घर को अक्सर लोग केवल रिहाइश की जगह के तौर पर देखते हैं. लेकिन ज्योतिष और वास्तु मान्यताओं में घर को केवल रहने की जगह नहीं माना जाता. ऐसा माना जाता है कि जमीन, मकान और घर में रखी चीजों का भी एक तरह का प्रभाव होता है. जहां घर का वातावरण अच्छा हो तो मन शांत रहता है. वहीं, लगातार नकारात्मक माहौल रहने पर तनाव और परेशानी बढ़ सकती है. कुछ मान्यताओं के अनुसार घर की स्थिति का संबंध भी व्यक्ति की कुंडली से भी देखा जाता है.
वास्तु की मान्यताओं में पूर्व और उत्तर दिशा को सामान्य तौर पर शुभ माना जाता है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि पश्चिम या दक्षिण दिशा का घर हमेशा अशुभ होता है. हर दिशा के घर में कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है.
पूर्व दिशा के घर में साफ-सफाई और अच्छा वातावरण रखने की सलाह दी जाती है. पश्चिम दिशा के घर में लकड़ी के सामान का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल न करने की बात कही जाती है. जबकि उत्तर दिशा में आग और बिजली के सामान को लेकर सावधानी रखनी चाहिए. वहीं दक्षिण दिशा के घर में सीलन और गंदगी से बचना जरूरी माना जाता है.
घर में धूप और हवा का आना स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है. अंधेरा और बंद माहौल रहने से घर में नमी और असहजता बढ़ सकती है. इसलिए खिड़कियां खुली रखें और प्राकृतिक रोशनी आने दें. वास्तु मान्यताओं में ऐसे घरों के लिए सुबह शंख बजाने, गायत्री मंत्र का जाप करने और घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने की सलाह दी जाती है.
घर के रंग माहौल और मन पर असर डाल सकते हैं. बहुत गहरे रंगों के बजाय हल्के और साफ रंग घर को खुला और शांत महसूस करा सकते हैं. सफेद, क्रीम और हल्का पीला रंग घर में इस्तेमाल किया जा सकता है. छत पर हल्का रंग रखना भी बेहतर माना जाता है.
घर में लगातार झगड़ा, गलत काम या तनाव का माहौल हो तो इसका असर परिवार के सदस्यों पर पड़ सकता है. इसलिए घर में प्यार, शांति और साफ-सफाई बनाए रखना जरूरी है. किसी दुखद घटना के बाद घर की अच्छी तरह सफाई और रंग-रोगन कराने की सलाह भी कुछ धार्मिक मान्यताओं में दी जाती है. साथ ही पूजा-पाठ और अच्छे विचारों से घर का माहौल सकारात्मक रखने की बात कही जाती है.