कुंडली में छठवां भाव और ग्यारहवां भाव मुकदमे का होता है. कुछ दशाओं में आठवां और तीसरा भाव भी इसके बारे में बताता है. शनि मुख्य रूप से न्याय, कानून और मुकदमे का स्वामी होता है. शनि के कारण ही मुकदमेबाजी और सजा की नौबत आ जाती है. इसके अलावा सूर्य भी सजा और दंड दिलाने में बड़ी भूमिका निभाता है. मुकदमे में फंसाने और लड़वाने में मंगल की भी बड़ी भूमिका होती है.
कब व्यक्ति के जेल जाने की आ जाती है नौबत?
कुंडली में लग्न या छठवें भाव के स्वामी के कमजोर होने से व्यक्ति जेल चला जाता है. सूर्य या चन्द्र के साथ राहु का संयोग हो तो भी व्यक्ति के जेल जाने का योग बन जाता है. मंगल व्यक्ति को जेल भेजता है और बिना कारण के फंसा देता है. राहु भी व्यक्ति को बिना कारण झूठे आरोप में फंसाकर कुछ समय के लिए जेल भेज देता है. सूर्य पर्वत पर तिल हो तो भी जेल जाने के योग बन जाते हैं.
सूर्य और चंद्रमा से मुकदमेबाजी और जेल का क्या है संबंध?
सूर्य या चंद्रमा पाप ग्रहों से पीड़ित हों या सूर्य चन्द्रमा का सम्बन्ध राहु के साथ हो तो व्यक्ति को मुकदमे का सामना करना पड़ता है. आम तौर पर यह मुकदमे सरकार या राज्य से सम्बंधित होते हैं कर, व्यापार, बिजली और सरकारी विभागों के मुकदमे इसी में आते हैं.
मंगल का जेल और मुकदमेबाजी से क्या है संबंध?
मंगल के कारण मार-पीट, हिंसा और अपराध की नौबत आ जाती है. व्यक्ति कुछ ऐसे कार्य करता है, जिससे विवाद और मुकदमे की नौबत आ जाती है. मंगल ज्यादा ही खराब हो तो व्यक्ति जेल भी चला जाता है. ऐसी दशा में मुकदमा काफी समय तक परेशान करता रहता है.
राहु का जेल और मुकदमेबाजी से क्या है संबंध?
राहु के कारण मुकदमा झूठा होता है. व्यक्ति बिना कारण मुकदमे में फंस जाता है. अगर मंगल भी कमजोर हो तो बिना वजह जेल भी जाता है. हालांकि कुछ समय बाद मुक्ति और छुटकारा भी मिल जाता है.
शनि का मुकदमेबाजी और जेल से क्या है संबंध?
शनि, न्याय और कानून का मुख्य ग्रह है. कुंडली में शनि खराब हो तो व्यक्ति मुकदमे में उलझ सकता है. शनि काफी लम्बे समय तक मुकदमेबाजी करवाता रहता है. शनि अगर जेल भेजता है तो व्यक्ति लम्बे समय तक जेल में ही रहता है. ऐसी दशा में कभी-कभी सारी उम्र जेल में ही कट जाती है.