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Flex Fuel: क्या है फ्लेक्‍स फ्यूल... महंगे पेट्रोल की टेंशन करेगा दूर... लेकिन कैसे... यहां जानिए 

Flex Fuel Vehicles: पेट्रोल की बढ़ती खपत और कीमत को कम करने के लिए सरकार लगातार दूसरे फ्यूल को बढ़ावा दे रही है. इसी कड़ी में सरकार फ्लेक्‍स फ्यूल तकनीक को लेकर आई है. भारत में जहां गुरुवार को मारुति की ओर से फ्लेक्‍स फ्यूल ईंधन से चलने वाली वैगन आर को पेश किया गया है, वहीं बुधवार को हीरो मोटोकॉर्प की ओर से फ्लेक्‍स फ्यूल ईंधन से चलने वाली स्‍प्‍लेंडर प्‍लस और एचएफ डीलक्‍स मोटरसाइकिल को लॉन्‍च किया गया है. आइए जानते हैं आखिर क्या है फ्लेक्‍स फ्यूल और यह महंगे पेट्रोल की टेंशन को कैसे दूर करेगा? 

Flex Fuel
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 04 जून 2026,
  • अपडेटेड 3:41 PM IST

अमेरिका-इजराइल बनाम ईरान तनाव के बाद अधिकतर देशों में तेल और गैस का संकट पैदा हो गया है. भारत भी इससे अछूता नहीं है. पेट्रोल की बढ़ती खपत और कीमत को कम करने के लिए सरकार लगातार दूसरे फ्यूल को बढ़ावा दे रही है. इसी कड़ी में सरकार फ्लेक्‍स फ्यूल (Flex Fuel) तकनीक को लेकर आई है.

सरकार इथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा दे रही है. भारत में जहां गुरुवार को मारुति की ओर से फ्लेक्‍स फ्यूल ईंधन से चलने वाली वैगन आर को पेश किया गया है, वहीं बुधवार को हीरो मोटोकॉर्प की ओर से फ्लेक्‍स फ्यूल ईंधन से चलने वाली स्‍प्‍लेंडर प्‍लस और एचएफ डीलक्‍स मोटरसाइकिल को लॉन्‍च किया गया है. आइए जानते हैं आखिर क्या है फ्लेक्‍स फ्यूल और यह महंगे पेट्रोल की टेंशन को कैसे दूर करेगा? 

क्या है फ्लेक्स फ्यूल तकनीक
आपको मालूम हो कि फ्लेक्स फ्यूल कोई अलग ईंधन नहीं है, बल्कि यह पेट्रोल और इथेनॉल के मिश्रण से बना ईंधन है. फ्लेक्स-फ्यूल वाहन के इंजन में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जो गाड़ी के इंजन को सिर्फ पेट्रोल या डीजल पर ही नहीं बल्कि कई प्रकार के ईंधनों या उनके मिश्रण पर चलने की अनुमति देती है. फ्लेक्स फ्यूल वाहन आमतौर पर पेट्रोल और इथेनॉल के मिश्रण पर चलते हैं.

अभी तक हमारे देश की अधिकतर गाड़ियां सिर्फ पेट्रोल या डीजल पर चलती हैं लेकिन फ्लेक्स-फ्यूल इंजन (ज्यादातर जिन्हें E85 या E100 मिक्स इंजन) को इस तरह से डिजाइन और प्रोग्राम किया जाता है कि वे पेट्रोल में 20 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत तक इथेनॉल के मिश्रण आसानी से चल सकें. आपको मालूम हो कि E20, E85 और E100 में शामिल E का मतलब इथेनॉल है और इसके साथ लिखी संख्या यह बताती है कि उस ईंधन में कितने प्रतिशत इथेनॉल मिला हुआ है. E85 ईंधन में 85% इथेनॉल और 15% पेट्रोल का मिश्रण होगा. E100 ईंधन में 100% इथेनॉल होता है यानी 0% पेट्रोल. यह पूरी तरह से शुद्ध बायोफ्यूल है.

फ्लेक्स फ्यूल कैसे करता है काम 
फ्लेक्स फ्यूल गाड़ियों में एक खास फ्यूल सेंसर और एडवांस्ड इंजन कंट्रोल यूनिट होता है. यह सेंसर भांप लेता है कि फ्यूल टैंक में पेट्रोल और इथेनॉल का अनुपात क्या है. फिर उसी के अनुसार इंजन की टाइमिंग और फ्यूल इंजेक्शन को ऑटोमैटिकली एडजस्ट कर देता है. फ्लेक्स फ्यूल गाड़ियां E20, E85 और E100 के मिश्रणों पर चलती हैं. इसी के कारण इन्हें फ्लेक्स फ्यूल कहा जाता है.

क्या है इथेनॉल
इथेनॉल एक प्रकार का रिन्यूएबल बायोफ्यूल है, जिसे गन्ना, मक्का, टूटे चावल और कृषि अपशिष्ट से बनाया जाता है. पहले इनसे चीनी निकाली जाती है, इसके बाद इसमें यीस्ट मिलाया जाता है, जो इस शुगर को इथेनॉल और गैस में बदल देता है. इस प्रक्रिया को फर्मेटेंशन कहते हैं. इसके बाद जो मिश्रण तैयार होता है उसे डिस्टलेशन कर पानी से अलग किया जाता है. यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद इथेनॉल को ईंधन या अन्य जरूरतों में इस्तेमाल कर सकते हैं. शुद्ध पेट्रोल के मुकाबले इथेनॉल की उत्पादन लागत कम होती है. 100 प्रतिशत इथेनॉल फ्यूल पेट्रोल के मुकाबले बेहद सस्ता होता है. इसी के चलते सरकार इथेनॉल फ्यूल को बढ़ावा दे रही है.

फ्लेक्‍स फ्यूल के फायदे
1. फ्लेक्‍स फ्यूल ईंधन के इस्तेमाल से देश में कच्‍चे तेल की मांग कम हो जाएगी. दूसरे देशों से खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
2. फ्लेक्‍स फ्यूल ईंधन से वाहन चलाने पर प्रदूषण में कमी आएगी. लाई जा सकती है.
3. फ्लेक्‍स फ्यूल से किसानों को भी फायदा होगा क्योंकि यह ईंधन गन्‍ने के रस से बनाया जाता है. मांग बढ़ने पर किसानों को गन्ना का अधिक दाम मिलेगा. 
4. आम आदमी को भी  फ्लेक्‍स फ्यूल से फायदा मिलेगा क्योंकि पेट्रोल के मुकाबले इसकी कीमत कम हो जाएगी. 

फ्लेक्‍स फ्यूल के नुकसान
1. फ्लेक्‍स फ्यूल से चलने वाली गाड़ियों की माइलेज पेट्रोल से चलने वाले वाहनों के मुकाबले 15 से 20 फीसदी तक कम हो सकती है.
2. ईथेनॉल की एनर्जी डेंसिटी पेट्रोल के मुकाबले कम होती है, इसके चलते माइलेज कम होती है.
3. फ्लेक्‍स फ्यूल का असर इंजन की उम्र पर पड़ता है. पेट्रोल के मुकाबले फ्लेक्‍स फ्यूल से चलने वाले वाहनों में पाइप, रबड़ सील जैसे हिस्‍से जल्‍दी खराब हो सकते हैं. 
4. फ्लेक्‍स फ्यूल ईंधन से चलने वाली गड़ियों की कीमत ज्‍यादा हो सकती है.

 

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