सोशल मीडिया पर पैसा कमाने और निवेश करने के तरीके बताने वाले फिनफ्लुएंसर्स की भरमार है, लेकिन इनमें से कितने असल में इसके लिए अधिकृत हैं, इस पर CFA इंस्टीट्यूट की एक नई रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया है. रिपोर्ट के मुताबिक फाइनेंशियल इन्फ्लुएंसर्स यानी फिनफ्लुएंसर्स में से महज करीब 6 फीसदी ही सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया यानी सेबी के पास इन्वेस्टमेंट एडवाइजर के तौर पर रजिस्टर्ड हैं, जबकि 33 फीसदी फिनफ्लुएंसर्स अब भी खुलेआम स्टॉक की सिफारिशें दे रहे हैं. यह आंकड़ा निवेशकों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है.
कितने फिनफ्लुएंसर्स पर हुई स्टडी?
यह स्टडी सोशल मीडिया पर मौजूद फिनफ्लुएंसर्स के प्रोफाइल और उनके कंटेंट के विश्लेषण पर आधारित है. यह रिसर्च जनवरी से अक्टूबर 2025 के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पोस्ट किए गए कंटेंट के विश्लेषण पर आधारित है. 2024 में हुई पिछली स्टडी के मुकाबले रजिस्ट्रेशन में करीब 4 फीसदी अंकों का मामूली इजाफा दर्ज हुआ है. रिपोर्ट में 48 प्रमुख भारतीय फिनफ्लुएंसर्स का विश्लेषण किया गया, जिनमें से बड़ी संख्या अब भी डिस्क्लोजर और पारदर्शिता के मानकों पर खरी नहीं उतर रही.
पारदर्शिता पर अब भी बड़ा सवाल
रिपोर्ट में फिनफ्लुएंसर्स की पारदर्शिता को लेकर भी कई अहम आंकड़े सामने आए हैं. करीब 37.5 फीसदी फिनफ्लुएंसर्स स्पॉन्सर्ड कंटेंट और एफिलिएट रिलेशनशिप जैसे हितों के टकराव की जानकारी नहीं देते. वहीं एक चौथाई से ज्यादा फिनफ्लुएंसर्स फीस, टैक्स असर या लॉक-इन पीरियड जैसी जरूरी निवेश जानकारियों का जिक्र तक नहीं करते. जबकि करीब 6 फीसदी फिनफ्लुएंसर्स पहले से ही डिस्क्लोजर या आचरण से जुड़े विवादों में सार्वजनिक तौर पर घिर चुके हैं और 4 फीसदी को सेबी की तरफ से पेनल्टी का सामना करना पड़ चुका है.
2024 की सख्ती के बावजूद जारी है खेल
यह आंकड़े ऐसे वक्त सामने आए हैं जब सेबी पहले ही इस इंडस्ट्री पर सख्ती दिखा चुका है. जुलाई 2024 में सेबी ने म्यूचुअल फंड्स, ब्रोकर्स और इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स जैसी रेगुलेटेड एंटिटीज को प्रमोशन या मार्केटिंग के लिए अनरजिस्टर्ड फिनफ्लुएंसर्स से जुड़ने पर रोक लगा दी थी. इसके बावजूद बिना रजिस्ट्रेशन के स्टॉक टिप्स देने का सिलसिला अब भी बड़े पैमाने पर जारी है.
कुछ मोर्चों पर सुधार भी दिखा
हालांकि रिपोर्ट में कुछ सकारात्मक बदलाव भी दर्ज किए गए हैं. फीस जैसी अहम निवेश जानकारियों का खुलासा करने वाले फिनफ्लुएंसर्स की हिस्सेदारी 2024 के 29 फीसदी से बढ़कर अब 72.9 फीसदी हो गई है. अध्ययन में शामिल आधे फिनफ्लुएंसर्स की उम्र 30 साल या उससे कम है, जबकि इनकी औसत उम्र 32 साल है. करीब 50 फीसदी फिनफ्लुएंसर्स मुंबई और दिल्ली-एनसीआर से काम करते हैं, जबकि 10 फीसदी से ज्यादा भारत के बाहर से ऑपरेट करते हैं. इंस्टाग्राम इनका सबसे बड़ा मंच बना हुआ है, जबकि इंस्टाग्राम और यूट्यूब मिलाकर इनकी कुल पहुंच का 90 फीसदी से ज्यादा हिस्सा कवर करते हैं.
निवेशकों के लिए क्या है सबक?
रिपोर्ट के आंकड़े साफ बताते हैं कि सोशल मीडिया पर स्टॉक टिप्स देने वाला हर तीसरा फिनफ्लुएंसर सेबी से अधिकृत नहीं है. ऐसे में निवेशकों के लिए जरूरी हो जाता है कि वे किसी भी सलाह पर अमल करने से पहले संबंधित फिनफ्लुएंसर का रजिस्ट्रेशन स्टेटस जरूर जांच लें और सिर्फ सोशल मीडिया की लोकप्रियता के आधार पर पैसा लगाने से बचें.