बढ़ती जानकारी के साथ लोग इस बात को मान रहे हैं कि पैसे सेव करते से बेहतर है कि उसे निवेश किया जाए. निवेश के जरिए आपका पैसा सेव भी होता है, साथ ही वह ब्याज की मदद से बढ़ता भी है. निवेश के कुछ लोग जहां शेयर मार्केट में ट्रेडिंग का साहारा लेते हैं, जो थोड़ी जोखिम भरी होती है. वहीं कुछ लोग एसआईपी करते हैं, जो आज के समय में काफी पॉपुलर है. लेकिन एसआईपी भी मार्केट के अनुसार काम करती है. लेकिन निवेश के लिए एक स्कीम है जो इससे भी बेहतर और सेफ है. जिसे कहते हैं PPF.
पीपीएफ का मतलब होता है पब्लिक प्रोविडेंट फंड. यह निवेश करने का सबसे सेफ और गारंटीड तरीका है. इसमें आपको अपनी सेविंग पर ब्याज का मिलना तो गारंटीड है ही, साथ ही मार्केट रिस्क के चलते इसके डूबने का खतरा नहीं होता, क्योंकि यह मार्केट से उतार-चढ़ाव से नहीं जुड़ा होता. इसका कनेक्शन होता है सरकार के साथ.
जहां लोग एसआईपी को केवल इसलिए चुनते हैं कि उसमें ब्याज कंपाउंडिंग पर मिलता है. तो बता दें कि पीपीएफ में भी ब्याज आपको कंपाउंडिंग के आधार पर ही मिलता है. साथ ही मौजूदा समय में इसपर मिलने वाले ब्याज की दर 7.1 प्रतिशत है.
जो लोग नहीं जानते हैं कि कंपाउंडिंग क्या होती है, तो बता देते हैं. दरअसल कंपाउंडिंग का अर्थ है कि पहले आपकी राशि पर ब्याज मिलता है. जब दूसरी बार ब्याज मिलता है, तो वह राशि पर भी मिलता है और पहले से आए हुए ब्याज पर भी. यानी हर बार मिले हुए ब्याज के साथ आपकी राशि बढ़ती जाती है और मिलने वाला ब्याज ज्यादा होता है. सीधे शब्दों में कंपाउंडिंग का अर्थ है ब्याज पर भी ब्याज.
पीपीएफ में आप हर साल कम से कम 500 और ज्यादा से ज्यादा 1.5 लाख का निवेश कर सकते हैं. साथ ही यह निवेश आमतौर पर 15 साल के लिए होता है. हालांकि कि अगर टेन्योर बढ़ाना चाहें तो बढ़ सकता है. लेकिन यह 5 साल के ब्लॉक में बढ़ेगा. यानी 15 साल के बाद 5 साल जुड़ने से वह 20 साल हो जाएगा.
पीपीएफ में आपको टैक्स का लाभ भी मिलता है. सेक्शन 80C के तहत इसमें आपको मिलने वाला वाला ब्याज और आखिर में मिलने वाला अमाउंट पूरी तरह से टैक्स फ्री होता है. इसलिए यहां किसी प्रकार की कटौती भी नहीं होती है.
आप अपना पीपीएफ खाता किसी पोस्ट ऑफिस या फिर चाहें तो किसी भी बैंक की मदद से खुलवा सकते हैं. पीपीएफ एक स्मॉल सेविंग स्कीम के तहत आती है. इसी वजह के मैच्योरिटी के समय इसे टैक्स फ्री रखा जाता है.