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इंस्टाग्राम रील्स से खेतों तक पहुंचा एवोकाडो, एक किसान ने तो YouTube से सीखकर 4 टन पैदा किया, एक किसान कॉफी के साथ लगाकर कमा रहा डबल इनकम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अगस्त को मन की बात के 137वें एपिसोड में इसी भारतीय एवोकाडो और इससे किसानों की बदलती कमाई का जिक्र किया. उन्होंने आंध्र प्रदेश के कडप्पा से लेकर तमिलनाडु के कोडाइकनाल और कर्नाटक के चिक्कमगलुरु तक के किसानों के उदाहरण दिए.

Avocado
gnttv.com
  • नई दिल्ली ,
  • 03 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 9:32 AM IST
  • टमाटर-केले की खेती करते थे, दोस्त के खेत में देखा एवोकाडो
  • आधे हेक्टेयर में शुरू की खेती

इंस्टाग्राम खोलते ही कभी न कभी एवोकाडो टोस्ट, एवोकाडो सलाद या इसकी हेल्दी रेसिपी वाली रील सामने आ ही जाती है. ऑनलाइन डिलीवरी ऐप्स से लेकर घर के बाहर फल-सब्जी की दुकानों तक एवोकाडो आसानी से मिलने लगा है. यानी जिस फल को कुछ साल पहले भारत में बहुत कम लोग जानते थे, वह अब आम लोगों की डाइट का हिस्सा बनने लगा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अगस्त को मन की बात के 137वें एपिसोड में भारतीय एवोकाडो की बढ़ती लोकप्रियता और किसानों की बदलती आमदनी का जिक्र किया. उन्होंने आंध्र प्रदेश के एक किसान की कहानी सुनाई, जिसने टमाटर और केले की पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर एवोकाडो उगाना शुरू किया. वहीं कर्नाटक में किसान कॉफी के बागानों के बीच एवोकाडो लगाकर एक ही जमीन से एक्स्ट्रा कमाई का मॉडल तैयार कर रहे हैं.

टमाटर-केले की खेती से एवोकाडो तक पहुंचा किसान
आंध्र प्रदेश के कडप्पा के किसान वरदराज सालों से टमाटर और केले की खेती करते थे. एक दिन उन्होंने अपने दोस्त के खेत में एवोकाडो का पौधा देखा. फल के बारे में जानने के लिए उन्होंने YouTube का सहारा लिया. खेती की जानकारी जुटाई और इसके बाद खुद एवोकाडो उगाना शुरू कर दिया. उन्होंने इसकी बिक्री का तरीका भी बदला. वह अपनी उपज सीधे स्थानीय दुकानों में सप्लाई करते हैं. प्रधानमंत्री मोदी के मुताबिक, वरदराज अब तक करीब 4 टन एवोकाडो पैदा कर चुके हैं.

कॉफी के बागान में एवोकाडो, एक खेत से दो कमाई
कर्नाटक के चिक्कमगलुरु में किसानों ने एवोकाडो को कॉफी की खेती के साथ जोड़ने की कोशिश शुरू की है. कॉफी के बागानों के बीच एवोकाडो के पौधे लगाए जा रहे हैं. इस मॉडल का मकसद मौजूदा खेती को पूरी तरह बदलना नहीं, बल्कि उसी जमीन से अतिरिक्त कमाई का रास्ता तैयार करना है. कॉफी के साथ एवोकाडो और कुछ जगहों पर काली मिर्च जैसी फसलों से किसान अपनी आय के अलग-अलग सोर्स बना रहे हैं.

 

आधे हेक्टेयर से शुरू हुई खेती
तमिलनाडु के कोडाइकनाल के किसान चंद्रशेखरन ने करीब आधे हेक्टेयर जमीन पर एवोकाडो की खेती शुरू की. प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि इस फसल से उन्हें अच्छे दाम मिले और उनकी आय में बढ़ोतरी हुई.

कभी विदेशी फल माना जाता था, अब भारत में भी हो रही खेती
एवोकाडो को लंबे समय तक भारत में एक विदेशी और महंगा फल माना जाता रहा. लेकिन अब देश के अलग-अलग हिस्सों में इसकी खेती हो रही है. शहरों में इसकी मांग बढ़ने के पीछे हेल्थ और प्रीमियम फूड का ट्रेंड अहम है. एवोकाडो में मौजूद हेल्दी फैट और पोषक तत्वों के कारण इसे फिटनेस और हेल्थ-कॉन्शियस डाइट में शामिल किया जाता है. इंस्टाग्राम और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इसके इस्तेमाल की अलग-अलग रेसिपी वायरल होने से भी इसकी लोकप्रियता बढ़ी है.

भारतीय एवोकाडो और इंपोर्टेड में अंतर
भारत में मिलने वाला एवोकाडो कई जगह बटर फ्रूट के नाम से भी जाना जाता है. इसकी स्किन आमतौर पर चिकनी, चमकदार और हरे रंग की होती है. वहीं इंपोर्टेड Hass एवोकाडो की स्किन गहरे रंग की और खुरदरी होती है.

भारतीय एवोकाडो का गूदा कुछ किस्मों में थोड़ा ज्यादा फाइबरयुक्त और पानी वाला हो सकता है, जबकि Hass जैसी किस्में अधिक क्रीमी और ऑयली होती हैं. स्वाद में भी अंतर होता है, लेकिन अच्छी तरह उगाया गया भारतीय एवोकाडो भी स्वाद और क्वालिटी के मामले में अच्छा हो सकता है.

 

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