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Luna Story: चल मेरी लूना! 50 किलो की साइकिल, जिसने बदल दी मिडिल क्लास परिवार की जिंदगी, कैसे देश की पहली मोपेड बन गई महिलाओं की पहली पसंद

Kinetic Group ने साल 1972 में लूना को लॉन्च किया था. लॉन्च होते ही लूना मार्केट में छा गई. 'चल मेरी लूना' टैगलाइन हर शख्स की जुबां पर चढ़ गया था. विज्ञापनों में स्मिता पाटिल और शबाना आजमी जैसी फिल्मी हस्तियों के आने से लूना की लोकप्रियता में खूब इजाफा हुआ.

काइनेटिक ग्रुप ने साल 1972 में लूना को लॉन्च किया था (Photo/Flickr)
शशिकांत सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 31 मई 2023,
  • अपडेटेड 8:28 AM IST

चल मेरी लूना... सफलता की सवारी लूना.. लूना करती पक्का वादा, खर्च कम, मजबूती ज्यादा... टैगलाइन जैसे विज्ञापन भले ही टीव स्क्रीन से गायब हो गए हैं. लेकिन हमारी यादों पर आज भी जिंदा हैं. 80 के दशक में लूना मिडिल क्लास की पहचान थी. लूना महिलाओं में खूब पॉपुलर थी. इसके पीछे देश की पहली मोपेड की बनावट थी. चलिए आपको करीब दो दशक तक सड़कों पर शान की सवारी कही जाने वाली लूना की पूरी कहानी बताते हैं.

1972 में हुई थी लॉन्चिंग-
काइनेटिक ग्रुप ने साल 1972 में लूना लॉन्च किया. देश की पहली स्वदेशी मोपेड में 50 सीसी का इंजन होता था. लूना साइकिल के डिजाइन पर आधारित थी. लेकिन इसमें मोटर का इस्तेमाल किया गया था. इसका वजन 50 किलोग्राम था. उस वक्त ये मिडिल क्लास परिवारों की शान होती थी.

लूना की लॉन्चिंग के पीछे की कहानी-
70 के दशक में देश में सामाजिक परिवर्तन हो रहे थे. शहरों का विकास हो रहा था. लोगों का साइकिल से चलना मुश्किल हो रहा था. काइनेटिक ग्रुप ने आम जनता की नब्ज को पकड़ लिया और कम कीमत में एक गाड़ी लॉन्च करने का प्लान बनाया. कंपनी ने इस गाड़ी को इलीट क्लास के लिए नहीं, बल्कि आम लोगों के लिए मार्केट में लॉन्च करना चाहती थी. इसको देखते हुए लूना को लॉन्च किया गया.

विज्ञापन ने लूना को घर-घर पहुंचाया-
लूना लॉन्च हो चुकी थी. लेकिन अपने सोच के मुताबिक हर मिडिल क्लास परिवार तक इसको पहुंचाने के लिए कंपनी ने विज्ञापन का सहारा लिया. लूना के विज्ञापन खूब पॉपुलर हुए. 'चल मेरी लूना...' टैगलाइन पीयूष पांडेय के दिमाग की उपज थी. उनका ये पहला पेशेवर असाइनमेंट था. पीयूष पांडेय के इस विज्ञापन ने लूना की मार्केट में वैल्यू बढ़ा दी. हर परिवार की जुबां पर लूना आ गया. इसके साथ ही एक्ट्रेस शबाना आजमी और स्मिता पाटिल जैसे सितारे भी विज्ञापन में दिखाई देने लगे.

महिलाओं में पॉपुलर हुई लूना-
लूना महिलाओं को खूब पसंद आई. इसकी वजह इसका डिजाइन भी था. महिलाओं के लिए ये सुविधाजनक था. दरअसल उस दौर में महिलाओं के लिए मैक्सी ड्रेस, चूड़ीदार और साड़ी फैशन था. इन कपड़ों में लूना चलाने में कोई दिक्कत नहीं आती थी. इसलिए लूना महिलाओं में खूब पॉपुलर हुई.
1990 के अंत तक लूना लोगों के बीच हिट रहा. लेकिन जैसे-जैसे प्रतिस्पर्धा बढ़ती गई, इसकी डिमांड कम होती गई. होंडा, सुजुकी और हीरो होंडा के मार्केट में आने का असर लूना पर पड़ा. लूना की लोकप्रियता कम होने लगी और 28 साल के प्रोडक्शन के बाद साल 2000 में लूना का उत्पादन बंद कर दिया गया. इसलिए तरह से किसी जमाने में लोगों की जुबां पर रहने वाला लूना शब्द गायब हो गया. हालांकि एक बार फिर काइनेटिक ग्रुप लूना को इलेक्ट्रिक अवतार में लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है.

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