आज के दौर में हेल्थ सेक्टर को सबसे स्थिर और सुरक्षित बिजनेस सेक्टर माना जाता है. यह कोई ऐसा बिजनेस सेक्टर भी नहीं जो मौसम के साथ बदलता हो. यह पूरा साल चलता है. साथ ही अगर मेडिकल स्टोर किसी हॉस्पिटल के पास है तो और भी बल्ले-बल्ले. यह बिजनेस आईडिया खासतौर पर उन लोगों के लिए यह एक बेहतरीन विकल्प है, जो सीमित जगह और कंट्रोल्ड निवेश के साथ अपना खुद का बिजनेस शुरू करना चाहते हैं.
हालांकि, यह समझना बेहद जरूरी है कि मेडिकल स्टोर सिर्फ कमाई का साधन नहीं, बल्कि बड़ी जिम्मेदारी भी है. दवाओं से जुड़ी छोटी सी लापरवाही भी लोगों की सेहत पर सीधा असर डाल सकती है. इसलिए इस कारोबार में कदम रखने से पहले नियमों और लाइसेंस प्रक्रिया को ठीक से जानना बेहद जरूरी है.
किस मॉडल का मेडिकल स्टोर खोलना है?
मेडिकल स्टोर शुरू करने से पहले यह तय करना जरूरी होता है कि आप किस मॉडल पर काम करना चाहते हैं. किसी अस्पताल के अंदर मेडिकल स्टोर खोलना चाहते हैं. तो बता दें कि यह मरीजों की तुरंत जरूरतों को ध्यान में रखकर खोला जाता है. इसमें स्टॉक हमेशा होना चाहिए. साथ ही 24 घंटे खुला रहे.
रिहायशी इलाके में मेडिकल स्टोर खोलना चाहते हैं, तो यहां स्टॉक थोड़ा कम चल सकता है. लेकिन आम बीमारी जैसे बुखार, खांसी-जुकाम के लिए दवाइयां हमेशा रखना बेहतर होगा. यहां वर्क्स भी ज्यादा नहीं चाहिए होंगे. साथ ही निवेश भी कम होगा.
चेन फार्मेसी या फ्रेंचाइजी स्टोर जिसे आमतौर पर मॉल और कमर्शियल एरिया में देखते है, यह काफी तेज़ी से उभर रहा और इसका ट्रेंड भी काफी है. लेकिन निवेश ज्यादा. आपको किसी भी स्टोर की फ्रैंचाइजी लेने के लिए पैसे देने होंगे. साथ ही स्पेस और वर्क्स की सैलरी भी.
किसी अस्पताल के आसपास मेडिकल स्टोर होना एक अच्छा ऑप्शन है. बेशक यहां वर्क्स कम रखने पड़े. लेकिन यहां बिक्री रोज होगी. साथ ही 24 घंटे खोले रखने की भी जरूरत नहीं. हां, इस बात का ध्यान रखें कि अगर जनरल अस्पताल है तो सभी दवाई रखें और अगर कोई स्पेशल है तो उसी से जुड़ी दवाई को प्राथमिकता दें.
मेडिकल स्टोर रजिस्ट्रेशन और बिजनेस स्ट्रक्चर
मेडिकल स्टोर का रजिस्ट्रेशन भारतीय फार्मेसी अधिनियम, 1948 के तहत किया जाता है. इसके लिए राज्य सरकार के संबंधित विभाग में आवेदन करना होता है. साथ ही यह भी तय करना जरूरी होता है कि आपका बिजनेस किस फॉर्म में चलेगा. छोटे मेडिकल स्टोर आमतौर पर ओनरशिप या पार्टनरशिप में खोले जाते हैं. बड़े अस्पताल या चेन फार्मेसी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी मॉडल अपनाते हैं. इसके अलावा दुकान और प्रतिष्ठान पंजीकरण भी जरूरी होता है, जो आगे कई लाइसेंस के लिए बेस डॉक्यूमेंट का काम करता है.
टैक्स और ड्रग लाइसेंस से जुड़े जरूरी नियम
मेडिकल स्टोर चलाने के लिए टैक्स नियमों की जानकारी होना भी जरूरी है. अगर सालाना टर्नओवर तय सीमा से ज्यादा होता है, तो GST रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य हो जाता है. लेकिन सबसे अहम लाइसेंस होता है ड्रग लाइसेंस. इसके बिना मेडिकल स्टोर चलाना कानूनी रूप से संभव नहीं है.