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10 हजार नए बेड की घोषणा के बीच DU का हॉस्टल प्रोजेक्ट 4 साल से सुस्त, 2028 तक पूरा होने का इंतजार

मौजूदा योजना के मुताबिक इस परियोजना पर करीब 372 करोड़ रुपये की लागत आएगी और हॉस्टल में लगभग 1,550 बेड तैयार किए जाएंगे. निर्माण कार्य जून-जुलाई 2028 तक पूरा होने की उम्मीद है.

Delhi student hostel
सुशांत मेहरा
  • नई दिल्ली ,
  • 16 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 6:16 PM IST
  • इस परियोजना पर करीब 372 करोड़ रुपये की लागत आएगी
  • DU का हॉस्टल प्रोजेक्ट 4 साल से सुस्त

दिल्ली में पढ़ाई के लिए यूपी, बिहार और दूसरे राज्यों से आने वाले छात्रों के सामने रहने की बड़ी चुनौती है. सत्य निकेतन हादसे के बाद छात्रों की सुरक्षा को लेकर सवाल और गंभीर हुए हैं. इसी बीच मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक दिन पहले दिल्ली में छात्रों के लिए 10 हजार नए बेड की व्यवस्था करने की घोषणा की है. सरकार का दावा है कि इससे छात्रों को महंगे और असुरक्षित PG आवास पर निर्भरता से राहत मिलेगी.

DU की पुरानी हॉस्टल परियोजनाओं की रफ्तार पर सवाल
दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्र हॉस्टल की कमी दूर करने के लिए पहले से चल रही परियोजनाओं की रफ्तार सवालों के घेरे में है. मई 2022 में DU के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने करीब 2,000 बेड की क्षमता वाले दो हॉस्टल बनाने की घोषणा की थी. चार साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी इन परियोजनाओं में अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी.

2023 में NBCC को मिला था प्रोजेक्ट, मंजूरियों में हुई देरी
प्रोजेक्ट से जुड़े सूत्र ने आज तक को बताया कि मुखर्जी नगर से जुड़ी DU की इस हॉस्टल परियोजना का काम वर्ष 2023 में NBCC को दिया गया था. लेकिन 2023 से 2025 के बीच दिल्ली जल बोर्ड और पर्यावरण विभाग से जरूरी क्लीयरेंस नहीं मिलने के कारण परियोजना में करीब दो साल की देरी हुई. इसके बाद अप्रैल 2026 में निर्माण कार्य शुरू हुआ.

372 करोड़ की लागत से बनेंगे करीब 1,550 बेड
मौजूदा योजना के मुताबिक इस परियोजना पर करीब 372 करोड़ रुपये की लागत आएगी और हॉस्टल में लगभग 1,550 बेड तैयार किए जाएंगे. निर्माण कार्य जून-जुलाई 2028 तक पूरा होने की उम्मीद है.

हाई कोर्ट भी हॉस्टल की कमी पर जता चुका है चिंता
छात्र आवास की कमी का मुद्दा नया नहीं है. दिल्ली हाई कोर्ट ने भी सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय में हॉस्टल की बेहद कम संख्या पर चिंता जताई थी. कोर्ट ने कहा था कि हॉस्टल की कमी छात्रों को असुरक्षित PG आवास में रहने के लिए मजबूर करती है, जिससे उनकी जान और सुरक्षा को खतरा हो सकता है.

10 हजार नए बेड के बीच पुरानी परियोजनाओं की रफ्तार चुनौती
ऐसे में एक तरफ दिल्ली सरकार 10 हजार नए बेड तैयार करने की योजना लेकर आई है, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली विश्वविद्यालय की पुरानी हॉस्टल परियोजनाएं लंबे समय से निर्माण और मंजूरियों की प्रक्रिया में उलझी रही हैं. बड़ा सवाल यही है कि दिल्ली में लगातार बढ़ रही छात्र आबादी के मुकाबले हॉस्टल की जरूरत कितनी तेजी से पूरी हो पाएगी.

 

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