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खोलने जा रहे हैं जॉइंट अकाउंट? तो पहले जान लें ये बात... नहीं तो बाद में काटते रहेंगे ब्रांच के चक्कर

जॉइंट अकाउंट देखें तो एक प्रकार से अच्छा भी होता है. इसमें कई अकाउंट होल्डर को जोड़ा जा सकता है. जिससे एक से ज्यादा लोग ट्रांजैक्शन कर सकते हैं. लेकिन इसके कुछ नुकसान भी होते हैं, जो तब होते हैं जब आप इस अकाउंट को खुलवाते समय ठीक फैसले नहीं लिए जाते.

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gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 04 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 7:29 PM IST

आज के समय में पति-पत्नी, माता-पिता और बच्चों के बीच जॉइंट बैंक अकाउंट खुलवाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है. इससे घर के खर्च चलाना, बिल भरना और जरूरत के समय पैसों का इस्तेमाल करना आसान हो जाता है. लेकिन बिना पूरी जानकारी के जॉइंट अकाउंट खोलना आगे चलकर परेशानी का कारण भी बन सकता है. इसलिए अकाउंट खुलवाने से पहले कुछ जरूरी नियमों को समझना बेहद जरूरी है.

समझें जॉइंट अकाउंट का ऑपरेशन मोड

जॉइंट अकाउंट खोलते समय बैंक अलग-अलग ऑपरेशन मोड का ऑप्शन देता है. इनमें Either or Survivor, Joint और Former or Survivor सबसे आम हैं. Either or Survivor में दोनों अकाउंट होल्डर अलग-अलग लेनदेन कर सकते हैं. वहीं Joint मोड में हर काम के लिए दोनों की मंजूरी जरूरी होती है. Former or Survivor मोड उन लोगों के लिए बेहतर माना जाता है, जो कंट्रोल एक व्यक्ति के पास रखना चाहते हैं. इसलिए अपनी जरूरत के हिसाब सही मोड चुनें.

अकाउंट खोलते समय जरूर बनाएं नॉमिनी

कई लोग जॉइंट अकाउंट खुलवाते समय नॉमिनी जोड़ना जरूरी नहीं समझते. लेकिन यह बड़ी गलती हो सकती है. अगर किसी कारण से अकाउंट होल्डर के साथ कोई अनहोनी हो जाए, तो नॉमिनी होने से पैसे निकालने और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने में आसानी रहती है. इसलिए शुरुआत में ही सही नॉमिनी जोड़ना बेहतर रहता है.

टैक्स के नियम भी अच्छी तरह समझ लें

जॉइंट अकाउंट होने का मतलब यह नहीं है कि टैक्स दोनों लोगों पर बराबर लगेगा. टैक्स उसी व्यक्ति के नाम पर माना जाता है, जिसने पैसे कमाए और अकाउंट में जमा किए हैं. इसलिए अगर दोनों लोग अकाउंट का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो अपनी आय और जमा राशि का सही रिकॉर्ड रखना जरूरी है. इससे किसी तरह की टैक्स संबंधी परेशानी नहीं होती.

इमरजेंसी की स्थिति के लिए पहले से करें तैयारी

जॉइंट अकाउंट में किसी विवाद की स्थिति में बैंक अकाउंट पर रोक भी लगा सकता है. वहीं किसी एक होल्डर की मृत्यु होने पर अकाउंट का कंट्रोल उसी मोड के अनुसार होता है, जो शुरुआत में चुना गया था. इसलिए अकाउंट खोलते समय फ्यूचर की जरूरतों  को ध्यान में रखकर फैसला लेना चाहिए.

बाद में नियम बदलना आसान नहीं

जरूरत पड़ने पर जॉइंट अकाउंट का ऑपरेशन मोड या नॉमिनी बदला जा सकता है, लेकिन इसके लिए सभी अकाउंट होल्डर की सहमति जरूरी होती है. कई बार ब्रांच में जाकर प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है. इसलिए शुरुआत में ही सही फैसला लेना सबसे बेहतर माना जाता है.

 

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