New Income Tax Rule 2026: टैक्सपेयर्स ध्यान दें! ITR-1 से ITR-7 तक नाम वही... लेकिन नियम नए... अभी से शुरू कर दें रिटर्न भरने की तैयारी

ITR Forms: टैक्सपेयर्स ध्यान दें 1 अप्रैल 2026 से नया इनकम टैक्स एक्ट लागू होने जा रहा है, जो 64 साल पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 की जगह लेगा. नए कानून के आने से इनकम टैक्स रिटर्न भरना ज्यादा सरल और समझने योग्य होगा. आइए जानते हैं नया इनकम टैक्स एक्ट से आईटीआर फॉर्म में क्या-क्या होगा बदलाव और किस पर पड़ेगा ज्यादा प्रभाव?

New Income Tax Rule
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 14 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:23 AM IST
  • सरकार 1 अप्रैल 2026 से नए इनकम टैक्स कानून को करेगी लागू
  • टैक्सपेयर्स को अपडेटेड ITR फॉर्म्स में ही रिटर्न करनी होगी फाइल

टैक्सपेयर्स आपको मालूम हो कि 1 अप्रैल 2026 से नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 लागू होने जा रहा है, जो 64 साल पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 (Income Tax Act, 1961) की जगह लेगा. केंद्र सरकार ने ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स और नए इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म (ITR Form) को सार्वजनिक किया है. करदाताओं, सीए और विशेषज्ञों से इन पर 22 फरवरी 2026 तक सुझाव मांगे हैं. सुझाव मांगने का मकसद यह है कि नए नियम को लागू होने से पहले सिस्टम को 'क्रैश-प्रूफ' किया जा सके. ऐसे में अभी आपके पास बोलने का मौका है, बाद में बहाने नहीं चलेंगे. आइए जानते हैं नया इनकम टैक्स एक्ट से आईटीआर फॉर्म में क्या-क्या होगा बदलाव और किस पर पड़ेगा ज्यादा प्रभाव?

ITR-1 से ITR-7 तक के फॉर्म रहेंगे जारी
केंद्र सरकार ने साफ किया है कि नए इनकम टैक्स एक्ट में भी ITR-1 से ITR-7 तक के फॉर्म जारी रहेंगे. कैटेगरी यानी श्रेणी भी लगभग पहले जैसी ही होंगी. सैलरी पाने वाले हों या बिजनेस करने वाले, कंपनियां, फर्म हों या ट्रस्ट सभी अलग-अलग आईटीआर फॉर्म ही भरेंगे. हालांकि, नियम पहले जैसे नहीं रहेंगे. नए कानून के तहत कई पुराने और गैर-जरूरी शब्द हटाए जाएंगे, ताकि टैक्स रिटर्न भरना ज्यादा सरल और समझने योग्य बन सके. सरकार ने आईटीआर फॉर्म के नाम इसलिए नहीं बदले हैं ताकि लोग कन्फ्यूज न हों, लेकिन हर फॉर्म को ज्यादा टाइट, ज्यादा क्लियर और कम एक्सेप्शन-फ्रेंडली बनाया जा रहा है.

ITR-1: आईटीआर-1 फॉर्म को सहज भी कहा जाता है. यह फॉर्म सैलरी पाने वालों, एक घर और ब्याज जैसी इनकम वालों के लिए ही रहेगा लेकिन ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक अब ई-फाइलिंग डिफॉल्ट विकल्प होगी. सिर्फ 80 साल या उससे अधिक उम्र के बुजुर्ग ही कागजी फॉर्म भर सकेंगे. इसके अलावा अन्य सभी करदाताओं के लिए डिजिटल सिग्नेचर या EVC के जरिए ऑनलाइन रिटर्न फाइल करना होगा.

ITR-2: आईटीआर-2 फॉर्म उन लोगों के लिए और HUF के लिए है जिनकी बिजनेस इनकम नहीं है. इसे नए नियमों में आईटीआर 1 का वैकल्पिक फॉर्म बताया गया है. आपको मालूम हो कि नए नियम में  कैपिटल गेन और विदेशी संपत्ति से जुड़े नियम सख्त हुए हैं. ऐसे में आईटीआर-2 फॉर्म में अधिक जानकारी देनी पड़ सकती है. विदेशी इनकम या एसेट रखने वालों के लिए डिस्क्लोजर अब और विस्तार से करना होगा. इस तरह से नए नियम के आने से खुलासों का दायरा बढ़ेगा. 

ITR-3: आईटीआर-3 फॉर्म बिजनेस या प्रोफेशन से कमाई करने वालों के लिए जारी रहेगा. ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स के मुताबिक यदि कोई करदाता प्रिजम्पटिव टैक्सेशन से बाहर आता है, तो उसे आईटीआर-3 दाखिल करना होगा. नए कैपिटल गेन नियमों और स्पेशल इनकम कैटेगरी के कारण ITR-3 फॉर्म में पहले से अधिक जानकारी मांगी जा सकती है. 

ITR-4: आईटीआर-4 फॉर्म को सुगम भी कहा जाता है. नए नियम के तहत इस फॉर्म में सबसे अधिक बदलाव देखा जा सकता है. ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स के मुताबिक कई करदाता अब इस फॉर्म का उपयोग नहीं कर सकेंगे. 50 लाख से ज्यादा इनकम वाले, दो से अधिक मकान रखने वाले, विदेशी आय या संपत्ति रखने वाले, कंपनी डायरेक्टर, अनलिस्टेड शेयरधारक और 5000 रुपए से ज्यादा कृषि आय वालों को आईटीआर-4 फॉर्म भरने की अनुमति नहीं होगी.

ITR-5, ITR-6 और ITR-7: नए इनकम टैक्स एक्ट के तहत ITR-5, ITR-6 और ITR-7 फॉर्म में पारदर्शिता बढ़ेगी. फर्म, LLP व AOP के लिए आईटीआर-5 और कंपनियों के लिए आईटीआर-6 का ढांचा लगभग पहले जैसा रहेगा, लेकिन डिजिटल कंप्लायंस, ऑडिट लिंकिंग और रिपोर्टिंग को मजबूत किया गया है. उधर, आईटीआर-7, जो राजनीतिक दल, ट्रस्ट और छूट प्राप्त संस्थाओं के लिए है, उसमें डोनेशन, फंड उपयोग और ऑडिट रिपोर्ट को सीधे रिटर्न से जोड़ दिया गया है.

...तो इन बातों का जरूर रखें ध्यान 
1 अप्रैल 2026 से जो नया आयकर कानून लागू होने जा रहा है, उसमें ऑनलाइन फाइलिंग लगभग सबके लिए अनिवार्य है.  नए कानून में डेटा, AI और डिजिटल ट्रैकिंग पर पूरा ध्यान रखा गया है. नए नियम में से यह मालूम चलेगा कि कौन-सा टैक्सपेयर किस आईटीआर फॉर्म के लिए योग्य है. गलत फॉर्म भर दिया वाली दिक्कत खत्म हो जाएगी. सिस्टम खुद बताएगा कि आप इस फॉर्म के लिए एलिजिबल नहीं हैं. अब अनुमान के आधार पर रिटर्न नहीं चलेगा. सही ITR चुनना अब सबसे जरूरी स्किल है. छोटी गलती बड़ा नोटिस बन सकती है. 2026 से पहले नियम समझना निवेश से कम नहीं. आईटीआर भरने को लेकर यदि  आपने अभी से तैयारी नहीं की तो बाद में पछताना पड़ सकता है.  इस साल आईटीआर दाखिल करने से पहले इनकम टैक्स के नए रूल को जरूर ध्यान से पढ़ लें. अपने ITR टाइप की दोबारा जांच कर लें. AIS/TIS अभी से ट्रैक करना शुरू करें. जरूरत हो तो प्रोफेशनल की भी सलाह ले सकते हैं.


 

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