बुंदेलखंड के किसान बनेंगे मालामाल, 1.28 करोड़ की नर्सरी से बदल रही किसानों की किस्मत

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देशों पर उद्यान विभाग ने महोबा के जैतपुर कृषि विज्ञान केंद्र में एक 'हाईटेक नर्सरी' की स्थापना की है. करीब सवा करोड़ रुपये की लागत से दो एकड़ में फैली इस नर्सरी में तकनीक और प्रकृति का बेजोड़ संगम दिखता है.

Mahoba High Tech Nursery
gnttv.com
  • महोबा,
  • 17 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:11 PM IST
  • बुआई से लेकर सिंचाई तक का काम ऑटोमैटिक मशीनों से
  • किसानों ने चुनौती को अवसर में बदला

यूपी के महोबा जिले में किसानों की आय दोगुनी करने के लिए योगी सरकार की हाईटेक नर्सरी योजना गेम-चेंजर साबित हो रही है. यहां तैयार उन्नत पौधों से न केवल बुंदेलखंड बल्कि पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के किसान भी अपनी तकदीर बदल रहे हैं. बुंदेलखंड के महोबा में अब परंपरागत खेती की जगह आधुनिक बागवानी किसानों की पहली पसंद बन रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर जैतपुर कृषि विज्ञान केंद्र में 1.28 करोड़ की लागत से बनी हाईटेक नर्सरी किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है.

किसानों ने चुनौती को अवसर में बदला
यहां तैयार सब्जियों की उन्नत पौध लेने के लिए उत्तर प्रदेश के साथ-साथ मध्य प्रदेश से भी बड़ी संख्या में किसान पहुंच रहे हैं. बुंदेलखंड की पथरीली धरती और अनिश्चित मौसम के कारण अक्सर किसानों को प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है. लेकिन अब महोबा के किसानों ने इस चुनौती को अवसर में बदल दिया है.

बुआई से लेकर सिंचाई तक का काम ऑटोमैटिक मशीनों से
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देशों पर उद्यान विभाग ने महोबा के जैतपुर कृषि विज्ञान केंद्र में एक 'हाईटेक नर्सरी' की स्थापना की है. करीब सवा करोड़ रुपये की लागत से दो एकड़ में फैली इस नर्सरी में तकनीक और प्रकृति का बेजोड़ संगम दिखता है. यहां बीजों की बुआई से लेकर सिंचाई तक का सारा काम ऑटोमैटिक मशीनों द्वारा किया जाता है. नर्सरी के भीतर तापमान को नियंत्रित करने के लिए आधुनिक पंखे और एग्जॉस्ट सिस्टम लगाए गए हैं, ताकि पौधों को हर मौसम में अनुकूल वातावरण मिल सके. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब किसानों को सर्दी के मौसम वाली सब्जियों की पौध गर्मी में भी आसानी से मिल जाती है.

यहां तैयार होती है ऑर्गेनिक सब्जियां
कंधीलाल नाम के किसान ने बताया, यहां तैयार किए जा रहे आलू, तुरई, लौकी, खीरा और बैंगन के पौधे सामान्य पौधों के मुकाबले काफी हष्ट-पुष्ट और रोगमुक्त होते हैं. यही कारण है कि महोबा के अलावा झांसी, बांदा और हमीरपुर के किसान दलहनी फसलों के पारंपरिक चक्र को छोड़कर अब सब्जी उत्पादन की ओर मुड़ रहे हैं. इस बदलाव की धमक सीमावर्ती राज्य मध्य प्रदेश तक भी पहुंच गई है. छतरपुर और लवकुशनगर जैसे इलाकों से किसान भारी तादाद में यहां से पौध ले जा रहे हैं ताकि वे कम समय में ज्यादा मुनाफा कमा सकें.

किसानों को बिचौलियों से बचाना है उद्देश्य
उद्यान विभाग के अधिकारी सुरेश कुमार का मानना है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों को बिचौलियों से बचाना और उन्हें सीधे उन्नत तकनीक उपलब्ध कराना है. हाईटेक नर्सरी से मिलने वाले मजबूत पौधों के कारण फसल बर्बाद होने का खतरा कम हो गया है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति में तेजी से सुधार हो रहा है. महोबा की यह नर्सरी आज पूरे बुंदेलखंड के लिए आधुनिक कृषि का एक नया मॉडल बनकर उभरी है.

-नाहिद अंसारी की रिपोर्ट

 

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