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8th Pay Commission Family Unit Formula: क्या है फैमिली यूनिट फॉर्मूला? सैलरी की गणना के लिए सिर्फ 3 नहीं... एक परिवार में 6 सदस्यों को गिनें, मिनिमम वेतन हर महीने मिले 69000 रुपए, वेतन आयोग से कर्मचारी संगठनों की मांग

Family Unit Formula: केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स 8वें वेतन आयोग को लागू होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. कर्मचारी संगठनों ने वेतन आयोग से फैमिली यूनिट फॉर्मूला में बदलाव की मांग की है. 8वें वेतन आयोग की बैठक में सैलरी की गणना के लिए सिर्फ 3 नहीं बल्कि एक परिवार में 6 सदस्यों को गिनने की मांग की है. ऐसे परिवार के लिए मिनिमम सैलरी 69000 रुपए प्रति महीना की मांग की गई है.

8th Pay Commission 8th Pay Commission

8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लागू करने को लेकर बैठकों का दौर जारी है. कर्मचारी संगठनों से राय लिया जा रहा है. उधर, केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स 8वें वेतन आयोग को लागू होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. आखिर करें भी क्यों न सैलरी जो बंपर बढ़ने वाली है. कर्मचारी संगठनों ने वेतन आयोग की बैठक में फैमिली यूनिट फॉर्मूला (Family Unit Formula) में बदलाव की मांग की है. आइए जानते हैं क्या है फैमिली यूनिट फॉर्मूला और इससे कैसे सैलरी होती है तय?

क्या है फैमिली यूनिट फॉर्मूला 
8वें वेतन आयोग की अक्सर जब भी चर्चा होती है तो लोग डियरनेस अलाउंस (DA) और फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) की चर्चा करते हैं लेकिन फैमिली यूनिट फॉर्मूला पर बात नहीं करते हैं जबकि फैमिली यूनिट फॉर्मूला केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी पर बड़ा असर डाल सकता है. दरअसल, फैमिली यूनिट फॉर्मूला यह तय करता है कि एक कर्मचारी को अपने परिवार को चलाने के लिए कितने पैसे की जरूरत होगी. कर्मचारी संघ 8वें वेतन आयोग की बैठकों में इसी फॉर्मूले को बदलने की मांग कर रहे हैं. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई में हर चीज के रोज दाम बढ़ रहे हैं, बच्चों की पढ़ाई का खर्च और इलाज का खर्च पहले से काफी बढ़ गया है. ऐसे में इन सबको देखते हुए नए फॉर्मूले की जरूरत है.

अभी फैमिली यूनिट फॉर्मूला में एक परिवार को सिर्फ 3 यूनिट के बराबर माना जाता है यानी पति, पत्नी और एक बच्चा. इसी यूनिट के आधार पर यह अनुमान लगाया जाता है कि एक सामान्य परिवार को न्यूनतम स्तर का जीवन जीने के लिए कितना पैसा चाहिए. यह फॉर्मूला अक्रॉयड फॉर्मूले पर बना है, जो खाने, कपड़े और रहने जैसी जरूरी चीजों का खर्च निकालता है. कर्मचारी संघों का कहना है कि असल जिंदगी के परिवार बड़े हो गए हैं. सैलरी की गणना के लिए सिर्फ 3 नहीं बल्कि एक परिवार में 6 सदस्यों को गिनने की मांग की है. ऐसे परिवार के लिए मिनिमम सैलरी 69000 रुपए प्रति महीना की मांग की गई है. कर्मचारी संघों का कहना है कि मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स ऐक्ट और सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 के तहत परिवार की परिभाषा में बुजुर्ग माता-पिता भी आते हैं. यहां तक कि महिला कर्मचारी अपने ससुराल वालों को भी परिवार में शामिल कर सकती है.

...तो तनख्वाह में अच्छी-खासी हो सकती है बढ़ोतरी 
फैमिली यूनिट फार्मूला बदलने से सैलरी पर बहुत बड़ा फर्क पड़ सकता है.ऐसी स्थिति में फिटमेंट फैक्टर 3.833 हो जाएगा. यदि  वेतन आयोग इस गणना को मानता है तो इसका असर न सिर्फ बेसिक सैलरी पर बल्कि तमाम भत्तों, पेंशन और कुल मिलाकर पूरे पैकेज पर पड़ेगा. केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशन पाने वालों की तनख्वाह में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हो सकती है.

फैमिली यूनिट फॉर्मूला में क्या चाहते हैं कर्मचारी संघ बदलाव 
कर्मचारी संघों ने वेतन आयोग की बैठक में फैमिली यूनिट फॉर्मूला में बदलाव की मांग को लेकर प्रस्ताव रखा है. प्रस्ताव में सैलरी की गणना के लिए परिवार को 5 यूनिट मानने की बात कही गई है. यह प्रस्ताव इस तरह है...
1. कर्मचारी और उसकी पत्नी: पति 1 यूनिट और पत्नी 1 यूनिट (दोनों को मिलाकर 2 यूनिट)
2. दो बच्चे:  एक बच्चा 0.8 यूनिट, दोनों के मिलाकर कुल 1.6 यूनिट.
3. माता-पिता: दोनों को मिलाकर 0.8 यूनिट.
4. इन सभी को जोड़ने पर कुल 5.2 यूनिट बनती है, जिसे राउंड फिगर में 5 यूनिट माना गया है. 

हर 10 साल पर नए वेतन आयोग का गठन
वेतन आयोग केंद्र सरकार की ओर से गठित एक आयोग है, जो सरकारी कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और पेंशन की सिफारिशें करता है, ताकि महंगाई के अनुरूप जीवन स्तर सुधरे. केंद्र सरकार आमतौर पर हर 10 साल पर नए वेतन आयोग का गठन करती है. भारत में पहला वेतन आयोग 1946 में बना था.

अभी तक सात वेतन आयोग लागू हो चुके हैं. 8वां वेतन आयोग 3 नवंबर 2025 को गठित किया गया था. अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि यह आयोग परिवार की इकाई को लेकर क्या निर्णय लेता है. आपको मालूम हो कि 7वां पे कमिशन 1 जनवरी 2016 से लागू माना गया था, लेकिन सरकार ने इसे जून 2016 में मंजूरी दी थी. इसको देखते हुए कहा जा सकता है कि 8वां वेतन आयोग की सिफारिशों को चाहे सरकार जब भी मंजूरी दे लेकिन इसे 1 जनवरी 2026 से ही लागू माना जाएगा. ऐसे में बढ़ी हुई सैलरी इसी तारीख से जोड़कर दी जाएगी. एरियर की गणना भी 1 जनवरी 2026 से ही होगी.