अगर आपके साथ ऐसा होता कि खाते में सैलरी आते ही गायब हो जाती है... तो टेंशन न लें. ऐसा सिर्फ आप अकेले के साथ नहीं होता, बल्कि कई लोगों के साथ ऐसा होता है. घर का किराया, EMI, राशन, पेट्रोल और बाहर खाने का खर्च मिलकर पूरे बजट का बेड़ागर्क कर देते हैं. जिसके बाद महीने के आखिर में क्रेडिट कार्ड या उधार का सहारा लेना पड़ता है.
लेकिन अगर थोड़ी स्मार्ट प्लानिंग की जाए तो इस परेशानी को कम किया जा सकता है. सैलरी को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर अगर खर्च करते हैं, तो हर हिस्से के लिए एक बजट तय हो जाता है और आप सेविंग भी कर सकते हैं. लेकिन आखिर किस तरह से करें प्लानिंग?
अक्सर लोग पहले खर्च करते हैं और आखिर में जो पैसा बचता है, उसे सेव करते हैं. यही आदत बजट बिगाड़ देती है. बेहतर तरीका है कि सैलरी आते ही सेविंग और निवेश के लिए पैसा अलग कर दें. कम से कम सैलरी का 20% हिस्सा आप सेविंग और निवेश के लिए रखें.
घर का किराया या होम लोन की किस्त भी हर महीने जाती है. कोशिश करें कि आपकी ईएमआई या किराया सैलरी का 30 से 35% के बीच हो. अगर घर का खर्च इससे बहुत ज्यादा है, तो दूसरे जरूरी कामों के लिए पैसों की कमी पड़ सकती है. अघर कम किराए में घर न मिले तो शेयरिंग में आप किसी के साथ रह सकते हैं.
खाने पर सैलरी का करीब 10 से 15% हिस्सा खर्च करना चाहिए. रोज बाहर खाना, ऑनलाइन फूड ऑर्डर करना और छोटी-छोटी खरीदारी महीने का खर्च बढ़ा देती है. साथ ही घर का खाना खाने से आपका काफी पैसा बच सकता है.
हर महीने कुछ पैसा अलग से सेव करते रहें. यह पैसा किसी अचानक आने वाले खर्च के काम आ सकता है, जिसे आपने प्लान नहीं किया. कोशिश करें कि आप करीब 3 से 6 महीने के खर्च जितनी रकम जमा कर लें. ऐसा करने पर यह पैसा नौकरी जाने, बीमारी या किसी जरूरी काम के समय काम आ सकता है.
एक आम इंसान शॉपिंग, फिल्म, घूमना और गैजेट जैसी चीजों पर भी पैसा खर्च करता ही है. ऐसे में जरूरत नहीं कि आप बचत के लिए शौक को मार दें. लेकिन अपने शौक के लिए आप एक सीमा को जरूर बना कर रखें.