Budget Income and Expense: बजट के लिए कहां से आता है पैसा, कहां खर्च करती है सरकार, हर एक रुपए का जान लीजिए हिसाब-किताब

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को संसद में बजट पेश करने के लिए तैयार हैं. आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि आखिर सरकार कहां से बजट के लिए पैसा लाती है और इन पैसों को कहां खर्च करती है? हम आपको यहां बता रहे हैं आपके इन सवालों का जवाब. 

Budget Income and Expense
मिथिलेश कुमार सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 31 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:47 AM IST

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी 2026 को लोकसभा में देश का आम बजट (Budget) पेश करेंगी. अक्सर लोगों को मन में सवाल उठता है कि आखिर हर साल सरकार बजट के लिए इतना पैसा कहां से लाती है और इन पैसों को कहां-कहां खर्च करती है? आपको मन में भी ऐसे सवाल उठ रहे हैं तो इस खबर को जरूर पढ़ लीजिए.

सरकार के पास एक-एक पाई का होता है हिसाब 
आपको मालूम हो कि सरकार किसी कंपनी की तरह मुनाफा नहीं कमाती है बल्कि वह पैसे को जुटाती है. सरकार पहले अपने खर्च का अनुमान लगाती है. इसके बाद उस हिसाब से पैसे जुटाती है. सरकार के पास एक-एक पाई का हिसाब होता है. सरकार के पास आने वाला हर 1 रुपया कई अलग-अलग सोर्स से आता है. 

सरकार के पास कहां से आता है कितना पैसा
अधिकांश लोग सोचते हैं कि सरकार के पास सबसे अधिक पैसा टैक्स से आता है, जबकि ऐसा नहीं है. सरकार के पास सबसे अधिक पैसा उधारी और अन्य प्राप्तियों से आता है. यदि सरकार के पास कुल 1 रुपया आता है तो उसमें से 24 पैसे उधार और अन्य प्राप्तियों से आते हैं. इसका मतलब है कि सरकार अपने खर्च को पूरा करने के लिए बाजार से उधारी भी लेती है. सरकार के पास उधारी और अन्य प्राप्तियों के अलावा सबसे अधिक पैसा इनकम टैक्स यानी आयकर से आता है. सरकार के पास आयकर से 22 पैसा आता है. गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) और दूसरे टैक्स से सरकार के पास 18 पैसा आता है. कॉरपोरेट टैक्स से 17 पैसा आता है. इसके अलावा उत्पाद शुल्क से 5 पैसे, सीमा शुल्क यानी कस्टम ड्यूटी से 4 पैसे और नॉन टैक्स रेवेन्यू से 9 पैसे सरकार के पास आते हैं. 

सरकार के पास आने वाला 1 रुपए का हिसाब
1. उधार व अन्य देनदारियां: 24 पैसे
2. इनकम टैक्स: 22 पैसे
3. GST व अन्य अप्रत्यक्ष कर: 18 पैसे
4. कॉर्पोरेट टैक्स: 17 पैसे
5. नॉन-टैक्स रेवेन्यू (डिविडेंड, ब्याज, फीस आदि): 9 पैसे
6. उत्पाद शुल्क: 5 पैसे
7. सीमा शुल्क: 4 पैसे
8. पूंजीगत प्राप्तियां: 1 पैसा 
9. कुल: 1 रुपए

पिछले साल किस मद से कितने करोड़ मिलने की थी उम्मीद
सरकार को पिछले साल ग्रॉस टैक्स रेवेन्यू (CGST, IGST, UTGST) से कुल 4270233 करोड़ रुपए मिलने उम्मीद थी. कॉर्पोरेशन टैक्स से 1082000 करोड़ रुपए और आयकर से 1438000 करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद थी.

कमाई के स्रोत
1. ग्रॉस टैक्स रेवेन्यू :  4270233 करोड़ रुपए.
2. कॉर्पोरेट टैक्स: 1082000 करोड़ रुपए.
3. आयकर: 1438000 करोड़ रुपए.
4. नॉन-टैक्स रेवेन्यू: डिविडेंड, ब्याज, फीस आदि शामिल.

सरकार कहां-कहां और कितने पैसे करती है खर्च 
आपको मालूम हो कि सरकार विभिन्न सोर्स से जुटाए गए पैसों को अपनी तिजोरी में नहीं रखती है बल्कि वह इन रुपए को राज्यों, आम जनता की योजनाओं, सुरक्षा और देश की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में खर्च कर देती है. केंद्र सरकार का सबसे बड़ा खर्च राज्यों को टैक्स में हिस्सा देने में होता है. यदि केंद्र सरकार पूरे साल में 1 रुपए खर्च करती है तो उसमें वह सबसे बड़ा हिस्सा यानी 22 पैसे राज्यों को टैक्स और ड्यूटी देने पर खर्च करती है. इसके बाद कर्ज का ब्याज देने में सरकार का पैसा खर्च होता है. हर 1 रुपए में से 20 पैसे सिर्फ कर्ज के ब्याज चुकाने में खर्च हो जाते हैं.  

सरकारी खर्च का हिसाब (हर एक रुपया कहां जाता है)
1.
राज्यों को टैक्स व ड्यूटी में हिस्सा: 22 पैसे
2. ब्याज भुगतान: 20 पैसे
3. केंद्र सरकार की योजनाएं: 16 पैसे
4. केंद्र प्रायोजित योजनाएं, जिन्हें केंद्र और राज्य मिलकर चलाते हैं: 8 पैसे
5. रक्षा: 8 पैसे
9. राज्यों को अन्य हस्तांतरण: 8 पैसे
10. पेंशन: 4 पैसे
11. सब्सिडी: 6 पैसे
12. अन्य व्यय: 8 पैसे 

सरकार कहां से जुटाती है कर्ज
केंद्र सरकार कर्ज का ब्याज चुकाने में 20 प्रतिशत पैसा खर्च कर देती है. सरकार मौटे तौर पर चार माध्यों से कर्ज जुटाती है. देश के भीतर से यानी बीमा कंपनियों, रिजर्व बैंक व अन्य दूसरे बैंकों से सरकार कर्ज लेती है. विदेश से जो सरकार कर्ज लेती है उसमें मित्र देश, इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड, वर्ल्ड बैंक और अन्य अंतरराष्ट्रीय बैंक शामिल है. सरकार बाजार से भी कर्ज लेती है. सरकार ट्रेजरी बिल, बॉन्ड, स्मॉल सेविंग स्कीम आदि को जारी करती है, जिन्हें लोग और कंपनियां खरीदती हैं. समय-समय पर सरकार इसका ब्याज लोगों और कंपनियों को देती है. इसके अलावा सरकार अपनी संपत्ति, गोल्ड आदि को गिरवी रखकर भी कर्ज लेती है.

 

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