किराए पर रहने वालों लोगों के मन में कई बार यह सवाल आता है कि क्या मकान मालिक कभी भी किराया बढ़ा सकता है. ऐसा करने से उनकी परेशानी काफी हद तक बढ़ जाएंगी. साथ ही अगर मकान मालिक घर खाली करवाने लगे तो घर खोजने की परेशानी होगी वो अलग. तो बता दें कि कानूनी तौर पर मकान मालिक ऐसे ही किराया नहीं बढ़ा सकता.
इसके नियम साफ तौर पर आपके रेंट एग्रीमेंट और राज्य के लागू नियमों पर निर्भर करती है. अगर किराए का लिखित समझौता हुआ है, तो मकान मालिक और किराएदार दोनों को उसी की शर्तों को मानना पड़ेगा. ऐसे में किराया बढ़ाने या मकान खाली कराने के लिए एग्रीमेंट में तय नियमों को मानना जरूरी है.
अगर आपके पास लिखित रेंट एग्रीमेंट है, तो उसमें आमतौर पर किराया बढ़ाने का टाइम, नोटिस पीरियड और मकान खाली करने से जुड़े नियम पहले से लिखे होते हैं. ऐसे में मकान मालिक मनमाने तरीके से अचानक किराया नहीं बढ़ा सकता और न ही तुरंत घर खाली करने के लिए मजबूर कर सकता है. वहीं, अगर किराएदारी केवल मौखिक समझौते पर चल रही है, तो विवाद की स्थिति में कानून का साहारा लेना पड़ सकता है. इसलिए हमेशा लिखित रेंट एग्रीमेंट कराना चाहिए, जो दोनों के लिए फायदे का सौदा होता है.
भारत में मकान मालिक किसी किराएदार को सिर्फ अपनी इच्छा से तुरंत बाहर नहीं निकाल सकता. यदि किराएदार समय पर किराया दे रहा है और एग्रीमेंट की शर्तों का पालन कर रहा है, तो बेदखली के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनानी पड़ती है. कई मामलों में पहले लिखित नोटिस देना जरूरी होता है. यदि किराएदार तय समय के बाद भी मकान खाली नहीं करता, तभी मकान मालिक कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकता है. जबरन ताला लगाना, सामान बाहर फेंकना या धमकी देकर घर खाली कराना कानूनी तरीका नहीं माना जाता.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि किराए से जुड़े विवाद सही दस्तावेज न होने की वजह से पैदा होते हैं. इसलिए किराएदार को हमेशा रेंट एग्रीमेंट की कॉपी अपने पास रखनी चाहिए और किराया बैंक या डिजिटल तरीके से देने का रिकॉर्ड भी संभालकर रखना चाहिए. दूसरी ओर, मकान मालिक को भी किराया बढ़ाने या मकान खाली कराने से पहले तय प्रक्रिया और नोटिस का पालन करना चाहिए.