Gold Loan vs Gold Overdraft: क्या होता है गोल्ड ओवरड्राफ्ट? कैसे होता है गोल्ड लोन से अलग.. क्यों रहता है इसमें नीलामी का खतरा?

गोल्ड लोन में जहां आप अपने गिरवे रखे सोने पर एक ही बार में पैसा उठाते हैं, बाद में पूरे अमाउंट पर ब्याय चुकाते हैं. वहीं गोल्ड ओवरड्राफ्ट में सोना गिरवी तो रखते हैं, लेकिन जितनी जरूरत होती है उतना पैसा निकालते हैं. और केवल उसी पर ब्याज चुकाते हैं.

Gold Overdraft
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 17 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 3:05 PM IST

भारत में सोना खरीदने का चलन काफी समय से चला आ रहा है. जहां कुछ लोग इसे निवेश के तौर पर खरीदते हैं, तो वहीं कुछ लोग इसे आभूषण के रूप के खरीदते हैं. लेकिन कई बार लोगों के उपर ऐसी वित्तीय समस्या आ जाती हैं कि उन्हें अपने सोने को गिरवी रखकर पैसा उठाना पड़ता है. ऐसे में उनके बाद दो ऑप्शन होते हैं या तो वह सोना सुनार के पास गिरवी रखें, या फिर बैंक से लोन उठाएं. लेकिन भारी ब्याज़ दोनों ही सूरत में उन्हें देना पड़ता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बैंक में गोल्ड गिरवी रखने के दो तरीके होते हैं.

जी हां, अगर आप नहीं जानते तो हम आपको बताते हैं. पहला तरीका होता है, गोल्ड लोन और दूसरा होता है, गोल्ड ओवरड्राफ्ट. गोल्ड लोन का तो सीधा मतलब होता है, सोने गिरवी रख पैसे लेना. लेकिन गोल्ड ओवरड्राफ्ट एक तरह से गोल्ड गिरवी रख एक क्रेडिट कार्ड मिलने जैसा होता है. तो चलिए आपको गोल्ड ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी के बारे में बताते हैं.

क्या होता है गोल्ड ओवरड्राफ्ट?
गोल्ट ओवरड्राफ्ट में आप अपना सोना गिरवी रखते हैं. बैंक आपके लिए एक ओवरड्राफ्ट खाता खोलता है, साथ ही एक चेकबुक देता है. बैंक की तरफ से आपके सोने की वैल्यू जितनी राशि उस खाते में डाल दी जाती है. अब जब भी आपको जरूरत पड़े, आप पैसा निकाल सकते हैं. लेकिन यहां आपको ब्याज़ केवल उतनी ही राशि पर देना पड़ता है, जितनी आपने खाते से निकाली होती है.

कैसे अलग है गोल्ड लोन से?
गोल्ड लोन में आप सोना गिरवी रखते हैं, जिसकी बाद पूरे गोल्ड के बराबर राशि का गोल्ड आपको मिल जाता है. लेकिन यहां आप पैसा जरूरत के अनुसार नहीं निकालते. बल्कि आपको एकमुश्त रकम दे दी जाती है. बाद में आपको पूरे गिरवी रखे गए गोल्ड पर ब्याज देना होता है. 

किस स्थिति में क्या है फायदेमंद?
अगर आपको बड़ी रकम की जरूरत है, तो बेहतर होगा कि आप गोल्ड लोन प्रेफर करें. इसमें आपको ज्यादा रकम मिलती है, जो आपकी जरूरत को पूरा करती है. लेकिन अगर आप बिजनेस रन करते हैं और समय-समय पर छोटी-मोटी जरूरत के लिए पैसों की जरूरत होती है, तो ओवरड्राफ्ट की फैसिलिटी आपके लिए बेहतर है. इसमें आपको ब्याज़ भी कम देना पड़ता है. साथ ही जब जरूरत तो तब पैसा निकाल सकते है.

क्या है ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी का नुकसान?
गोल्ड ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी का सबसे बड़ा नुकसान होता है कि अगर आप समय पर ब्याज़ या ईएमआई नहीं चुकाते हैं, तो बैंक आपके द्वारा गिरवी रखे गए सोने की नीलामी कर सकता है. जिससे आपको काफी नुकसान होगा. साथ ही अगर सोने की कीमत में कमी आ जाती है तो आपको ओवरड्राफ्ट खाते की रकम को बराबर रखने के लिए एक्स्ट्रा सोना गिरवी रखना पड़ सकता है.

 

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