Tax Saving Tips: नए वित्त वर्ष (New Financial Year) 1 अप्रैल 2026 से शुरू हो गया है. इसी तारीख से नया आयकर नियम 2026 (Income-Tax Rules 2026) भी लागू हो गए हैं. नए वित्त वर्ष के शुरुआत के साथ ही नौकरी-पेशा लोगों के सामने एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा है कि इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) यानी आईटीआर (ITR) भरने के लिए ओल्ड टैक्स रिजीम चुने या न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) का चुनाव करें. नौकरी करने वाले लोगों को अक्सर लगता है कि न्यू टैक्स रिजीम का चुनाव करने का मतलब है टैक्स बचाने के सभी रास्ते बंद. जॉब करने वालों अधिकांश लोगों को लगता है कि न्यू टैक्स रिजीम में 80C जैसे पुराने डिडक्शन खत्म होने के बाद उनकी गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा इनकम टैक्स के रूप में चुकाना पड़ेगा लेकिन ऐसा सोचने वाले गलत हैं. हकीकत यह है कि आप अपने सैलरी स्ट्रक्चर को थोड़ी स्मार्टनेस के साथ डिजाइन करवाएं तो न्यू टैक्स रिजीम में भी आपकी टैक्सेबल इनकम भारी-भरकम होने की जगह शून्य तक आ सकती है. न्यू टैक्स रिजीम में निवेश नहीं बल्कि सैलरी स्ट्रक्चर असली गेम चेंजर है.
आज हम बता रहे हैं कि कैसे नौकरी करने वालों को 20 लाख रुपए की सालाना कमाई पर भी एक रुपया टैक्स नहीं देना पड़ेगा? आपको मालूम हो कि न्यू टैक्स रिजीम 12 लाख रुपए तक की सालाना आय पर कोई टैक्स नहीं देना होता है. न्यू टैक्स रिजीम में नौकरी करने वालों को 75000 रुपए की स्टेंर्डड डिडक्शन भी मिलता है लेकिन आप स्मार्ट सैलरी स्ट्रक्चर, स्टैंडर्ड डिडक्शन, पीएफ और एनपीएस योगदान, मील बेनिफिट, कार लीज और कुछ एक्सेम्प्शन के जरिए 20 लाख रुपए की सालाना इनकम पर भी टैक्स बचा सकते हैं.
...तो टैक्स के बोझ को कर देंगे काफी हल्का
आपको मालूम हो कि ओल्ड टैक्स रिजीम में जहां 80C जैसी धाराओं के तहत निवेश करके टैक्स बचाया जाता है तो वहीं न्यू टैक्स रिजीम आपकी सैलरी स्ट्रक्चर पर ज्यादा निर्भर है. न्यू टैक्स रिजीम में टैक्स छूट पाने के लिए यह जरूरी है कि आपका CTC कैसे डिजाइन किया गया है न कि आप बाद में कितना निवेश करते हैं. यदि आप नौकरी करते हैं और आपका सालाना पैकेज 20 लाख रुपए है. इस स्थिति में यदि आपकी बेसिक सैलरी CTC का 50 प्रतिशत यानी 10 लाख रुपए तय की जाती है तो आप अपने पैकेज में कई टैक्स-एफिशिएंट कंपोनेंट को जोड़वा सकते हैं, जो आपके टैक्स के बोझ को काफी हल्का कर देंगे.
छोटी-छोटी छूटों को मिलाकर टैक्स फ्री हो जाएगी इनकम
आप न्यू टैक्स रिजीम में मिलने वाली छोटी-छोटी छूटों को मिलाकर एक बड़ा बेस तैयार कर सकते हैं और अपनी 20 लाख रुपए की इनकम को टैक्स फ्री बना सकते हैं. आइए सबसे पहले मील बेनिफिट को देखते हैं. नए आयकर नियम में कर्मचारियों को हर मील यानी भोजन पर करमुक्त सीमा 50 रुपए से बढ़ा कर 200 रुपए कर दी गई है. इसके आप ऐसे समझ सकते हैं यदि आपको प्रति मील 200 रुपए, दिन में दो बार और महीने के 22 वर्किंग डे (कार्य दिवस) के हिसाब से मिलते हैं तो साल में करीब 1.05 लाख रुपए टैक्स-फ्री हो जाएंगे.
अब एम्प्लॉयर द्वारा ईपीएफ (EPF) में किए गए योगदान को देखते हैं. EPF बेसिक सैलरी का 12 प्रतिशत होता है. इससे 1.2 लाख रुपए की अतिरिक्त टैक्स छूट मिल जाती है. इसके अलावा सेक्शन 80CCD(2) के तहत NPS में एम्प्लॉयर यानी कंपनी का योगदान करीब 1.4 लाख रुपए की अतिरिक्त छूट देता है. यह बेसिक का 14 प्रतिशत तक हो सकता है. आपको मालूम हो कि अलग-अलग यह राशि छोटी लगती है लेकिन इन्हें एक साथ जोड़ दिया जाए तो यह टैक्स को बचाने का मजबूत आधार तैयार करती हैं.
कार लीज से सबसे अधिक लाभ
यदि आप अधिक टैक्स बचाना चाह रहे हैं तो इसमें कार लीज आपकी बहुत सहायता कर सकता है. दरअसल, कोई कर्मचारी 8 लाख रुपए मूल्य की कार को 2 साल के लिए लीज पर लेता है, तो ब्याज सहित उसकी सालाना लागत करीब 4.23 लाख रुपए होती है. यह खर्च जब सैलरी स्ट्रक्चर के माध्यम से दिखाया जाता है तो इसे टैक्स-एफिशिएंट पर्क्विजिट माना जाता है. सिर्फ कार लीज से कुल डिडक्शन काफी बढ़ जाते हैं. कार लीज को जोड़ने पर कुल डिडक्शन सीधे 7.88 लाख रुपए तक पहुंच जाता है. कार लीज के बिना यह सिर्फ 3.65 लाख रुपए रहता है. यदि आपके पास अपनी कार है तो भी आप सही तरीके से लॉगबुक मेंटेन करके फ्यूल और ड्राइवर के खर्चों पर टैक्स छूट का कानूनी दावा कर सकते हैं.
20 लाख रुपए पर टैक्स शून्य कैसे
टैक्स फाइलिंग प्लेटफॉर्म क्लियरटैक्स के मुताबिक ऊपर बताई गई सभी कटौतियों को आपकी सीटीसी से घटाया जाता है. ऐसा करने पर आपकी नेट सैलरी घटकर 12.11 लाख रुपए रह जाती है. इसके बाद 75000 रुपए का स्टैंडर्ड डिडक्शन लागू होता है. इससे टैक्सेबल इनकम 11.36 लाख रुपए रह जाती है. इस स्तर पर नए टैक्स रिजीम में मिलने वाली छूट के कारण टैक्स देनदारी शून्य हो जाती है. यदि आप कार लीज का विकल्प छोड़ देते हैं तो टैक्सेबल इनकम 15.59 लाख रुपए हो जाएगी. ऐसे में आपको 1.18 लाख रुपए का भारी टैक्स भरना पड़ेगा.
सैलरी को ऐसे बनाएं टैक्स फ्री
1. सालाना सैलरी: 2000000 रुपए
2. बेसिक सैलरी (CTC का 50%): 1000000 रुपए
3. घटाएं: मील एग्जेंप्शन (200 रुपए प्रति मील x 22 वर्किंग दिन x 2 मील प्रतिदिन x 12 महीने): 105600 रुपए
4. घटाएं: पीएफ में एम्प्लॉयर के योगदान पर छूट (बेसिक सैलरी का 12%): 120000 रुपए
5. घटाएं: कार लीज पर छूट (8 लाख रुपए की कार 2 साल के लिए लीज पर): 423000 रुपए
6. घटाएं: एनपीएस में एम्प्लॉयर का योगदान: 140000 रुपए
7. नेट सैलरी: 1211400 रुपए
8. स्टैंडर्ड डिडक्शन: 75000 रुपए
9. टैक्सेबल इनकम (कर योग्य आय): 1136400 रुपए
10. कुल टैक्स देनदारी: 0