क्या मकान मालिक कभी भी बढ़ा सकता है किराया? जान लें किराएदारों के कानूनी अधिकार.. क्यों है जरूरी रेंट एग्रीमेंट

भारत में अक्सर मकान मालिक और किराएदार के बीच किराया बढ़ाने और मकान खाली करने को लेकर विवाद होता है. ऐसे में इस विवाद से बचने के लिए रेंट एग्रीमेंट काम आता है. लेकिन कई बार मौखिर रूप पर किराएदारी चलती है, ऐसे में कानूनी मदद लेनी पड़ती है.

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gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 10 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:53 PM IST

किराए पर रहने वालों लोगों के मन में कई बार यह सवाल आता है कि क्या मकान मालिक कभी भी किराया बढ़ा सकता है. ऐसा करने से उनकी परेशानी काफी हद तक बढ़ जाएंगी. साथ ही अगर मकान मालिक घर खाली करवाने लगे तो घर खोजने की परेशानी होगी वो अलग. तो बता दें कि कानूनी तौर पर मकान मालिक ऐसे ही किराया नहीं बढ़ा सकता.

इसके नियम साफ तौर पर आपके रेंट एग्रीमेंट और राज्य के लागू नियमों पर निर्भर करती है. अगर किराए का लिखित समझौता हुआ है, तो मकान मालिक और किराएदार दोनों को उसी की शर्तों को मानना पड़ेगा.  ऐसे में किराया बढ़ाने या मकान खाली कराने के लिए एग्रीमेंट में तय नियमों को मानना जरूरी है.

रेंट एग्रीमेंट होता है सबसे बड़ा सबूत

अगर आपके पास लिखित रेंट एग्रीमेंट है, तो उसमें आमतौर पर किराया बढ़ाने का टाइम, नोटिस पीरियड और मकान खाली करने से जुड़े नियम पहले से लिखे होते हैं. ऐसे में मकान मालिक मनमाने तरीके से अचानक किराया नहीं बढ़ा सकता और न ही तुरंत घर खाली करने के लिए मजबूर कर सकता है. वहीं, अगर किराएदारी केवल मौखिक समझौते पर चल रही है, तो विवाद की स्थिति में कानून का साहारा लेना पड़ सकता है. इसलिए हमेशा लिखित रेंट एग्रीमेंट कराना चाहिए, जो दोनों के लिए फायदे का सौदा होता है.

घर खाली कराने के लिए भी तय हैं कानूनी नियम

भारत में मकान मालिक किसी किराएदार को सिर्फ अपनी इच्छा से तुरंत बाहर नहीं निकाल सकता. यदि किराएदार समय पर किराया दे रहा है और एग्रीमेंट की शर्तों का पालन कर रहा है, तो बेदखली के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनानी पड़ती है. कई मामलों में पहले लिखित नोटिस देना जरूरी होता है. यदि किराएदार तय समय के बाद भी मकान खाली नहीं करता, तभी मकान मालिक कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकता है. जबरन ताला लगाना, सामान बाहर फेंकना या धमकी देकर घर खाली कराना कानूनी तरीका नहीं माना जाता.

किराएदार और मालिक किन बातों का रखें ध्यान

एक्सपर्ट्स का कहना है कि किराए से जुड़े विवाद सही दस्तावेज न होने की वजह से पैदा होते हैं. इसलिए किराएदार को हमेशा रेंट एग्रीमेंट की कॉपी अपने पास रखनी चाहिए और किराया बैंक या डिजिटल तरीके से देने का रिकॉर्ड भी संभालकर रखना चाहिए. दूसरी ओर, मकान मालिक को भी किराया बढ़ाने या मकान खाली कराने से पहले तय प्रक्रिया और नोटिस का पालन करना चाहिए. 

 

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