Palmistry: कब व्यक्ति को मिलता है अपयश, क्यों अच्छे कार्यों का नहीं मिलता है यश? यहां जानें 

मुख्य रूप से यश कीर्ति से संबंध रखते हैं. हस्तरेखा विज्ञान में सूर्य को यश का कारक माना जाता है. सूर्य पर्वत पर पाए जाने वाले शुभ और अशुभ चिह्न व्यक्ति के यश और अपयश को निर्धारित करते हैं. जब व्यक्ति की कुंडली में एक या ज्यादा पंचमहापुरुष योग हों तो अपार नाम-यश और कीर्ति मिलती है.

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gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 28 जून 2026,
  • अपडेटेड 5:37 PM IST

मनुष्य के जीवन में ग्रहों की चाल का बहुत महत्व होता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जीवन में अच्छी या बुरी घटनाओं का जिम्मेदार ग्रहों को माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिर्फ ग्रह ही नह बल्कि मनुष्य के कर्म भी इन अच्छी-बुरी घटनाओं के लिए जिम्मेदार होते हैं. माना जाता है कि व्यक्ति के कर्मों के अनुसार ही उसे फल मिलता है. इतना ही नहीं कर्मों से भाग्य बन सकता है और बिगड़ भी सकता है. ज्योतिष शास्त्र में कई ऐसी चीजें हैं जिनका संबंध भाग्य से होता है. मुख्य रूप से यश कीर्ति से संबंध रखते हैं. बृहस्पति, चन्द्रमा और शुक्र व्यक्ति को अपार प्रसिद्धि दिलाते हैं. शनि, राहु और पापक्रांत चन्द्रमा व्यक्ति के यश को अपयश में बदल देता है. पंडित शैलेंद्र पांडेय ने बताया कि हस्तरेखा विज्ञान में सूर्य को यश का कारक माना जाता है. सूर्य पर्वत पर पाए जाने वाले शुभ और अशुभ चिह्न व्यक्ति के यश और अपयश को निर्धारित करते हैं. 

कब व्यक्ति को मिलता है अपयश 
अगर कुंडली में चतुर्थ भाव या सप्तम भाव पापक्रांत हो तो व्यक्ति को अपयश मिलता है. अगर चंद्रमा या शुक्र पापक्रांत हों तो भी व्यक्ति को बदनामी का सामना करना पड़ता है. शनि, राहु या मंगल जैसे ग्रह नकारात्मक रूप से कुंडली को प्रभावित करें तो भी अपयश के योग बनते हैं. अगर हाथ में सूर्य का वलय हो, सूर्य रेखा कटी हो या वहां तिल हो तो भी व्यक्ति को अपयश मिलता है. अगर चन्द्रमा या शुक्र कमजोर हों अथवा हाथ में सूर्य पर्वत का उभार ठीक न हो तो व्यक्ति को किए गए कार्यों का यश नहीं मिलता. 

कब व्यक्ति को अपार नाम-यश और मिलती है कीर्ति 
जब व्यक्ति की कुंडली में एक या ज्यादा पंचमहापुरुष योग हों.  जब व्यक्ति की कुंडली में चतुर्थ-नवम भाव, चंद्रमा या शुक्र में से कोई एक या दोनों मजबूत हों. अगर कुंडली में बृहस्पति अत्यधिक मजबूत या दिग्बली हो तो भी व्यक्ति को यशस्वी बनाता है. अगर सूर्य पर्वत पर तारा हो या त्रिभुज हो तो व्यक्ति अपार नाम-यश पाता है.

कुंडली में अपयश के योग हों तो क्या करें 
सूर्य देव को नित्य प्रातः लाल पुष्प डालकर जल अर्पित करें. सूर्य भगवान के समक्ष गायत्री मंत्र का 108 बार जाप करें.  शुद्ध ताम्बे का छल्ला रविवार दोपहर को बायें हाथ की अनामिका अंगुली में धारण करें.  परामर्श लेकर ओपल अथवा मोती धारण करें.  नित्य प्रातः माता-पिता का चरण छूकर आशीर्वाद लें.


 

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