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Bangladesh Election 2026: 12 फरवरी को होने वाले बांग्लादेश चुनाव पर दुनिया की नजर, जानें यह कैसे भारत पर डालेगा असर, क्या बदल जाएगा दक्षिण एशिया का पावर बैलेंस?   

बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को संसदीय चुनाव होने हैं. पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के देश छोड़ने और खालिदा जिया के निधन के बाद यह पहला चुनाव है. इस चुनाव में वैसे तो कई पार्टियां मैदान में हैं लेकिन मुख्य मुकाबला बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच है. बांग्लादेश के इस चुनाव पर पूरी दुनिया की नजरें लगी हैं, खासकर भारत, पाकिस्तान और चीन की. यह चुनाव तय करेगा कि आखिर बांग्लादेश देश भारत के करीब आएगा या पाकिस्तान और चीन की तरफ जाएगा. इस चुनाव से  दक्षिण एशिया का पावर बैलेंस बदल सकता है.

Bangladesh Election 2026 Bangladesh Election 2026

बांग्लादेश में इस समय सियासी पारा चरम पर है. 12 फरवरी 2026 को संसदीय चुनाव होने हैं. पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के देश छोड़ने और खालिदा जिया के निधन के बाद यह पहला चुनाव है. इस चुनाव में वैसे तो कई पार्टियां मैदान में हैं लेकिन मुख्य मुकाबला बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के बीच है. बांग्लादेश के इस चुनाव पर पूरी दुनिया की नजरें लगी हैं, खासकर भारत, पाकिस्तान और चीन की. यह चुनाव तय करेगा कि आखिर बांग्लादेश भारत के करीब आएगा या पाकिस्तान और चीन की तरफ जाएगा. इस चुनाव से  दक्षिण एशिया का पावर बैलेंस बदल सकता है.

300 सीटों पर इतने उम्मीदवार 
बांग्लादेश फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट सिस्टम से 300 सदस्यों वाली संसद का चुनाव करता है. इस साल 300 सीटों के लिए कुल 1981 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं, जिनमें 78 महिलाएं हैं. शेरपुर जिले में जमात उम्मीदवार के निधन के बाद कुल 299 सीटों पर ही वोटिंग होगी. 12 फरवरी 2026 को होने वाले मतदान में कुल 12 करोड़ 76 लाख 95 हजार मतदाता भाग लेंगे. मतदान सुबह 7:30 बजे से शुरू होगा और उसी दिन शाम में 4:30 बजे से मतगणना शुरू होगी. इस साल पहली बार विदेश में रहने वाले बांग्लादेशी भी पोस्टल बैलेट से वोट दे सकते हैं. 

शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग पर लगा है बैन 
आपको मालूम हो कि साल 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन ने बांग्लादेश में शेख हसीना की अवामी लीग सरकार को गिरा दिया था. शेख हसीना को देश छोड़कर भारत आना पड़ा था. बांग्लादेश में जो अंतरिम सरकार नोबेल विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बनी उसने शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग की राजनीतिक गतिविधियों पर बैन लगा दिया. ऐसे में कभी कभी मिलकर चुनाव लड़ने वाली बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी और शेख हसीना के कार्यकाल में मुख्य विपक्षी बीएनपी आज आमने-सामने हैं.  शेख हसीना की सरकार गिराने वाले छात्र आंदोलन से जन्मी नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) भी चुनाव मैदान में है. कई लोगों का मानना ​​​​है कि तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी इस चुनाव में सबसे आगे है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे लोग भी हैं जो कहते हैं कि जमात चौंका सकती है. 

क्यों महत्वपूर्ण है बांग्लादेश का यह चुनाव 
बांग्लादेश का यह चुनाव न सिर्फ बांग्लादेश के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि यह साउथ एशिया के लिए भी काफी अहम है. इस चुनाव के परिणामों पर देश के व्यापारिक संबंध और राजनयिक रिश्ते निर्भर कर सकते हैं. कई दशकों के बाद पहली बार बांग्लादेश की दो प्रमुख राजनीतिक हस्तियां शेख हसीना और खालिदा जिया के बिना चुनाव होने जा रहा है. इस चुनाव से सिर्फ बांग्लादेश के मतदाता नई सरकार नहीं चुनेंगे बल्कि एक संवैधानिक जनमत संग्रह पर भी वोट देंगे जो तय करेगा कि जुलाई चार्टर लागू होगा या नहीं. जुलाई चार्टर में बताया गया है कि बांग्लादेश पर कैसे शासन किया जाएगा. इस चुनाव में इस बात की भी परीक्षा होगी कि सालों की राजनीतिक उथल-पुथल और अस्थिरता से जूझ रहे बांग्लादेश में लोकतंत्र की बहाली संभव है या नहीं.

बांग्लादेश चुनाव का भारत और दक्षिण एशिया पर क्या पड़ेगा असर 
आपको मालूम हो कि शेख हसीना जब से सत्ता से बेदखल होकर भारत में रह रही हैं, तब से भारत के साथ बांग्लादेश के संबंध तनावपूर्ण रहे हैं.  भारत और बांग्लादेश की क्रिकेट को लेकर भी विवाद हुआ. बांग्लादेश का पाकिस्तान के साथ संबंध हाल के समय में बेहतर हुए हैं जबकि 1971 में पाकिस्तान से अलग होकर बांग्लादेश जब एक नया देश बना था, उसके बाद से दोनों देशों के बीच संबंध तनावपूर्ण ही रहे थे. मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में बांग्लादेश के चीन के साथ रणनीतिक रिश्ते और मजबूत हुए हैं. ऐसे में बांग्लादेश में होने जा रहे चुनाव पर  भारत, पाकिस्तान और चीन नजर बनाए हुए हैं. 

भारत चाहता है कि इस चुनाव के बाद बांग्लादेश में ऐसी सरकार बने जो भारत के साथ रिश्ते सुधार सके. राजनीति के जानकारों का कहना है कि भारत चाहता है कि अवामी लीग के चुनाव नहीं लड़ने पर बांग्लादेश बीएनपी की सरकार बने. जमात-ए-इस्लामी पार्टी की जीत होने पर भारत की चिंता बढ़ सकती है. जमात-ए-इस्लामी के सत्ता में आने पर सुरक्षा और कट्टरपंथ को लेकर दबाव बढ़ सकता है.हालांकि भारत दोनों पार्टियों से संपर्क बनाए हुए है. उधर, चीन भी बांग्लादेश में अपनी मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है. उसने मोहम्मद यूनुस की सरकार में काफी निवेश किया है. उधर, पाकिस्तान भी  बांग्लादेश को अपने पक्ष में करने में लगा है. पाकिस्तान ने बांग्लादेश से वीजा के नियम आसान करने पर बात की है. अंतरराष्ट्रीय बैठकों में पाकिस्तान खुलकर बांग्लादेश का साथ दे रहा है. दक्षिण एशिया के पावर बैलेंस के लिए बांग्लादेश इसलिए अहम है क्योंकि यह देश भूगोल, राजनीति, अर्थव्यवस्था और रणनीतिक हितों चारों मोर्चों पर एक साथ असर डालता है. दक्षिण एशिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते बांग्लादेश की स्थिरता दक्षिण एशिया की कूटनीतिक तस्वीर को महत्वपूर्ण रूप से आकार दे सकती है.