भारत में करोड़ों लोग रोज UPI ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं. चाय की दुकान से लेकर बड़े शोरूम तक, लोग कुछ ही सेकंड में मोबाइल से पेमेंट कर देते हैं. सबसे अच्छी बात यह है कि आम UPI पेमेंट करने पर यूजर से कोई फीस नहीं ली जाती. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल आता है कि जब यूपीआई ऐप हमसे पैसा नहीं लेतीं, तो आखिर इनकी कमाई कैसे होती है? चलिए आपको इसका जवाब देते हैं.
जब आप यूपीआई ऐप से मोबाइल रिचार्ज करते हैं या बिजली, गैस, पानी और डीटीएच का बिल भरते हैं, तब इन कंपनियों को दूसरी कंपनी से कमीशन मिलता है. आपको जितना बिल दिखता है, पैसे भी कटते उतने ही हैं, लेकिन उस ट्रांजैक्शन के बदले दूसरी कंपनी यूपीआई ऐप को एक तय कमीशन देती है. साथ ही कुछ ऐप कुछ सर्विस के लिए प्लेटफॉर्म फीस भी लेती हैं.
अगर कई दुकानों पर पेमेंट के बाद बोलने वाला साउंडबॉक्स देखा है, तो वह भी इन कंपनियों की कमाई काॉ जरिया है. Paytm और PhonePe जैसी कंपनियां दुकानदारों को यह डिवाइस देती हैं और इसके बदले हर महीने किराया या सब्सक्रिप्शन फीस लेती हैं.
आज के यूपीआई ऐप सिर्फ पेमेंट तक सीमित नहीं. इन ऐप्स पर आपको पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड, इंश्योरेंस और म्यूचुअल फंड जैसी कई सेवाएं भी मिलती हैं. जब कोई यूजर इन ऐप्स के जरिए लोन लेता है, इंश्योरेंस खरीदता है या निवेश करता है, तो बैंक, एनबीएफसी और इंश्योरेंस कंपनियां यूपीआई ऐप को कमीशन देती हैं.
इन ऐप्स पर अक्सर अलग-अलग ब्रांड के ऑफर, कैशबैक, कूपन और शॉपिंग वाउचर देखने को मिलते हैं. ये ऑफर दिखाने के लिए कंपनियां ऐड देनी वाली कंपनी से भी पैसा लेती हैं. इसके अलावा, यूजर की खरीदारी की आदतों और खर्च करने के तरीके को एनालाइज करके उन्हें उनकी जरूरत के हिसाब से ऑफर और सेवाएं दिखाई जाती हैं.
यूपीआई पेमेंट के जरिए कंपनियां करोड़ों लोगों को अपने प्लेटफॉर्म पर लाती हैं. इसके बाद रिचार्ज, बिल पेमेंट, साउंडबॉक्स, ऐड, लोन, इंश्योरेंस और निवेश जैसी सेवाओं के जरिए कमाई की जाती है. यही कारण है कि भले ही आम ट्रांजैक्शन आपके लिए मुफ्त हो, लेकिन इन ऐप्स का बिजनेस लगातार बढ़ता जा रहा है और वे कई अलग-अलग तरीकों से अच्छा मुनाफा कमा रही हैं.