Credit Score: क्या होता है क्रेडिट स्कोर, अब हर सप्ताह किया जाएगा अपडेट, लोन लेना होगा आसान, जानें और क्या-क्या मिलेंगे फायदे?

Cibil Score: क्रेडिट स्कोर के अपडेट होने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. अब हर सप्ताह क्रेडिट स्कोर अपडेट किया जाएगा. इससे क्रेडिट कार्ड और लोन लेने वालों को लाभ मिलेगा. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नए ड्राफ्ट दिशानिर्देशों के मुताबिक क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियों (CICS) को हर सात दिन में  क्रेडिट स्कोर को अपडेट करना होगा. यह बदलाव 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा. आइए जानते हैं क्या होता है क्रेडिट स्कोर हर सप्ताह अपडेट होने पर क्या-क्या मिलेंगे लाभ?

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gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 27 नवंबर 2025,
  • अपडेटेड 4:55 PM IST

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने ऋण ढांचे को और मजबूत बनाने को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है. अब हर सप्ताह क्रेडिट स्कोर अपडेट किया जाएगा. इस संबंध में आरबीआई ने 26 नवंबर 2025 को ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी की है. इस गाइडलाइंस के मुताबिक क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियों (CICS) को हर सात दिन में  क्रेडिट स्कोर को अपडेट करना होगा. यह बदलाव 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा.

इससे क्रेडिट स्कोर के अपडेट होने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. आपको मालूम हो कि अभी ग्राहकों के क्रेडिट डेटा की रिपोर्टिंग हर पखवाड़े (15 दिन) या महीने में एक बार की जाती है. इससे कई बार ग्राहकों को क्रेडिट कार्ड या सस्ते ब्याज वाले लोन पाने में परेशानी आती है. अब हर सप्ताह क्रेडिट स्कोर अपडेट होने से लोन आसानी से मिल जाएगा. आइए जानते हैं क्या होता है क्रेडिट स्कोर हर सप्ताह अपडेट होने पर क्या-क्या मिलेंगे लाभ?

क्या होता है क्रेडिट स्कोर
क्रेडिट स्कोर (Credit Score) या सिबिल स्कोर (Cibil Score) तीन अंकों का एक नंबर होता है. यह 300 से 900 के बीच हो सकता है. कोई भी बैंक या वित्तीय संस्थान क्रेडिट स्कोर देखकर ही लोन देते हैं. बैंक आपकी क्रेडिट हिस्ट्री को देख यह जान लेते हैं कि आपने पहले कभी लोन लिया है या नहीं, यदि लोन लिया था तो उसका भुगतान समय पर किया या नहीं. बैंक को क्रेडिट स्कोर के जरिए यह मालूम चल जाता है कि आपने पहले कोई गड़बड़ी की है. ऐसी जानकारी मिलने पर बैंक लोन देने से मना कर देते हैं.

स‍िबिल स्कोर 900 के करीब होता है तो उसे सबसे बेहतर माना जाता है. बैंक तुरंत लोन दे देते हैं. उस लोन पर ब्याज भी कम लेते हैं. यदि क्रेडिट स्कोर खराब है तो बैंक लोन को रिजेक्ट कर देते हैं या फिर बहुत अधिक ब्याज पर लोन देते हैं. अभी अपने देश में लाइसेंस प्राप्त क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनियों की ओर से क्रेडिट रिपोर्ट जारी की जाती हैं. सिबिल स्कोर आधिकारिक सिबिल वेबसाइट www.cibil.com पर फ्री में देखा जा सकता है. इसके अलावा कई बैंकिंग सर्विस एग्रीगेटर्स भी सिबिल स्कोर चेक करने की सुविधा देते हैं.

इन तारीखों पर जारी करना होगा क्रेडिट स्कोर
भारतीय रिजर्व बैंक के मुताबिक क्रेडिट कंपनियां को हर 7 दिन में क्रेडिट स्कोर अपडेट करना होगा. क्रेडिट कंपनियां हर महीने की 7, 14, 21, 28 तारीख और महीने के आखिरी दिन तक क्रेडिट रिपोर्ट को अपडेट करेंगी. इसके लिए बैंकों को हर महीने की पूरी क्रेडिट फाइल अगले महीने की 3 तारीख तक क्रेडिट कंपनियों को भेजनी होगी. सप्ताह के बाकी अपडेट के लिए बैंकों को इंक्रीमेंटल डेटा भेजना होगा. जैसे नए खुले अकाउंट, बंद हुए अकाउंट, ग्राहक द्वारा की गई कोई बदलाव जैसी जानकारी या अकाउंट की स्थिति बदलने से जुड़ा डेटा. बैंकों को यह डेटा दो दिनों के अंदर जमा करना होगा. यदि कोई बैंक समय पर डेटा जमा नहीं करता है तो क्रेडिट कंपनियां इसे RBI के DAKSH पोर्टल पर रिपोर्ट करेंगी.

हर सप्ताह क्रेडिट स्कोर अपडेट होने पर ग्राहकों को क्या मिलेगा फायदा 
1. हर सप्ताह क्रेडिट स्कोर अपडेट होने पर ग्राहकों को लोन की किस्त, क्रेडिट कार्ड बिल या किसी भी बकाया का भुगतान करने पर उसका सकारात्मक असर जल्दी दिखाई देगा. 
2. पहले क्रेडिट स्कोर अपडेट होने में दो से तीन सप्ताह लग जाते थे, अब यह कुछ ही दिनों में रिपोर्ट हो जाएगा. इससे ग्राहकों की क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत दिखेगी और उन्हें नए कर्ज या क्रेडिट कार्ड पाने में आसानी होगी.
3. आजकल कई बैंक ब्याज दर को क्रेडिट स्कोर से जोड़ चुके हैं, ऐसे में स्कोर तेजी से अपडेट होने पर ब्याज कम पड़ सकता है. इसके अलावा बेहतर क्रेडिट कार्ड ऑफर और लिमिट बढ़ाने में भी मदद मिलेगी.
4. हर सप्ताह क्रेडिट स्कोर अपडेट होने पर किसी भी गलत या अधूरी जानकारी को समय रहते सुधरवाना आसान होगा. 
5. हर सप्ताह क्रेडिट स्कोर अपडेट होने से बैंकों और अन्य ऋणदाताओं को भी फायदा होगा. 
6. बैंकों को ग्राहकों का ताजा और सही क्रेडिट डेटा मिलेगा, जिससे लोन मंजूरी और जोखिम आंकने की प्रक्रिया ज्यादा सटीक होगी. 
7. इससे बैंक बेहतर तरीके से तय कर पाएंगे कि किसे लोन देना है और किस ब्याज दर पर देना है.
8. कर्ज चूक की संभावना भी कम होगी क्योंकि डेटा में देरी रहने से जो गलत आकलन होते थे, वे अब कम होंगे.

क्या हैं अलग-अलग क्रेडिट स्कोर के मायने
1.
क्रेडिट स्कोर 300 से 900 के बीच होता है.
2. 750-900 क्रेडिट स्कोर को बहुत अच्छा माना जाता है. लोन जल्दी मंजूर होता है और ब्याज दर भी कम मिलती है.
3. 700-749 क्रेडिट स्कोर को अच्छा माना जाता है. इसका मतलब है कि बैंक आप पर भरोसा करते हैं. ज्यादातर लोन मिल जाते हैं, पर ब्याज दर थोड़ी ज्यादा हो सकती है.
4. 650-699 क्रेडिट स्कोर को औसत माना जाता है. इसका मतलब है कि कुछ बैंक भरोसा कर सकते हैं. लोन मिलने में मुश्किल हो सकती है. कई बार अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जाते हैं.
5. 550-649 क्रेडिट स्कोर को कमजोर माना जाता है. लोन मिलने में परेशानी हो सकती है. कर्ज मिलेगा भी तो ब्याज दर काफी ज्यादा होती है.
6. 300-549 क्रेडिट स्कोर को बहुत खराब माना जाता है. लोन रिजेक्ट होने की संभावना अधिक होती है. 

ऐसे सुधार सकते हैं अपना क्रेडिट स्कोर 
1. लोन की ईएमआई समय पर जमा करें.
2. क्रेडिट कार्ड का बिल टाइम पर जमा करें. 
3. क्रेडिट कार्ड लिमिट का पूरा उपयोग न करें.
4. पुराने लोन बंद करने पर क्लोजर रिपोर्ट जरूर लें.
5. बार-बार लोन के लिए अप्लाई न करें.
6. किसी एक ही तरह का लोन न लें.
7. ज्वाइंट अकाउंट्स पर नजर रखें.
8. जहां भरोसा न हो, वहां लोन गारंटर न बनें.

 

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