देश के बड़े शहरों के रेजिडेंशियल रियल एस्टेट मार्केट में तेजी की रफ्तार अब थमती दिख रही है. Liases Foras Research के मुताबिक जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही में देश के 8 बड़े शहरों में कुल 1,22,854 घर बिके. पिछली तिमाही में 1,21,658 घरों की बिक्री हुई थी यानी बिक्री में सिर्फ 1% की बढ़ोतरी हुई. दूसरी तरफ इसी दौरान डेवलपर्स ने 1,13,391 नए घर लॉन्च किए, जो पिछली तिमाही के 1,05,362 यूनिट के मुकाबले 7.6% ज्यादा है यानी बाजार में नई सप्लाई की रफ्तार बिक्री से काफी तेज रही. इसका सीधा असर बिना बिके घरों के स्टॉक पर पड़ रहा है. सितंबर 2026 के आखिर तक टॉप-8 शहरों में अनसोल्ड इन्वेंट्री बढ़कर 8,65,584 यूनिट हो गई, जो जून 2026 में 8,42,799 यूनिट थी यानी सिर्फ एक तिमाही में स्टॉक 2.7% बढ़ गया.
21 महीने की बिक्री के बराबर स्टॉक
रियल एस्टेट मार्केट की मौजूदा स्थिति को समझने के लिए इन्वेंट्री का आंकड़ा सबसे अहम है. Liases Foras के मुताबिक मौजूदा बिक्री की रफ्तार पर टॉप-8 शहरों में मौजूद अनसोल्ड स्टॉक करीब 21 महीने की बिक्री के बराबर है. मतलब अगर नए घरों की सप्लाई पूरी तरह रुक जाए और बिक्री मौजूदा रफ्तार से ही चलती रहे, तब भी मौजूदा स्टॉक को खत्म होने में करीब 21 महीने लग सकते हैं. हालांकि सभी शहरों की स्थिति एक जैसी नहीं है. NCR में करीब 11 महीने का इन्वेंट्री ओवरहैंग है जबकि अहमदाबाद में ये करीब 29 महीने, चेन्नई में करीब 26 महीने और हैदराबाद में करीब 23 महीने है यानी कुछ शहरों में बिक्री के मुकाबले स्टॉक का दबाव काफी ज्यादा है.
कीमतों में भी आई गिरावट
रियल एस्टेट मार्केट में सिर्फ बिक्री की रफ्तार ही धीमी नहीं हुई है, औसत कीमतों में भी हल्की गिरावट आई है. Liases Foras के मुताबिक टॉप-8 शहरों में अपार्टमेंट की वेटेड एवरेज कारपेट प्राइस जून 2026 के 16,254 रुपये प्रति वर्ग फीट से घटकर सितंबर में 16,184 रुपये प्रति वर्ग फीट रह गई यानी तिमाही आधार पर कीमतों में 0.4% की गिरावट आई है. हालांकि सात शहरों में कीमतें बढ़ी हैं. कोलकाता में कीमतों में सबसे ज्यादा 5.6% की बढ़ोतरी हुई. चेन्नई में 4.5%, पुणे में 1.8% और अहमदाबाद में 1.2% की बढ़ोतरी हुई. इसके उलट NCR में औसत कीमत 5.9% घटकर 22,115 रुपये प्रति वर्ग फीट रह गई. रिपोर्ट के मुताबिक कम कीमत वाले नए लॉन्च की वजह से NCR के औसत रेट में ये गिरावट आई.
NCR में बिक्री घटी, कीमत भी नीचे
दिल्ली-NCR के लिए आंकड़े खास तौर पर ध्यान खींचते हैं. जुलाई-सितंबर में NCR में 15,457 घर बिके, जो पिछली तिमाही के 15,839 यूनिट के मुकाबले 2.4% कम है. वहीं नई लॉन्चिंग 6.7% बढ़कर 14,188 यूनिट हो गई यानी NCR में बिक्री घटने के बावजूद नई सप्लाई बढ़ी है. हालांकि NCR में अनसोल्ड इन्वेंट्री करीब स्थिर रही. जून में 58,402 यूनिट के मुकाबले सितंबर में ये 58,407 यूनिट रही. NCR में औसत कारपेट प्राइस भी 23,510 रुपये प्रति वर्ग फीट से घटकर 22,115 रुपये प्रति वर्ग फीट रह गया है.
मुंबई में लॉन्चिंग बढ़ी, बिक्री लगभग स्थिर
MMR यानी मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में भी डिमांड की रफ्तार बहुत मजबूत नहीं रही. यहां जुलाई-सितंबर में 34,552 घर बिके, जो पिछली तिमाही के 34,592 यूनिट के मुकाबले 0.1% कम है. इसके मुकाबले नई लॉन्चिंग 18.7% बढ़कर 30,262 यूनिट हो गई यानी MMR में भी नई सप्लाई की रफ्तार बिक्री से काफी तेज रही. हालांकि यहां अनसोल्ड इन्वेंट्री सिर्फ 0.4% बढ़ी और सितंबर में 2,60,629 यूनिट रही. MMR में औसत कारपेट प्राइस 1.3% बढ़कर 25,199 रुपये प्रति वर्ग फीट हो गया जो टॉप-8 शहरों में सबसे ज्यादा है.
पुणे-हैदराबाद में इन्वेंट्री का दबाव बढ़ा
पुणे में घरों की बिक्री 2.8% बढ़कर 16,057 यूनिट रही. लेकिन यहां नई लॉन्चिंग 12.8% बढ़कर 18,235 यूनिट हो गई यानी पुणे में जितने घर बिके, उससे काफी ज्यादा नए घर बाजार में आए. इसका असर अनसोल्ड स्टॉक पर भी पड़ा और इन्वेंट्री 6.1% बढ़कर 1,16,872 यूनिट हो गई. हैदराबाद में बिक्री 2.5% बढ़कर 14,903 यूनिट हुई, जबकि नई लॉन्चिंग 0.6% घटकर 16,165 यूनिट रही. इसके बावजूद यहां अनसोल्ड इन्वेंट्री 8.6% बढ़कर 1,14,261 यूनिट हो गई. ये टॉप-8 शहरों में इन्वेंट्री बढ़ने की सबसे तेज रफ्तार है.
कोलकाता में लॉन्चिंग 25% से ज्यादा बढ़ी
कोलकाता में बिक्री लगभग स्थिर रही. जुलाई-सितंबर में 5,054 घर बिके, जो 0.5% की बढ़ोतरी है. लेकिन नई लॉन्चिंग 25.6% बढ़कर 4,125 यूनिट हो गई. ये टॉप-8 शहरों में नई सप्लाई की सबसे तेज बढ़ोतरी है. फिर भी कोलकाता में अनसोल्ड इन्वेंट्री 2.3% घटकर 33,671 यूनिट रह गई यानी ये इकलौता शहर रहा जहां बिना बिके घरों का स्टॉक कम हुआ.
क्या रियल एस्टेट में मंदी की शुरुआत हो गई?
Liases Foras के आंकड़े सीधे तौर पर रियल एस्टेट मार्केट में मंदी घोषित नहीं करते, लेकिन सुस्ती के संकेत जरूर दिखाते हैं. बिक्री सिर्फ 1% बढ़ी है, जबकि नई सप्लाई 7.6% बढ़ी. इसके चलते अनसोल्ड इन्वेंट्री 2.7% बढ़कर 8.66 लाख यूनिट हो गई. वहीं औसत कीमतों में 0.4% की गिरावट आई है. रिपोर्ट के मुताबिक फेस्टिव सीजन ये तय करने में अहम होगा कि बिक्री नई सप्लाई के साथ कदम मिला पाती है या नहीं. खासकर पुणे और हैदराबाद जैसे शहरों में इन्वेंट्री बढ़ रही है, इसलिए आने वाले महीनों में डिमांड की रफ्तार पर नजर रहेगी.
Liases Foras के मैनेजिंग डायरेक्टर पंकज कपूर के मुताबिक नए लॉन्च लगातार बढ़ रहे हैं और फेस्टिव सीजन के करीब आने के साथ लॉन्चिंग एक्टिविटी और मजबूत हो सकती है. इससे रेजिडेंशियल बिक्री को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है, लेकिन वेस्ट एशिया संकट और इक्विटी मार्केट में करेक्शन सेंटीमेंट पर असर डाल सकते हैं, खासकर लग्जरी और अल्ट्रा-लग्जरी सेगमेंट में, जहां खरीदारी वेल्थ इफेक्ट और मार्केट कॉन्फिडेंस के प्रति ज्यादा संवेदनशील है.
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