Budget 2026 से आम आदमी को बड़ी आस! वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को संसद में पेश करेंगी बजट, जानें क्या सस्ता और क्या हो सकता है महंगा?

Expectations of Relief from Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को देश का बजट ससंद में पेश करेंगी. बजट के बाद कई सामान सस्ते हो जाएंगे तो कुछ सामान के रेट में बढ़ोतरी की भी संभावना है. इससे आम आदमी की जेब पर असर पड़ेगा. लोगों को वित्त मंत्री से राहत की उम्मीदें हैं.

Expectations of Relief from Budget 2026
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 24 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:23 PM IST

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी 2026 दिन रविवार को देश का बजट (Budget) ससंद में पेश करेंगी. वित्त मंत्री के रूप में निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार बजट पेश करेंगी. उन्होंने पहला बजट 5 जुलाई 2019 को पेश किया था. यह बजट आम आदमी, टैक्सपेयर्स, किसानों और सीनियर सिटीजन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. पिछले बजट में टैक्स स्लैब में बदलाव और इनकम टैक्स में राहत के बाद इस बार भी टैक्सपेयर्स को बड़ी उम्मीदें हैं. आपको मालूम हो को बजट के ऐलानों का असर देश की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जिंदगी पर गहरा प्रभाव डाल सकता है. बजट के बाद कई सामान सस्ते हो जाएंगे तो कुछ सामान के रेट में बढ़ोतरी की भी संभावना है.

टैक्स राहत की उम्मीद
सरकार ने पिछले बजट में सेक्शन 87A के तहत 12 लाख रुपए तक की इनकम पर पूरा टैक्स माफ कर दिया था. इससे आम आदमी को बड़ी राहत मिली थी. इस बार संभावना है कि टैक्स फ्री इनकम लिमिट को और बढ़ाया जा सकता है. मिडिल क्लास को उम्मीद है कि यह सीमा बढ़ाकर 15 लाख रुपए तक की जा सकती है.टैक्सपेयर्स चाहते हैं कि टैक्स फ्री इनकम की लिमिट और बढ़े और 30 फीसदी टैक्स वाला स्लैब 30 लाख रुपये सालाना तक किया जाए. टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि ऐसा होता है तो आम नौकरीपेशा लोगों को सीधा फायदा मिलेगा. मंथली सैलरी हाथ में ज्यादा बचेगी और खर्च करने की ताकत भी बढ़ेगी. इतना ही नहीं न्यू टैक्स रिजीम को अपनाने वालों की संख्या और बढ़ेगी. जानकारों का कहना है कि रेवेन्यू पर और दबाव से बचने के लिए मोदी सरकार बड़े पैमाने पर टैक्स में राहत देने के बजाय छोटे-मोटे बदलावों का विकल्प चुन सकती है जैसे कि मामूली स्लैब में बदलाव, रिबेट में सुधार या सीमित छूट.

स्टैंडर्ड डिडक्शन में हो सकती है बढ़ोतरी
सैलरीड क्लास के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन में बढ़ोतरी की मांग लंबे समय से की जा रही है. यदि ऐसा होता है तो मिडिल क्लास के हाथ में ज्यादा पैसा बचेगा. पिछले बजट में न्यू टैक्स रिजीम के तहत इसे बढ़ाकर 75 हजार रुपए किया गया था. अब महंगाई और बढ़ते खर्च को देखते हुए उम्मीद है कि बजट 2026 में स्टैंडर्ड डिडक्शन को 1 लाख रुपए तक किया जा सकता है. यदि ऐसा होता है तो बिना किसी निवेश के ही टैक्स बोझ कम हो जाएगा और टेक होम सैलरी बढ़ेगी.

बजट से सीनियर सिटीजन को भी राहत की उम्मीद
सीनियर सिटीजन भी बजट 2026 से बड़ी राहत की उम्मीद कर रहे हैं. सीनियर सिटीजन की मांग है कि टैक्स फ्री इनकम की सीमा बढ़ाई जाए. इतना ही नहीं हेल्थ इंश्योरेंस पर ज्यादा छूट मिले और बैंक एफडी और स्मॉल सेविंग स्कीम पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स में राहत दी जाए. पेंशन और ब्याज आय वालों के लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरना और आसान किया जाए ताकि उन्हें बार-बार नोटिस का सामना न करना पड़े.

महिलाएं और आम टैक्सपेयर्स लगाएं हैं आस 
बजट 2026 से महिला टैक्सपेयर्स और आम करदाता भी काफी आस लगाए हुए हैं. महिलाएं चाहती हैं कि बजट 2026 में उनके लिए कुछ खास छूट या फायदा दिया जाए, जिससे नौकरी और सेविंग दोनों को बढ़ावा मिले. आम करदाताओं की मांग है कि सरचार्ज और सेस का बोझ कम किया जाए. टैक्स राहत के साथ GST नियमों को और सरल बनाया जा सकता है. 

LTCG टैक्स में राहत की उम्मीद
वैसे लोग शेयर और म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं, उनके लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स बड़ा मुद्दा बना हुआ है. बजट 2026 में निवेशकों को उम्मीद है कि LTCG टैक्स में कुछ राहत दी जाएगी ताकि टैक्स कटने के बाद रिटर्न बेहतर हो सके. यदि सरकार टैक्स में राहत देती है तो छोटे निवेशकों का भरोसा बाजार में और मजबूत हो सकता है.

इंफ्रास्ट्रक्चर और सोशल खर्च पर फोकस
सरकार इस बार बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर और सोशल खर्च पर फोकस कर सकती है. सड़कें, रेलवे, शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर, पानी की सप्लाई, हेल्थकेयर और शिक्षा बजट बढ़ने की संभावना है. स्वास्थ्य और शिक्षा में निवेश से आम आदमी की जिंदगी पर सकारात्मक असर पड़ सकता है. इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से कंस्ट्रक्शन और सर्विस सेक्टर को भी फायदा मिलेगा. इसका अप्रत्यक्ष लाभ मिडिल क्लास परिवारों तक पहुंचेगा. जीवन की गुणवत्ता में काफी सुधार हो सकता है. 

एमएसएमई और रोजगार
एमएसएमई (MSMES) और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए सरकार स्किल डेवलपमेंट और डिजिटल स्किल्स पर जोर दे सकती है. छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए आसान क्रेडिट पॉलिसीज से रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं. स्टार्टअप्स को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है. बजट में MSME सेक्टर को सस्ता कर्ज और आसान नियम मिल सकते हैं. उद्योग संगठनों का कहना है कि रेगुलेटरी बोझ कम करने से रोजगार के नए अवसर बनेंगे. 

महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों पर असर
कम टैक्स कलेक्शन और ज्यादा खर्च की जरूरतों के साथ, सरकार रेवेन्यू के दूसरे विकल्पों पर विचार कर सकती है. इसमें सब्सिडी में बदलाव या इनडायरेक्ट टैक्स शामिल हो सकते हैं, जिससे जरूरी चीजों की कीमतों पर असर पड़ सकता है. सब्सिडी में कटौती होने पर पेट्रोल, डीजल और खाद के दाम बढ़ सकते हैं. लग्जरी गुड्स और इंपोर्टेड आइटम्स महंगे हो सकते हैं. देश में बने सामान सस्ते हो सकते हैं. इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक प्रोडक्ट्स सस्ते हो सकते हैं.

 

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