Blinkit नहीं करेगा 10 मिनट में डिलीवरी, जेप्टो, स्विगी-जोमैटो भी टाइम लिमिट हटाएंगे

Blinkit अपने सभी विज्ञापनों, प्रमोशनल कैंपेन और सोशल मीडिया पोस्ट से '10 मिनट डिलीवरी' जैसे शब्द हटाएगा. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि ग्राहकों को सामान देर से मिलेगा.

Blinkit to drop 10-minute-delivery
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 13 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:03 PM IST
  • क्विक कॉमर्स मॉडल पर उठ रहे थे सवाल
  • Blinkit नहीं करेगा 10 मिनट में डिलीवरी

क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म Blinkit अब 10 मिनट में डिलीवरी नहीं करेगा. केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया के हस्तक्षेप और डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा को लेकर जताई गई चिंता के बाद कंपनी ने यह कदम उठाया है.

डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा को लेकर सरकार सख्त
सरकार का मानना है कि तय समय सीमा में डिलीवरी का वादा डिलीवरी पार्टनर्स पर दबाव डालता है, जिससे हादसों का खतरा बढ़ सकता है. सरकार के साथ हुई बैठक में स्विगी, जोमैटो और जेप्टो ने भी भरोसा दिया है कि वे अब ग्राहकों से समय सीमा का वादा करने वाले विज्ञापन नहीं करेंगे.

Blinkit क्या बदलने जा रहा है?
Blinkit अपने सभी विज्ञापनों, प्रमोशनल कैंपेन और सोशल मीडिया पोस्ट से '10 मिनट डिलीवरी' जैसे शब्द हटाएगा. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि ग्राहकों को सामान देर से मिलेगा. कंपनी का फोकस अब पब्लिक प्लेटफॉर्म पर तय समय की गारंटी देने के बजाय सिस्टम और सुविधा को हाईलाइट करने पर होगा.

डिलीवरी होगी, लेकिन बिना टाइम प्रेशर के
कंपनियां अब डिलीवरी की स्पीड को अपनी अंदरूनी ऑपरेशनल क्षमता तक सीमित रखेंगी, लेकिन खुले तौर पर ऐसा कोई दावा नहीं करेंगी जो डिलीवरी पार्टनर को जल्दी करने के लिए मजबूर करे. इस मुद्दे पर केंद्रीय श्रम मंत्री ने Blinkit, Zepto, Swiggy और Zomato जैसी बड़ी कंपनियों के अधिकारियों से बैठक की. बैठक में साफ कहा गया कि ब्रांडिंग और मार्केटिंग में फिक्स डिलीवरी टाइम का प्रचार बंद किया जाए.

डिलीवरी वर्कर्स की हड़ताल बनी वजह
यह फैसला ऐसे समय आया है जब 25 और 31 दिसंबर को देशभर में गिग वर्कर्स ने हड़ताल का आह्वान किया था. डिलीवरी पार्टनर्स का आरोप था कि कंपनियां बेहद कम समय में डिलीवरी का दबाव बनाती हैं, कमाई घटा रही हैं और सोशल सिक्योरिटी भी नहीं देतीं.

पहले कंपनियों ने किया था बचाव
इससे पहले Zomato के CEO दीपिंदर गोयल जैसे बड़े फाउंडर्स फास्ट डिलीवरी मॉडल का बचाव कर चुके हैं. उनका कहना था कि डिलीवरी स्टोर की नजदीकी और टेक्नोलॉजी की वजह से तेज होती है, न कि डिलीवरी पार्टनर्स पर दबाव डालकर. श्रम मंत्री ने बैठक में स्पष्ट किया कि कंपनियों का बिजनेस मॉडल वर्कर्स की जान जोखिम में डालकर नहीं चलना चाहिए.

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