हर ग्रह की अच्छाइयां भी होती हैं और बुराइयां भी. हर ग्रह शरीर के अलग-अलग भागों को प्रभावित भी करता है. यदि वह ग्रह अच्छा है तो वह हिस्सा मजबूत होता है, अन्यथा उस हिस्से में समस्या आ जाती है. शनि शरीर की मजबूती से संबंध रखता है. यह शरीर के स्नायु तंत्र को सीधे तौर से प्रभावित करता है. किसी भी बीमारी को लंबे समय तक चलाने में इसकी बड़ी भूमिका होती है. यदि शनि की कृपा हो जाय तो व्यक्ति आमतौर पर स्वस्थ रहता है और लंबा जीवन जीता है.
शनि की पहली बीमारी है हड्डियों की समस्या
यह बीमारी शनि के अलावा सूर्य से भी संबंध रखती है लेकिन जब शनि यह समस्या देता है तो चलना-फिरना मुश्किल हो जाता है. सर्वाइकल और स्पोन्डिलाइटिस भी शनि ही देता है. शनि के कारण हड्डियों के चटकने की आवाज होती है और कभी कभी बहुत दर्द भी होता है.
उपाय
1. नित्य प्रातः और शाम शनिदेव के तांत्रिक मंत्र का जाप करें.
2. मंत्र होगा ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः.
3. भोजन में तिल के दानों का प्रयोग करें.
4. जल में नीम की पत्तियां डालकर स्नान करें.
5. शनिवार को शनिदेव को तेल अर्पित करें.
6. उसी तेल का प्रयोग दर्द और समस्या वाली जगहों पर करें.
शनि की दूसरी बीमारी है स्नायु तंत्र की समस्या
शनि, शरीर के स्नायु तंत्र से संबंध रखता है. शनि के कारण मष्तिस्क की और चक्कर की समस्या हो जाती है. शनि ही पक्षाघात और पार्किंसन के लिए भी जिम्मेदार होता है. इसके कारण स्नायु तंत्र इतना कमजोर हो जाता है कि हाथ-पैर कांपते हैं.
उपाय
1. नित्य प्रातः सूर्य की ओर पीठ करके बैठें.
2. प्रातः और सायं काल शनि मंत्र का जाप करें.
3. मंत्र होगा ॐ शं क्रूराय नमः.
4. शनिवार को सरसों के तेल में चेहरा देखकर छायादान करें.
5. सलाह लेकर माणिक्य या नीलम धारण करें.
शनि की तीसरी बीमारी है दुर्घटना के कारण अपंगता
शनि का संबंध मंगल या सूर्य से बने तो प्रबल दुर्घटना होती है. इस दुर्घटना में व्यक्ति कई बार किसी अन्य बीमारी का शिकार हो जाता है. कई बार चल फिर नहीं पाता या कोई घाव होकर सड़ जाता है. कभी-कभी शरीर का कोई अंग ही चला जाता है.
उपाय
1. ऐसा योग होने पर सूर्य को जल जरूर दें.
2. शनिवार शाम को प्रकाश का दान करें.
3. दुर्घटना हो जाने पर तुरंत राम रक्षा स्रोत का पाठ करें.
4. बेहतर हो जाने पर नित्य प्रातः हनुमान बाहुक का पाठ करें.
5. शनिवार को पशुओं को रोटी या चारा खिलाएं.
शनि देव की मूर्ति के दर्शन क्यों नहीं करना चाहिए
शनि देव की जिस मूर्ति में आंखें हों, ऐसी मूर्ति के दर्शन नहीं करने चाहिए. शनि देव की दृष्टि विनाशकारी होती है. इसके सामने जाना शुभ नहीं होता. शनि देव के दर्शन वहीं करना चाहिए, जहां शनि देव शिला के रूप में विद्यमान हों. शीघ्र विवाह के लिए नियमित रूप से शनि मंत्र का जप करें. अगर नौकरी से सम्बंधित कोई समस्या चल रही हो तो नित्य प्रातः और सायं शनि मंत्र का जप करें. हर शनिवार को पीपल के नीचे दीपक जलाएं. शनिवार को ही हनुमान जी का दर्शन करें.