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57 की उम्र में NEET परीक्षा देकर कायम की मिसाल, कहा- सपनों की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती

अशोक बहार का जीवन अनुभव और जज्बे का अनूठा मेल है. एक खाद बनाने वाली कंपनी में मार्केटिंग प्रमुख रह चुके अशोक ने साल 2000 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी.

अशोक बहार
आशीष श्रीवास्तव
  • लखनऊ,
  • 04 मई 2026,
  • अपडेटेड 12:25 PM IST
  • रिटायरमेंट के 25 साल बाद फिर उठाईं किताबें
  • अब सेवा के लिए चाहते हैं मेडिकल डिग्री

सपनों की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती, इस बात को लखनऊ के आलमबाग निवासी 57 वर्षीय अशोक बहार ने सच कर दिखाया है. रविवार को आयोजित राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) 2026 में जब अशोक बहार लखनऊ मांटेसरी स्कूल परीक्षा केंद्र पर युवाओं के बीच पहुंचे, तो हर कोई हैरान रह गया. उन्होंने न केवल इस परीक्षा में भाग लिया, बल्कि साबित किया कि लक्ष्य के प्रति मेहनत का जज्बा हो, तो उम्र महज एक आंकड़ा बनकर रह जाती है.

57 साल की उम्र में दी नीट-यूजी परीक्षा
अशोक बहार का जीवन अनुभव और जज्बे का अनूठा मेल है. एक खाद बनाने वाली कंपनी में मार्केटिंग प्रमुख रह चुके अशोक ने साल 2000 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी. उनके परिवार में चिकित्सा क्षेत्र का गहरा माहौल रहा है. उनकी पत्नी डॉ. मंजुल बहार डॉक्टर हैं और वर्तमान में अमेरिका में कार्यरत हैं. परिवार के इस माहौल ने उनके भीतर डॉक्टर बनने की उस दबी हुई इच्छा को हमेशा जिंदा रखा, जो दशकों पहले अधूरी रह गई थी.

असफलता से न घबराने की दी सीख
परीक्षा केंद्र से बाहर निकलते हुए अशोक बहार ने बताया कि उन्हें दवाओं की अच्छी समझ तो है, लेकिन समाज सेवा के लिए डॉक्टर की औपचारिक डिग्री अनिवार्य है. युवाओं को सीख देते हुए उन्होंने कहा, 'कभी भी उम्र या परिस्थितियों का बहाना बनाकर अपने सपनों से समझौता नहीं करना चाहिए.' अपनी इस पहल से उन्होंने उन हजारों युवाओं को प्रेरित किया है, जो नीट जैसी कठिन परीक्षाओं में एक-दो बार असफल होने पर निराश हो जाते हैं.

उम्र सिर्फ एक नंबर
अशोक बहार का यह साहस साबित करता है कि सीखने की ललक और अपने सपनों को जीने का उत्साह किसी उम्र का मोहताज नहीं होता. केंद्र पर मौजूद अन्य परीक्षार्थियों और सुरक्षा कर्मियों ने भी उनके इस जज्बे को सलाम किया.

 

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