ज्योतिष में केवल ग्रहों की स्थिति ही नहीं, बल्कि हमारे खानपान को भी महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसा भी माना जाता है कि हर खाने की चीज़ का अपना रंग, गुण और प्रकृति होती है, जिसके चलते वह किसी न किसी ग्रह से जुड़ा होता है. अब जिस तरह के भोजन को हम खाते हैं उस खाने से जुड़े ग्रह का सीधा असर हमपर पड़ता है. इसलिए यदि किसी ग्रह को मजबूत करना हो, तो उससे जुड़े खाने की चीज़ का सेवन करना चाहिए.
चावल का संबंध चंद्रमा से माना जाता है. यह शरीर और मन दोनों को शीतल रखता है. यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो, तो चावल का सेवन करने से फायदा मिल सकता है. वो वहीं जिन लोगों को ज्यादा गुस्सा आता है, टेंशन रहती है, उनके लिए भी चावल खाना फायदेमंद माना जाता है. लेकिन अगर कुंडली में चंद्रमा राहु से पीड़ित हो, तो चावल का सेवन सीमित मात्रा में करना बेहतर माना जाता है.
दालों का संबंध मुख्य रूप से बृहस्पति ग्रह से माना जाता है, लेकिन उनके रंग के अनुसार वह अन्य ग्रह से भी जुड़ जाती हैं. पीली अरहर की दाल बृहस्पति, लाल मसूर की दाल मंगल, काली उड़द की दाल शनि और हरी मूंग की दाल बुध ग्रह का प्रतिनिधित्व करती है. यदि किसी विशेष ग्रह को मजबूत करना हो, तो उससे संबंधित दाल का सेवन किया जा सकता है. वहीं, जिन लोगों की कुंडली में शनि कमजोर या अशुभ स्थिति में हो, उन्हें दालों का सेवन सोच-समझकर करने की सलाह दी जाती है.
ज्योतिष के अनुसार गेहूं का संबंध सूर्य ग्रह से होता है. गेहूं से बनी रोटियां और अन्य खाने की चीज़ों से सूर्य मजबूत होता है. जिन लोगों को आत्मविश्वास, शारीरिक शक्ति और समाज में सम्मान की इच्छा हो, उनके लिए गेहूं का नियमित सेवन लाभकारी माना जाता है. माना जाता है कि दोपहर के समय गेहूं की रोटी खाने से इसका अधिक सकारात्मक प्रभाव मिलता है और पारिवारिक संबंध भी बेहतर बने रहते हैं.
रसोई में इस्तेमाल होने वाले मसालों का संबंध भी अलग-अलग ग्रहों से बताया गया है. हल्दी बृहस्पति को मजबूत करती है. जीरा, लौंग, काली मिर्च और बड़ी इलायची शनि से जुड़े माने जाते हैं. लाल मिर्च मंगल, जबकि हरी इलायची और सौंफ बुध ग्रह से संबंधित हैं. वहीं हींग, अजवाइन और जीरे का प्रयोग राहु से जुड़ी परेशानियों को कम करने वाला माना जाता है. हालांकि, यदि किसी की कुंडली में राहु से संबंधित दोष हो, तो अधिक मसालेदार भोजन से बचना उचित माना जाता है.