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घर-गृहस्थी से आगे बढ़ीं भैंसकोटी की 7 महिलाएं, 10 लाख की लागत से शुरू की बेकरी, हर महीने 50-60 हजार की हो रही कमाई

भैंसकोटी की ये सात महिलाएं दिव्य ग्राम संगठन से जुड़ी हैं. संगठन के अंतर्गत शिवालय स्वयं सहायता समूह, संतोषी समूह और लक्ष्मी समूह की महिलाओं ने जनवरी 2026 से ग्रामोत्थान परियोजना के सहयोग से बेकरी उद्यम शुरू किया.

Bakery Business
पंकज कुमार
  • टिहरी गढ़वाल,
  • 21 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 5:32 PM IST

टिहरी जिले के थौलधार विकासखंड के भैंसकोटी गांव की सात महिलाओं ने घर और खेती-किसानी तक सीमित रहने के बजाय अब अपना कारोबार खड़ा कर लिया है. राजेश्वरी सकलानी, गीता भट्ट, आशा देवी, रजनी, अनीता, विशिला देवी और शकुंतला देवी मिलकर बेकरी चला रही हैं. कभी घरेलू काम और पशुपालन में व्यस्त रहने वाली ये महिलाएं अब मंडुवा बिस्किट से लेकर ब्रेड, बन और केक तक बना रही हैं. उनके बनाए सामान की आसपास के बाजारों में मांग है. इस छोटे से कारोबार से उन्हें हर महीने करीब 50 से 60 हजार रुपए की आय हो रही है, जिसमें करीब 30 से 40 हजार रुपए तक का शुद्ध लाभ बताया गया है.

स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं, फिर शुरू किया बेकरी का काम
भैंसकोटी की ये महिलाएं दिव्य ग्राम संगठन से जुड़ी हैं. संगठन के तहत शिवालय स्वयं सहायता समूह, संतोषी समूह और लक्ष्मी समूह की महिलाओं ने जनवरी 2026 में ग्रामोत्थान परियोजना के सहयोग से बेकरी का काम शुरू किया. उद्यम सर्वेक्षण के दौरान दिव्य ग्राम संगठन का चयन किया गया था. परियोजना टीम के भौतिक सत्यापन के बाद संगठन को 6 लाख रुपए की परियोजना सहायता मिली. इसके अलावा 3 लाख रुपए का बैंक ऋण और 1 लाख रुपए महिलाओं का अपना अंशदान था. इस तरह कुल 10 लाख रुपए की लागत से बेकरी यूनिट शुरू की गई.

मंडुवा से मशरूम तक के बिस्किट बना रहीं
राजेश्वरी सकलानी बताती हैं कि परियोजना से सहायता मिलने के बाद बेकरी के लिए मशीनें और जरूरी सामान खरीदा गया. इसके बाद महिलाओं ने स्थानीय लोगों की पसंद और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर अलग-अलग उत्पाद बनाना शुरू किया. बेकरी में मंडुवा बिस्किट, आटा बिस्किट, मशरूम बिस्किट, फैन, बन, ब्रेड और केक तैयार किए जा रहे हैं. इनकी बिक्री थौलधार, कमांद, कांडीखाल और टिहरी के अलग-अलग बाजारों में की जा रही है.

कमाई के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ा
महिलाओं का कहना है कि पहले उनका ज्यादातर समय घर के काम, खेती और पशुपालन में ही निकलता था. ग्रामोत्थान परियोजना से मिले सहयोग ने उन्हें अपने हुनर को कारोबार में बदलने का मौका दिया. अब वे खुद बेकरी संभालती हैं, बाजार की जरूरत समझती हैं और उसी के अनुसार सामान तैयार करती हैं. हर महीने होने वाली कमाई से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है. साथ ही महिलाओं में अपने दम पर कुछ करने का भरोसा भी बढ़ा है. अब उनका लक्ष्य इस कारोबार को और आगे ले जाना और आसपास की दूसरी महिलाओं को भी इससे जोड़ना है.

दूसरी महिलाओं को भी आगे आने की अपील
जिला ग्रामीण विकास अभिकरण की प्रभारी परियोजना निदेशक ज्योति ने बताया कि भैंसकोटी का दिव्य ग्राम संगठन बेकरी से जुड़े उत्पाद तैयार कर रहा है. इससे जुड़ी महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर फायदा हुआ है. उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. आसपास की महिलाओं को भैंसकोटी की इन महिलाओं से प्रेरणा लेकर ऐसी योजनाओं से जुड़ना चाहिए. इससे वे खुद आर्थिक रूप से मजबूत बन सकती हैं और दूसरी महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ सकती हैं.

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