Success Story: पढ़ाई में नहीं लगता था मन, किसी तरह से पाई थी 8 हजार रुपए महीने वाली नौकरी, आज बिजनेस से हैं करोड़ों के मालिक, जानें इस शख्स की सफलता की कहानी

Success Story of Nikhil Kamath: हम आज आपको एक ऐसे शख्स की सफलता की कहानी बता रहे हैं, जिनका मन पढ़ाई में नहीं लगता था. 10वीं क्लास में ही पढ़ाई छोड़ दी. कॉल सेंटर में किसी तरह 8 हजार रुपए महीने वाली नौकरी मिली. इस नौकरी में उनका मन नहीं लगा और फिर बिजनेस करने की ठानी. आज बिजनेस से हैं करोड़ों रुपए के मालिक. हम बात कर रहे हैं जेरोधा के को-फाउंडर निखिल कामथ की सफलता की कहानी. 

File photo of Nikhil Kamath. (Photograph by Hardik Chhabra)
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 25 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 8:16 AM IST

Nikhil Kamath Success Story: मशहूर शायर अल्लामा इकबाल का शेर 'खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है'. यह शेर भारत की सबसे बड़ी रिटेल ब्रोकरेज कंपनी जेरोधा (Zerodha) के को-फाउंडर निखिल कामथ पर एकदम सटीक बैठता है. निखिल कामथ का मन पढ़ाई में नहीं लगता था. 10वीं क्लास में ही पढ़ाई छोड़ दी. इसके बाद कॉल सेंटर में किसी तरह 8 हजार रुपए महीने वाली नौकरी मिली. इस नौकरी में उनका मन नहीं लगा और फिर बिजनेस करने की ठानी. बड़ी डिग्री नहीं होने के बावजूद आज बिजनेस से हैं करोड़ों रुपए के मालिक. आप भी जानिए निखिल कामथ की सफलता की कहानी. 

स्कूल जाने से थी नफरत 
निखिल कामथ का जन्म साल 1986 में कर्नाटक के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था. निखिल कामथ बता चुके हैं कि उनका मन कभी भी पढ़ाई में नहीं लगता था. उन्हें स्कूल जाने से नफरत थी. उन्होंने 9वीं क्लास तक पढ़ने के बाद 10वीं की पढ़ाई छोड़ दी. हालांकि उनके माता-पिता ने उन्हें परंपरागत शिक्षा ग्रहण करने के लिए विवश करने के जगह उनकी जिज्ञासा को पनपने का मौका दिया.

उत्साह नहीं हुआ काम 
निखिल कामथ का बिजनेस की तरफ झुकाव 14 साल की उम्र में हो गया था. वह जब 9वीं क्लास में पढ़ते थे, तभी अपने दोस्तों के संग मिलकर पुराने मोबाइल फोन को खरीदकर उसे बेचने का काम शुरू कर दिया था. इस धंधे में उन्हें काफी मुनाफा हो रहा था. हालांकि मोबाइल खरीद-बिक्री के बारे में उनके घरवालों को पता नहीं था लेकिन एक दिन उनकी मां को मालूम चल गया. कामथ की मां काफी गुस्से में हो गईं और उन्होंने कामथ के सारे मोबाइल फोन टॉयलेट में फ्लश कर दिए. आपको मालूम हो कि इस घटना के बाद निखिल कामथ मायूस नहीं हुए बल्कि यह घटना उन्हें जोखिम लेने और असफलताओं से सीखने के लिए और ज्यादा प्रेरित किया.

कॉल सेंटर में मिली थी पहली नौकरी 
एक पॉडकास्ट में कामथ बता चुके हैं कि 2000 के दशक में उन्हें पहली नौकरी बेंगलुरु के एक कॉल सेंटर में मिली थी. वह यहां रात के शिफ्ट में काम करते थे. उन्हें कॉल सेंटर में नौकरी के दौरान सालाना लगभग 88000 रुपए मिलते थे. महीने का हिसाब देखें तो करीब 7000 से 8000 रुपए के बीच सैलरी मिलती थी. निखिल कामथ बता चुके हैं कि कॉल सेंटर इस जॉब ने उन्हें अनुशासन और काम की समझ सिखाई. यह आगे चलकर जेरोधा को स्थापित करने में उनके काम आई.

जीवन के अनुभवों और गलतियों से पाई सफलता 
निखिल कामथ के मुताबिक उनके पैरेंट्स कुछ ऐसे सिद्धांतों का पालन करते थे जो वर्तमान समय में काफी दुर्लभ है. कामथ के अनुसार उनके घर में प्रयोग करने की आजादी थी. यदि कोई प्रयोग सफल नहीं होता था तो उसे अंत नहीं बल्कि एक सबक माना जाता था. निखिल ने जब 15-16 साल की उम्र में पढ़ाई छोड़ने का फैसला किया तो उनके पैरेंट्स ने आगे पढ़ाई के लिए उनपर कोई दबाव नहीं बनाया बल्कि उन्हें अपना रास्ता चुनने दिया. उनके अभिभावक ने कभी भी शैक्षणिक सफलता को ही सफलता का एकमात्र पैमाना नहीं माना. निखिल कामथ के मुताबिक वह 10वीं की पढ़ाई छोड़ने के बाद कॉल सेंटर में काम करने लगे लेकिन वह खाली समय में स्टॉक ट्रेडिंग भी सीखते थे. निखिल कामथ कहते हैं कि उनकी सफलता में किताबों का कोई रोल नहीं रहा है बल्कि उन्होंने सफलता जीवन के अनुभवों और गलतियों से पाई है. 

साल 2010 में रखी थी जेरोधा की नींव 
निखिल कामथ ने अपने भाई नितिन कामथ संग मिलकर साल 2010 में रिटेल ब्रोकरेज कंपनी जेरोधा की नींव रखी. निखिल कामथ के नेतृत्व में यह कंपनी भारत के खुदरा ब्रोकरेज क्षेत्र की सूरत बदल दी. निखिल ने डिस्काउंट ब्रोकरेज मॉडल पेश किया. इससे आम लोगों के लिए शेयर मार्केट में पैसे निवेश करना और आसान व सस्ता हो गया. फोर्ब्स के मुताबिक निखिल कामथ की नेटवर्थ 2.5 अरब डॉलर (करीब 23 हजार करोड़ रुपए) है. निखिल कामथ भारत के सबसे धनी सेल्फ-मेड अरबपतियों में से एक हैं. निखिल कामथ की सफलता यह बताती है कि कोई भी व्यक्ति बिजनेस में सफल हो सकता है, बस इसके लिए स्पष्ट नीति, दूरदृष्टि और ईमानदारी होनी चाहिए.

 

Read more!

RECOMMENDED