EPFO 2025-26 rate: EPF पर फिर 8.25% ब्याज, न दर बढ़ी, न घटा मुनाफा, समझिए आखिर क्यों स्थिर रखी गई दर?

EPFO ने इस साल भी व्याज दर को 8.25% पर रखने का फैसला किया है, जिसको लागू करना अभी बाकी है.

The EPF interest rate is staying at 8.25% for FY26.
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 03 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 1:07 PM IST

जहां मिडिल क्लास के लिए घर का बजट संभालना मुश्किल हो रहा हो और लोग हर खर्च सोच-समझकर कर रहे हैं, ऐसे समय में अगर ईपीएफ (EPF) पर ब्याज दर थोड़ी भी बढ़ जाती तो नौकरीपेशा लोगों को खर्च से राहत मिलती है. लेकिन इस बार भी ईपीएफ की दर 8.25% पर ही कायम रखी गई है. ऐसे में आपके मन में भी सवाल उठना लाजमी है कि आखिर बढ़ोतरी क्यों नहीं हुई?

लगातार तीसरे साल 8.25% पर ही दर
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भविष्य निधि जमा पर ब्याज दर 8.25% ही रखने की सिफारिश की है. अब इस प्रस्ताव को वित्त मंत्रालय की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. अंतिम स्वीकृति के बाद श्रम एवं रोजगार मंत्रालय इसे अधिकारिक तौर पर लागू करेगा और फिर यह ब्याज राशि खाताधारकों के खातों में जमा की जाएगी. 

यह लगातार तीसरा साल है जब ईपीएफ पर 8.25% ब्याज मिलेगा. वित्त वर्ष 2023-24 में दर 8.15% से बढ़ाकर 8.25% की गई थी. उससे पहले 2021-22 में यह घटकर 8.1% रह गई थी, जो करीब चार दशक में सबसे कम व्याज दर था. यानी इस बार दर में कटौती तो नहीं हुई, लेकिन कोई बढ़ोतरी भी नहीं की गई.

दर क्यों नहीं बढ़ाई गई?
कई लोगों को लगता है कि जब महंगाई बढ़ रही है तो ब्याज दर भी बढ़नी चाहिए. लेकिन ईपीएफ का ब्याज तय करने का तरीका सामान्य बचत खाते या शेयर बाजार से जुड़े निवेश जैसा नहीं होता.

विशेषज्ञों के मुताबिक, ईपीएफओ की आय मुख्य रूप से सरकारी बॉन्ड और अन्य सुरक्षित ऋण साधनों में किए गए निवेश से आती है. इन निवेशों को सुरक्षित माना जाता है, लेकिन इनसे बहुत ज्यादा मुनाफा नहीं मिलता. इक्विटी यानी शेयर बाजार में निवेश की हिस्सेदारी सीमित होती है.

अगर बाजार से मिलने वाला रिटर्न ज्यादा नहीं बढ़ता, तो ईपीएफओ के पास ब्याज दर बढ़ाने का विकल्प सीमित रह जाता है. ऐसी स्थिति में दर बढ़ाने के लिए रिजर्व फंड से पैसा निकालना पड़ेगा, जो सरकारी विशेषज्ञों द्वारा ठीक कदम नहीं माना जाता. 

स्थिरता पर जोर, जोखिम से दूरी
सरकार का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भी ईपीएफओ ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखना जरूरी है. ब्याज दर को स्थिर रखने से उस पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव नहीं पड़ेगा. 

विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर भविष्य में लगातार बेहतर रिटर्न पाना है, तो फंड के निवेश के ढांचे में धीरे-धीरे बदलाव करना होगा. दुनिया के कई देशों में पेंशन और भविष्य निधि फंड सुरक्षित निवेश के साथ-साथ सीमित लेकिन सोच-समझकर ग्रोथ वाले साधनों में भी निवेश करते हैं. भारत को भी सुरक्षित और बेहतर रिटर्न के लिए इस स्ट्रेटजी को अपनाना होगा.

पिछले वर्षों का रुख
अगर पिछले वर्षों पर नजर डालें तो ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव रहा है.
2015-16 में दर 8.8% थी.
2016-17 में 8.65% रही.
2017-18 में 8.55%.
2020-21 में 8.5%.
इसके बाद 2021-22 में यह घटकर 8.1% पर आ गई थी, जो 1977-78 के बाद सबसे कम थी. मौजूदा 8.25% दर न तो सबसे ज्यादा है और न ही सबसे कम, बल्कि पिछले कुछ वर्षों के औसत के आसपास है.

भविष्य के लिए इसका मतलब
फिलहाल 8.25% के दर को बरकरार रखना सावधानी भरा कदम माना जा सकता है. यह फैसला फायदे की खुशी देने वाला भले न हो, लेकिन बजार को देखते हुए लिया गया है. आगे ब्याज दर बढ़ेगी या नहीं, यह बाजार की स्थिति और निवेश नीति में संभावित बदलाव पर निर्भर करेगा.

 

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