सूर्य देव का किसी राशि विशेष पर भ्रमण करना संक्रांति कहलाता है. सूर्य देव हर माह में राशि का परिवर्तन करते हैं, इसलिए कुल मिलाकर वर्ष में 12 संक्रांतियां होती हैं. दो संक्रांतियां सर्वाधिक महत्वपूर्ण होती हैं. पहली मकर संक्रांति और दूसरी कर्क संक्रांति. सूर्य जब मकर राशि में जाते हैं तब मकर संक्रांति होती है. सूर्य जब कर्क राशि में जाते हैं तब कर्क संक्रांति होती है. मकर संक्रांति से अग्नि तत्व की शुरुआत होती है और कर्क संक्रांति से जल तत्व की.
ग्रहों के राजा सूर्य देव 17 सितंबर 2026 को प्रातः कन्या राशि में प्रवेश कर रहे हैं. सूर्य की स्थिति यहां बहुत मजबूत नहीं मानी जाती. सूर्य यहां पर बुध के साथ और मंगल तथा शनि के प्रभाव में हो जाएंगे. सूर्य की यह स्थिति बहुत शुभ नहीं है. इसका प्रभाव लगभग एक माह तक बना रहेगा. अलग-अलग राशियों पर इस परिवर्तन का गहरा असर होगा. सूर्य गोचर के बाद जिन लोगों को किसी तरह की दिक्कत हो, वे रोज सुबह सूर्य देव को अर्घ्य दें. आदित्य हृदय स्रोत, गायत्री मंत्र का पाठ कर सामर्थ्य अनुसार दान करें.
सूर्य के राशि परिवर्तन का प्रभाव अलग-अलग राशियों पर कैसा होगा
सूर्य के राशि परिवर्तन का बाकी राशियों पर प्रभाव