यता को समझना चाहते हैं, तो शीआन को देखें; 1,000 साल पुरानी सभ्यता को समझना चाहते हैं, तो बीजिंग को देखें; आधुनिक चीन को देखना चाहते हैं, तो तियानजिन को देखें."

वर्तमान में तियानजिन के हाल
आज, तियानजिन व्यापार, प्रौद्योगिकी और संस्कृति का एक फलता-फूलता केंद्र है. इसका बंदरगाह दुनिया के दस सबसे बड़े बंदरगाहों में से एक है, जो नौवहन और रसद सेवाओं का केंद्र है. यह विनिर्माण, ऑटोमोटिव और पेट्रोकेमिकल्स में अपनी मज़बूत पकड़ के साथ एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र भी है, साथ ही बीजिंग के लिए खाद्य आपूर्ति केंद्र के रूप में भी कार्य करता है.

नवाचार के केंद्र के रूप में, यह शहर हर साल लाखों स्नातक तैयार करता है और यहां राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग केंद्र भी है, जो कभी 2010 में दुनिया के सबसे तेज़ सुपरकंप्यूटर तियानहे-1ए का घर था. एयरबस, मोटोरोला और मित्सुबिशी जैसी वैश्विक कंपनियों ने यहां अपने अड्डे स्थापित किए हैं, जिससे यहां तेज़ी से विकास हो रहा है. 

SCO और तियानजिन, क्या है रणनीति
तियानजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन आयोजित करने का चीन का निर्णय सोच-समझकर लिया गया है. कभी विदेशी शक्तियों के प्रभुत्व वाले शहर को चुनकर, बीजिंग इस बात पर ज़ोर दे रहा है कि तियानजिन अब संप्रभुता, पुनरुत्थान और प्रगति का प्रतीक बन गया है. यह पश्चिम को संकेत देता है कि चीन ने एक नया अध्याय शुरू किया है और इस मंच का उपयोग वैश्विक व्यवस्था को नए सिरे से परिभाषित करने के लिए कर रहा है.

तियानजिन बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. एक "सुपर-हब" के रूप में, यह समुद्री और भूमि मार्गों को जोड़ता है—चीन-मंगोलिया-रूस कॉरिडोर को मध्य एशिया से होते हुए यूरोप तक फैले नए यूरेशियन लैंड ब्रिज से जोड़ता है.