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Budget Halwa Ceremony: अनोखी परंपरा! भारत में बजट से पहले हलवा सेरेमनी... कनाडा में वित्त मंत्री के नए जूतों से तय होता है देश का Budget

Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को संसद में बजट पेश करेंगी. बजट पेश होने से पहले भारत में जैसे हलवा सेरेमनी मनाई जाती है, वैसे ही कनाडा में बजट शूज की रस्म निभाई जाती है. हलवा सेरेमनी के मौके पर वित्त मंत्री जहां अधिकारियों और कर्मचारियों को हलवा खिलाते हैं, वहीं कनाडा में बजट शूज की रस्म के दौरान वहां के वित्त मंत्री नए जूते खरीदते हैं. आइए बजट से पूर्व निभाई जाने वाली इन दोनों परंपराओं के बारे में जानते हैं.

Halwa Ceremony (File Photo) Halwa Ceremony (File Photo)

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी 2026 को संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट (Union Budget) पेश करेंगी. यह निर्मला सीतारमण का लगातार नौवां बजट होगा. इस बजट पर आम हों या खास सभी की निगाहें टिकी हुई हैं. लोग जानना चाह रहे हैं कि आखिर इस बार बजट में किस चीज का दम घटेगा और किसका बढ़ेगा. बजट पेश होने से पहले एक परंपरा निभाई जाती है, जिसे हलवा सेरेमनी (Halwa Ceremony) कहते हैं. भारत में जैसे हलवा सेरेमनी मनाई जाती है, वैसे ही कनाडा में बजट शूज की रस्म निभाई जाती है. हलवा सेरेमनी के मौके पर वित्त मंत्री जहां अधिकारियों और कर्मचारियों को हलवा खिलाते हैं, वहीं कनाडा में बजट शूज की रस्म के दौरान वहां के वित्त मंत्री नए जूते खरीदते हैं. कनाडा में वित्त मंत्री के नए जूतों से देश का बजट तय होता है. ब्रिटेन में बजट दिवस (Budget Day) की परंपरा है. आइए बजट से पूर्व निभाई जाने वाली इन परंपराओं के बारे में जानते हैं.

क्यों मनाई जाती है हलवा सेरेमनी
हमारे देश में किसी भी शुभ काम की शुरुआत करने से पहले मुंह मीठा करने की परंपरा है. उसी तरह बजट को अंतिम रूप देने और उसकी छपाई शुरू होने से ठीक पहले वित्त मंत्री हलवा सेरेमनी की रस्म अदा करते हैं. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित वित्त मंत्रालय के मुख्यालय (नॉर्थ ब्लॉक, दिल्ली) में एक बड़ी कड़ाही में हलवा बनाया जाता है. इसके बाद हलवा सेरेमनी के लिए नॉर्थ ब्लॉक बेसमेंट में मंच तैयार किया जाता है. वित्त मंत्री खुद इस हलवे को मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों को खाने के लिए परोसते हैं. आजादी के बाद से ही हलवा सेरेमनी की परंपरा निभाई जा रही है. 

घर जाने तक की नहीं होती इजाजत 
हलवा सेरेमनी का आयोजन बजट के लॉक-इन (Lock-in) प्रक्रिया की शुरुआत माना जाता है. इसी हलवा सेरेमनी के बाद बजट बनाने और इसकी छपाई से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों का लॉक इन पीरियड शुरू होता है. अधिकारी और कर्मचारी नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में स्थित प्रिंटिंग प्रेस में एक तरह से 10 दिनों के लिए कैद हो जाते हैं. उन्हें न तो अपने घर जाने की परमीशन होती है और न ही मोबाइल पर किसी से बात करने की इजाजत होती है. लोकसभा में जब तक बजट पेश नहीं हो जाता, तब तक इन अधिकारियों और कर्मचारियों को नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट से बाहर निकलने की इजाजत नहीं होती है. 

एक बार लॉक इन पीरियड शुरू होने के बाद कोई भी बाहरी व्यक्ति वित्त मंत्रालय में प्रवेश नहीं कर सकता. मोबाइल नेटवर्क काम नहीं करता. इंटरनेट के इस्तेमाल पर पाबंदी रहती है. बेसमेंट में सिर्फ एक लैंडलाइन फोन होता है, जिस पर केवल इनकमिंग कॉल आ सकती है. IB के अधिकारी 24 घंटे पहरा देते हैं ताकि बजट की कोई भी जानकारी लीक न हो सके. बजट बनाने और इसकी छपाई से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के खाने और सोने का इंतजाम भी उसी बेसमेंट के अंदर किया जाता है. यदि किसी कर्मचारी की तबीयत खराब होती है तो उन्हें अस्पताल नहीं ले जाया जाता है बल्कि डॉक्टर को वहीं बुलाया जाता है. आपको मालूम हो कि 1950 तक बजट की छपाई राष्ट्रपति भवन में होती थी, लेकिन 1950 में बजट का कुछ हिस्सा लीक हो गया था, इसके बाद छपाई नई दिल्ली के मिंटो रोड स्थित प्रेस में होने लगी और फिर 1980 से नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में बनी प्रिटिंग प्रेस में इसकी छपाई होने लगी.

क्यों कनाडा में निभाई जाती है बजट शूज की रस्म 
कनाडा में देश का बजट पेश करने वाले दिन वहां के लोगों की निगाहें वित्त मंत्री के पैरों पर टिकी होती हैं. दरअसल, कनाडा के वित्त मंत्री हर साल बजट भाषण देने से ठीक पहले या एक-दो दिन पहले नए जूते खरीदते हैं. वित्त मंत्री किसी दुकान पर जाते हैं और मीडिया के कैमरों की मौजूदगी में अपने लिए जूते खरीदते हैं.  बजट शूज (Budget Shoes) की यह परंपरा कनाडा में एक तरह से अलिखित नियम बन चुका है कि बजट वाले दिन वित्त मंत्री संसद में नए जूते पहनकर ही बजट पेश करेंगे. वित्त मंत्री इन नए जूतों को पहनकर मीडिया के सामने फोटो भी खिंचवाते हैं. कनाडा की राजनीति में वित्त मंत्री द्वारा नए जूते पहनने को सिर्फ फैशन नहीं, बल्कि सरकार की आर्थिक सोच का प्रतीक भी माना जाता है. 

कनाडा में बजट शूज की परंपरा कब शुरू हुई थी इसको लेकर तो एक राय नहीं है लेकिन अधिकांश लोग मानते हैं कि साल 1954 में तत्कालीन वित्त मंत्री वॉल्टर हैरिस ने इस परंपरा को शुरू किया था. उस समय मीडिया ने उनके नए जूतों को लेकर काफी चर्चा की थी, जिसके बाद आने वाले वित्त मंत्रियों ने इसे एक गुड लक के तौर पर अपना लिया. मिचेल शार्प ने साल 1966 में इसे एक आधिकारिक परंपरा का रूप दे दिया. कनाडा में वित्त मंत्री किस तरह के जूते चुनते हैं, उससे बजट के मिजाज का अंदाजा लगाया जाता है. यदि जूते महंगे और लेदर के हैं तो ऐसा माना जाता है कि बजट व्यापार जगत के अनुकूल होगा. यदि वित्त मंत्री ने साधारण और सस्ते जूते पहनते हैं तो यह आम लोगों के पास संदेश जाता है कि सरकार खर्चों में कटौती करने वाली है. बजट किफायती और बचत वाला होने वाला है. कई बार वित्त मंत्रियों ने बच्चों के जूतों के साथ फोटो खिंचवाकर यह संकेत दिया है कि बजट परिवारों और अगली पीढ़ी पर केंद्रित है. कई बार वित्त मंत्रियों ने पुराने वर्क बूट्स पहनकर यह संदेश दिया है कि सरकार बुनियादी ढांचे और मजदूरों पर ध्यान दे रही है. मेड इन कनाडा के जूते पहनकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने का संदेश दिया जाता है.

ब्रिटेन में Budget Day
आपको मालूम हो कि ब्रिटेन (UK) में बजट पेश करने से पहले बजट दिवस (Budget Day) की तैयारी की परंपरा निभाई जाती है. यहां बजट पेश करने से पहले वित्त मंत्री और अधिकारी लंदन के बाहर एक सप्ताहांत बैठक करते हैं. यह परंपरा रॉबर्ट वालपोल ने शुरू की थी, और अब यह बजट तैयारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.