Relationship Tips: वैवाहिक जीवन में समस्याओं के लिए कौन ग्रह जिम्मेदार, जानें क्या उपाय करने से दूर होगी परेशानी?

Planets Responsible for Problems in Married Life: वैवाहिक जीवन में समस्याओं के लिए मुख्य रूप से बृहस्पति, शुक्र, मंगल और शनि ग्रह जिम्मेदार होते हैं. महिलाओं के विवाह के लिए कुंडली में बृहस्पति, शुक्र और चंद्रमा को अवश्य देखना चाहिए.

Stress in Married Life (Symbolic Photo)
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 11 जून 2026,
  • अपडेटेड 4:47 PM IST

Married Life Astrology: ज्योतिष शास्त्र (Astrology) के मुताबिक वैवाहिक जीवन में समस्याओं के लिए ग्रह जिम्मेदार होते हैं. कुंडली में यदि ग्रहों की स्थिति सही हो तो कोई समस्या नहीं आती है.  ऐसे में महिला और पुरुष विवाह करने से पहले कुंडली जरूर देखना चाहिए. पंडित शैलेंद्र पांडेय ने बताया कि वैवाहिक जीवन में समस्याओं के लिए मुख्य रूप से बृहस्पति (Jupiter), शुक्र (Venus), मंगल (Mars) और शनि (Saturn) ग्रह जिम्मेदार होते हैं. चंद्रमा का भी असर पड़ता है. किसी भी व्यक्ति के विवाह के लिए सबसे महत्वपूर्ण ग्रह शुक्र होता है लेकिन महिलाओं के लिए बृहस्पति भी उतना ही महत्वपूर्ण है. महिलाओं की कुंडली में विवाह भाव के अलावा अष्टम भाव भी महत्वपूर्ण होता है.  इसके अलावा इनकी कुंडलियों को चंद्रमा से भी जरूर देखना चाहिए.

शुक्र ग्रह वैवाहिक सुख और रोमांस का मुख्य कारक है. इसके कमजोर या पीड़ित होने पर पति-पत्नी के बीच आकर्षण कम होता है और प्रेम की कमी हो जाती है. बृहस्पति को गुरु भी कहते हैं. यह ग्रह दांपत्य जीवन में समझ, ज्ञान और परिवार को जोड़ने वाला है. इस ग्रह के कमजोर होने से रिश्ते में धैर्य और संतुष्टि खत्म हो जाती है. मंगल को ऊर्जा और गुस्से का ग्रह माना जाता है. कुंडली में मंगल का मजबूत होना, यदि दूसरे की कुंडली से न मिले तो बहुत ज्यादा कलह और झगड़े पैदा करता है. शनि, राहु और केतु अलगाव कराने वाले ग्रह हैं. इन ग्रहों का विवाह भाव (सातवें घर) पर प्रभाव होने से तलाक या अलगाव की नौबत आ सकती है.

1. महिलाओं के विवाह में किन ग्रहों को विशेष रूप से देखना चाहिए: महिलाओं के विवाह के लिए बृहस्पति, चंद्रमा और शुक्र को अवश्य देखना चाहिएं. इन तीनों से कुंडली देखकर ही विवाह और वैवाहिक जीवन का निर्णय लेना चाहिए. यदि चन्द्र कुंडली पर प्रभाव ज्यादा है तो विशेष सावधान रहें. चंद्रमा का अस्त होना या केतु के साथ होना भी समस्या का कारण बन जाता है. 

2. महिलाओं के विवाह को बृहस्पति कैसे प्रभावित करता है: बिना बृहस्पति के महिलाओं का न तो विवाह होगा और न ही चलेगा. बृहस्पति कमजोर हो तो विवाह में खूब विलंब होता है. बृहस्पति खराब हो तो विवाह में विलंभ भी होता है. साथ ही वैवाहिक जीवन में कष्ट भोगना पड़ता है. बृहस्पति दूषित हो तो महिलाओं के चरित्र को कमजोर बना देता है. बृहस्पति जरा भी ठीक हो तो विवाह और वैवाहिक जीवन को ठीक रखता है. 

3. महिलाओं के अष्टम भाव का विवाह और वैवाहिक जीवन से क्या है संबंध: महिलाओं का अष्टम भाव मांगल्य भाव है. यह उनके वैवाहिक जीवन की लंबाई बताता है. यह महत्वपूर्ण रूप से पति की आयु पर असर डाल देता है. यदि सूर्य और मंगल अष्टम भाव पर असर डाल दें तो यह खतरे की सूचना देती है. मंगल और शनि का अष्टम भाव पर असर पति की आयु के लिए काफी अशुभ हो सकता है. इस तरह के योग अगर कुंडली में हैं तो विशेष सतर्क हो जाना चाहिए. 

वैवाहिक जीवन में समस्या होने पर करें ये उपाय 
1. एकादशी का व्रत रखें. 
2. गुरुवार के दिन भगवान विष्णु की पूजा करें. 
3. शनिवार के दिन शनि देव की पूजा करें.
4. शनि से जुड़ी चीजों का दान करें.
5. शुक्र को मजबूत बनाने के लिए मां लक्ष्मी की पूजा करें.
6. गलत कार्यों से दूर रहें.
7. धोखा देना और झूठ बोलने की आदत से दूर रहना चाहिए. 
8. घर में सत्यनारायण भगवान की कथा का आयोजन करें. 
9. जरूरतमंद लोगों को दान दें.

 

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