सुहाग की निशानी मानी जाने वाली रंग-बिरंगी कांच की चूड़ियां बनाने वाला फिरोजाबाद इन दिनों भीषण गर्मी की आग में तप रहा है. शहर का तापमान वैसे ही 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच चुका है, लेकिन चूड़ी कारखानों में काम करने वाले मजदूरों को इससे कई गुना ज्यादा गर्मी झेलनी पड़ रही है. वजह है 1200 डिग्री तापमान पर जलती भट्टियां, जिनमें कांच पानी की तरह पिघलता है और फिर कारीगर अपने हाथों से खूबसूरत चूड़ियां तैयार करते हैं.
भीषण गर्मी और प्राकृतिक गैस की कमी ने अब इस विश्व प्रसिद्ध उद्योग की रफ्तार धीमी कर दी है. कारोबारियों के मुताबिक उत्पादन में 30 से 40 प्रतिशत तक गिरावट आ चुकी है.
भट्टी के सामने बैठकर बनती हैं चूड़ियां
फिरोजाबाद की खास बात यह है कि यहां चूड़ियां किसी मशीन या मोल्ड से नहीं बनतीं. कारीगर तपती भट्टियों के सामने बैठकर हाथों से कांच को आकार देते हैं. भट्टी का तापमान करीब 1200 डिग्री तक रहता है, तभी कांच पिघलकर चूड़ी बनाने लायक बनता है. गर्मी इतनी ज्यादा है कि कई मजदूर काम करते समय अपने ऊपर बार-बार पानी डालते रहते हैं, ताकि शरीर का तापमान संतुलित रहे.
गर्मी हमारी आदत बन गई है
चूड़ी कारीगर मोहसिन कहते हैं, 'गर्मी बहुत पड़ रही है, लेकिन काम तो करना ही है. थोड़ा ज्यादा मुश्किल जरूर हो जाता है.' वहीं आजम नाम के कारीगर का कहना है कि अब उन्हें इस गर्मी की आदत हो चुकी है. वे रोज 8 घंटे काम करते हैं और 1000 से 1500 रुपए तक कमा लेते हैं.
कारीगर अलीम बताते हैं, 'बच्चों का पेट पालना है इसलिए काम करना मजबूरी है. चोरी-डकैती तो कर नहीं सकते. गर्मी लगती है तो शरीर पर पानी डाल लेते हैं.'
गैस संकट ने और बढ़ाई परेशानी
फिरोजाबाद ताज ट्रेपेजियम जोन (TTZ) में आता है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक यहां कोयला, डीजल और लकड़ी जैसे ईंधन इस्तेमाल नहीं किए जा सकते. ऐसे में पूरा कांच उद्योग प्राकृतिक गैस पर निर्भर है. लेकिन इस समय गैस की कमी और बढ़ती कीमतों ने उद्योग की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.
कारखाना मालिक संजय जैन के मुताबिक सिर्फ पॉट फर्नेस से ही रोज करीब 30 करोड़ रुपए का कच्चा उत्पादन होता है. फिनिशिंग के बाद इसकी कीमत और बढ़ जाती है. उन्होंने बताया कि गर्मी और गैस संकट के कारण उत्पादन में 25 से 30 प्रतिशत तक नुकसान हो रहा है. गैस महंगी हो गई है और बाजार में मांग भी पहले जैसी नहीं रही.
मजदूरों के लिए किए जा रहे इंतजाम भी कम पड़ रहे
कारखाना प्रबंधन मजदूरों के लिए कूलर, पंखे, नींबू पानी और ग्लूकोज जैसी सुविधाएं दे रहा है, लेकिन भीषण गर्मी के आगे ये इंतजाम भी कमजोर पड़ते नजर आ रहे हैं.
कारखाने के मैनेजर शोएब अहमद बताते हैं कि कई मजदूरों को चक्कर आने और तबीयत खराब होने जैसी समस्याएं हो रही हैं. जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत डॉक्टर के पास भेजा जाता है.
लाखों परिवारों की रोजी-रोटी पर असर
फिरोजाबाद में 100 से ज्यादा कांच और चूड़ी कारखाने हैं. करीब 4 लाख मजदूर सीधे या परोक्ष रूप से इस उद्योग से जुड़े हुए हैं. ऐसे में उत्पादन घटने का असर हजारों परिवारों की कमाई पर पड़ रहा है.
रिपोर्ट: सुधीर शर्मा
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